ई सुंदर देहिया माटी के बा, ये में सोना के गहना का होई ॥
ई माटी के देहिया माटी होई।
मां-बाप बहन भाई रोई ॥
सब रोइहें त तू ना रोइब, त ई प्रीति बढ़ा के का होई ॥
तू बोलत बा सब अपना बा।
क्षण भर में ई सब सपना बा॥
जब साथ में कुछुवो ना जाई, त ई महल बना के का होई ॥
ई पुतला बना के जे भेजले बा।
दिन-रात खबरिया ऊ रखले बा ॥
तू उनके त भुला गइल, पीछे पछता के का होई ॥
तू प्रभु के भजनिया ना कईल।
तू त कवनो लोक के ना भईल ॥
जब मनवा में मईल बड़ले बार, तब गंगा नहा के का होई ॥
जब संत सरनिया ना गईल।
माया में तू त भुला गईल ॥
इहां आ के किछुवो ना कईल, त ई मुंहवा देखा के का होई ॥







