काल के दूत आने पर
एक साहब ने तोता पाल रखा था और उस से बहोत प्रेम करते थे!
एक दिन एक बिल्ली उस तोते पर झपटी और तोता उठा कर ले गई वो साहब रोने लगे!
तो लोगो ने कहा: भाई आप क्यों रोते हो? हम आपको दूसरा तोता ला देते हैं!
वो साहब बोले: मैं तोते की जुदाई पर नही रो रहा हूं।
उनसे पूछा गया कि फिर क्यों रो रहे हो?
वो साहब कहने लगे दरअसल बात ये है कि मैंने उस तोते को मंत्र सिखा रखा था और वो सारा दिन मंत्र रटता रहता था! आज जब बिल्ली उस पर झपटी तो वो मंत्र पढ़ना भूल गया और टाएं टाएं करने लगा! अब मुझे ये फिक्र खाए जा रही है कि मंत्र तो मैं भी पढ़ता हूँ लेकिन जब काल के दूत मुझ पर झपटेगें, न मालूम मेरी जबान से मंत्र निकलेगा या तोते की तरह टाएं-टाएं निकलेगी।
इसीलिए महापुरुष कहते हैं कि ज्ञान का अभ्यास करके इतना अभ्यस्त हो जाओ कि हर हर स्थिति में ध्यान परमात्मा में ही लगा रहे! भगवान के सिवाय और कुछ दिखाई न दे!
ध्यान रहे, कहीं ऐसा न हो कि अभ्यास की कमी के कारण हम भी तोते की तरह भगवान के नाम की जगह हाय-हाय करने लगें!
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