गुरु जी राउर चरनियां, बड़ा नीक लागेला।
जब से देखली सुरतिया, त प्रीत जागेला ॥
जब से सुनलीं सत्संग राउर, मन मयूर मुसुकाइल ।
दर्शन से सब पाप कटल, अब सगरी मइल धोवाइल ॥
दीहलीं ज्ञान के अंजोर, दिल में गीत जागेला ॥
देखि सरूप सलोना राउर, मन मोरा बउराला।
दमकत देखि लिलार, चांद अरू सूरज भी शरमाला ॥
गुरु जी राउरि, शरनियां में चित्त लागेला ॥
जब बोलीं तब अमरित बरसे, हँसी त बिजुली चमके ।
गुरु जी राउर कृपा भइल, त घट सूरज अस दमके ॥
पाई के ज्ञान के अंजोर, माया नींद भागेला ॥
आसमान में गुंजेला, जब भक्तन के जयकारा।
राउर किरपा से बरसे, सत्संग के निर्मल धारा ॥
प्रेमी नाचे ता-ता-थैया, बड़ा नीक लागेला ॥







