काहें लगवलीं गुरु जी देरिया, ए हमारी बेरिया ?
बार-बार हेरीं हम सरेहिया, काटीं मोरि बेड़िया ॥
द्रौपती के बेरी गुरु जी, काहे ना लगवलीं देरी।
शेबरी के खईलीं जूठी बेरिया, ए हमारी बेरिया ?
गजवा के ग्राह घेरि, तोहरा के जबे टेरी।
चलीं अइलीं छोड़ि के पनहिया, ए हमारी बेरिया ?
प्रह्लाद जब हेरि, चलि अइलीं खंभ फोरी।
राखि लीहलीं भक्त के सनेहिया, ए हमारी बेरिया ?
बिदुर के बेरी प्रभु जी, साग खाये गइलीं दौरी।
बिनहीं बोलवले तजि अटरिया, ए हमारी बेरिया ?
कहे शील हाथ जोड़ि, संत से निहोरा मोरी।
काहें मोरा बेरि निरमोहिया, निरमोहिया, ए हमारी बेरिया ?







