Category: Stories

  • सच्चा सुख और आनंद

    सच्चा सुख और आनंद पुराने समय में संत गाँव के लोगों को प्रवचन देते थे! भिक्षा मांगकर अपना जीवनयापन करते थे। एक दिन गाँव की महिला ने एक संत के लिए खाना बनाया। जब संत उस महिला के घर खाना खाने गए तो उस महिला ने पूछा कि, महाराज हमें जीवन में सच्चा सुख और…

  • एक पुरानी तिब्बती कथा है कि – *दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे।*

    एक पुरानी तिब्बती कथा है कि – *दो उल्लू एक वृक्ष पर आ कर बैठे।* *एक ने सांप अपने मुंह में पकड़ रखा था।* भोजन था उनका, सुबह के नाश्ते की तैयारी थी। *दूसरा एक चूहा पकड़ लाया था।* दोनों जैसे ही बैठे वृक्ष पर – पास पास आ कर *एक के मुंह में सांप…

  • जब जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा अर्जुन कर लेते हैं कि – *”सूर्यास्त तक नहीं मारा, तो अग्नि समाधि ले लूंगा!”*

    जब जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा अर्जुन कर लेते हैं कि – *”सूर्यास्त तक नहीं मारा, तो अग्नि समाधि ले लूंगा!”* तो, आचार्य द्रोण कमलव्यूह के अंदर जयद्रथ को छुपा देते हैं, जिसका आकर 32 कोस का था। जयद्रथ की सुरक्षा में बड़े-बड़े वीर तैनात थे। भगवान कृष्ण बोले, *अर्जुन तुम रास्ता साफ करो। मैं…

  • ज्ञान का अहंकार

    ज्ञान का अहंकारएक समय की बात है! एक घमंडी व्यक्ति शहर से पढ़ लिख कर अपने पुराने गांव आया! गांव और शहर के बीच में एक नदी पड़ती थी जिसको पार करने के बाद ही वह अपने गांव जा सकता था इसलिए उसने एक नाव वाले को बुलाया और उसके नाव में सवार होकर अपने…

  • दो चींटियों का दृष्टान्त है!

    दो चींटियों का दृष्टान्त है!एक नमक के ढेले पर रहने वाली चींटी की एक मिश्री के ढेले पर रहने वाली चींटी से मित्रता हो गयी ।मित्रता के नाते वह उसे अपने नमक के ढेले पर ले गयी और कहा–‘खाओ !’ वह बोली–‘क्या खायें,यह भी कोई मीठा पदार्थ है क्या?’ नमक के ढेले पर रहने वाली…

  • बिना ध्यान के जीवन में शांति असंभव

    🌿बिना ध्यान के जीवन में शांति असंभव🌿 महत्वपूर्ण सवाल अभ्यास से ध्यान का है। मन को स्वांसों की धुन में लीन करके जोर ध्यान पर है। ध्यान का अर्थ है : स्वार्थ, परम स्वार्थ, आत्यंतिक स्वार्थ क्योंकि इस जगत में ध्यान से ज्यादा निजी कोई बात नहीं है। ध्यान का कोई सामाजिक संदर्भ भी नहीं…

  • द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त “श्री कृष्ण” ने अर्जुन को समजाते हुए कहते हैं कि

    द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त “श्री कृष्ण” ने अर्जुन को समजाते हुए कहते हैं कि : हे पार्थ, तराजू पर पैर संभलकर रखना, संतुलन बराबर रखना, लक्ष्य मछली की आंख पर ही केंद्रित हो – उसका खास खयाल रखना।तो अर्जुन ने कहा : “हे प्रभु” सबकुछ अगर मुजे ही करना है, तो फिर आप…

  • सत्संग का फल

    सत्संग का फल एक था मजदूर। मजदूर तो था, साथ-ही-साथ किसी संत महात्मा का प्यारा भी था। सत्संग का प्रेमी था।उसने शपथ खाई थी! मैं उसी का बोझ उठाऊँगा, उसी की मजदूरी करूँगा, जो सत्संग सुने अथवा मुझे सुनाये..प्रारम्भ में ही यह शर्त रख देता था। जो सहमत होता, उसका काम करता।.एक बार कोई सेठ…

  • तुम कभी न भर पाओगे

    *☘ तुम कभी न भर पाओगे l ☘* एक साधु ने एक सम्राट के द्वार पर दस्तक दी । सुबह का वक़्त था और सम्राट बगीचे में घूमने निकला था । संयोग की बात सामने ही सम्राट मिल गया । *साधु ने अपना पात्र उसके सामने कर दिया सम्राट ने कहा क्या चाहते हो ??*🌹🌟साधु…

  • साहस की जरूरत

    🏵️ *”साहस की जरूरत”*🏵️ सरल मनुष्य परमात्मा से ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकता | उसे अपने परमपिता परमात्मा की निकटता अवश्य मिलती है | बस एक बार उसे स्पष्ट रूप से अपने व्यक्तित्व का बोध हो जाना चाहिए |उसे पता चल जाना चाहिए कि *मेरे भीतर क्या है और क्या नहीं है ?* संत…