Category: Stories

  • मन का दर्पण

    एक गुरुकुल के आचार्य अपने शिष्य की सेवा से बहुत प्रभावित हुए। विद्या पूरी होने के बाद जब शिष्य विदा होने लगा तो गुरू ने उसे आशीर्वाद के रूप में एक दर्पण दिया। वह साधारण दर्पण नहीं था । उस दिव्य दर्पण में किसी भी व्यक्ति के मन के भाव को दर्शाने की क्षमता थी।…

  • लक्ष्मण जी की आनंद यात्रा……

    भगवान श्रीराम ने एक बार पूछा कि लक्ष्मण तुमने अयोध्या से लेकर लंका तक की यात्रा की है परन्तु उस यात्रा में सबसे अधिक आनंद तुम्हें कब आया? लक्ष्मणजी ने कहा कि भैया, मेरी सबसे बढ़िया यात्रा तो लंका में हुई और वह भी तब हुई जब मेघनाद ने मुझे बाण मार दिया! प्रभु ने…

  • हीरा मोती

    एक साधु था! वह रोज घाट के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था, ”जो चाहोगे सो पाओगे”, जो चाहोगे सो पाओगे।” बहुत से लोग वहाँ से गुजरते थे पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नही देता था और सब उसे एक पागल आदमी समझते थे। एक दिन एक युवक वहाँ से गुजरा और उसने…

  • एक बाल्टी दूध…

    जो कोई करै सो स्वार्थी, अरस परस गुण देतबिन किये करै सो सूरमा, परमारथ के हेत! अर्थ: जो अपने हेतु किये गये के बदले में कुछ करता है वह स्वार्थी है। जो किसी के किये गये उपकार के बिना किसी का उपकार करता है। वह वस्तुत: परमार्थ के लिये कार्य है। एक बाल्टी दूध… 〰️〰️🌼〰️〰️एक…

  • अज्ञानता

    एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया। खाने के भी लाले पड़ गए।एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा- ‘बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ। उनसे कहना किइसे बेचकर कुछ रुपये दे दें। बेटा वह हार लेकर चाचा जी के…

  • जीवन का आनंद

    एक बार एक सम्राट एक साधु से बहुत प्रभावित हो गए। सम्राट रोज रात को अपने घोड़े पर सवार होकर राज्य का चक्कर लगाने निकलते थे, उस समय रोज उस साधु को देखते थे।वह साधु एक वृक्ष के नीचे अपनी मस्ती में बैठे, कभी बाँसुरी बजाते, कभी नाचते, कभी गीत गुनगुनाते और कभी चुपचाप बैठ…

  • मृत्यु एक सत्य हैं

    एक राधेश्याम नामक युवक था! स्वभाव का बड़ा ही शांत एवम सुविचारों वाला व्यक्ति था! उसका छोटा सा परिवार था जिसमे उसके माता- पिता, पत्नी एवम दो बच्चे थे! सभी से वो बेहद प्यार करता था! इसके अलावा वो कृष्ण भक्त था और सभी पर दया भाव रखता था! जरूरतमंद की सेवा करता था! किसी…

  • सबसे-बड़ा-मूर्ख

    एक बहुत धनी व्यापारी था। उसने बहुत धन सम्पत्ति इकट्ठा कर रखी थी। उसका एक नौकर था सम्भु। जो अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा गरीबों की मदद में खर्च कर देता था। व्यापारी रोज उसे धन बचाने की शिक्षा देता। लेकिन सम्भु पर कोई असर नहीं होता था। इससे तंग आकर एक दिन व्यापारी…

  • राम से बड़ा राम का ‘नाम’

    रामदरबार में हनुमानजी महाराज श्री रामजी की सेवा में इतने तन्मय हो गए कि गुरू वशिष्ठ k आने का उनको ध्यान ही नहीं रहा. .. सबने उठ कर उनका अभिवादन किया लेकिन हनुमानजी नहीं कर पाए. .. वशिष्ठ जी ने श्री रामजी से कहा कि राम गुरु का भरे दरबार में अभिवादन नहीं कर अपमान…