पूरा भइल अभिलाष हो, गुरु जी तोहरी दुवरिया।
अर्पित तन-मन-प्रान हो, गुरु जी तोहरी दुवरिया ॥
तोहरी दुवरिया गुरु जी, अनहद बाजे,
बिन सुर सरगम साज हो, गुरु जी तोहरी दुवरिया ॥
तोहरी दुवरिया बिना चांद सूरुज के,
अपने से होखे उजियार हो, गुरु जी तोहरी दुवरिया ॥
तोहरी दुवरिया बहे, ज्ञान की गंगा,
बरसेला अमरित धार हो, गुरु जी तोहरी दुवरिया ॥
तोहरी दुवरिया भइले, प्रेमी शरणागत,
राखि लिहीं प्रेम के लाज हो, गुरु जी तोहरी दुवरिया ॥







