झुकलीं चरनियां तोहार, गुरु जी हमके रहिया देखाईं ॥
लोग आगे-पीछे के, बतिया सुनावे।
मरम न जाने, खाली मन भरमावे ॥
थकलीं हम करि गुहार, हमार सब भरमिया भगाईं ॥
झुकलीं चरनियां तोहार ..
जाये के बा एक दिन, ई त हम जानी।
जियते मरम जिनगी, के नाहीं जानी ॥
अईलीं दुअरिया तोहार, मरम के बतिया बताईं ॥
झुकलीं चरनियां तोहार ….
जियरा पियासल, ना चैन कहीं पावे।
खाली बतिया ना, पियास मिटावे ॥
अईलीं सरनिया तोहार, गुरु जी पियसिया मिटाईं ॥
झुकलीं चरनियां तोहार …
सुनीला कि अंदर, आनंद भरब बा।
कइसे जाईं दरवाजा, बंद परल बंद बा ॥
अईली दुअरिया तोहार, दुअरिया अब खुलवाईं ॥
झुकलीं चरनियां तोहार …







