ज्ञान की सुगंध
ज्ञान चन्दन के समान और गुरु वायु के समान है। पूरा चंदन का पेड़ सुगंध से भर जाता है, लेकिन अगर वह अपनी खुशबू को दूर करना चाहता, तो भी नहीं कर पाता। फिर जब हवा चलती है, तो वह सुगंध को पूरे जंगल में ले जाती है। फलस्वरूप अन्य वृक्ष चंदन के वृक्ष के समान सुगंधित हो जाते हैं।
वैसे ही सारा संसार ज्ञान से महकता है, लेकिन गुरु की कृपा रुपी हवा के बिना कोई भी उस आनंद का अनुभव नहीं कर सकता है।
जब गुरु आते हैं तो ज्ञान देते हैं,
और जो इसे प्राप्त करते हैं –
वे तब अपने अन्दर के आनंद का अनुभव करते हैं।
- श्री हंस जी महराज
25 दिसंबर 1959
दनकौर, बुलंदशहर उत्तर प्रदेश
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