In Hindi, protest is a request.

हिंदी में विरोध ही अनुरोध

क्या लिखा ? कैसे लिखा ? किस क्वालिटी का लिखा ? कब लिखा ? कहां छपा ? उसे पढ़ा गया कि नहीं पढ़ा गया ? ‘रिव्यू’ हुए कि नहीं? चर्चा हुई कि नहीं? किसी बड़े ने उल्लेख किया कि नहीं? ये सब अब बेकार की बातें हैं। असल बात है कि आप विरोध के लेखक हैं कि अनुरोध के ? आप सत्ता, व्यवस्था के विरोध में हैं कि नहीं? हम पहले गुरुदत्त की तरह अपने को ‘सिस्टम’ का ‘विक्टिम’ दिखाते हैं, फिर अंत में गाने लगते हैं कि ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है?

यह हिंदी का विरोध-युग है। यहां रचना है। प्रतिरोध ही रचना है। विरोध-अनुरोध के विलोम में सब कुछ दो टूक है: सहमति विरोध ही फासिज्म है, चमचागीरी है, चापलूसी है, गुलामी है। इसके बरक्स असहमति आजादी है, जनतंत्र है, साहित्य है। असहमति ही कविता, कहानी और आलोचना है। असहमति का सौंदर्य ही असली सौंदर्य है। उसी का मूल्य है।

सहमति ‘लिमिटेड’ होती है, ससीम होती है, जबकि असहमति ‘अनलिमिटेड’ होती है, असीम होती है। असहमति ‘नेति-नेति’ होती है।

जिस नेति-नेति तक बड़े-बड़े ज्ञानी-ध्यानी वेदोपनिषदों को पढ़-गुनकर पहुंचे, वहां आज का लेखक अपनी आंख खोलते ही पहुंच जाता है। हां-हां करना, जी-जी करना, हां जी-हां जी करना, जी हां-जी हां करना, सर-सरकरना सिर्फ चापलूस, चमचा और दासानुदास बनाता है।

कभी कहा जाता था कि वियोगी होगा पहला कवि, आजकल चलता है- विरोधी होगा पहला कवि या विद्रोही होगा पहला कवि या ‘प्रोटेस्टर’ होगा पहला कवि या ‘बोक’ होगा पहला कवि या ‘प्रोवोक’ होगा पहला कवि। जीवन में हर कोई किसी न किसी का चमचा, करछुल, चीमटा बनकर काम चलाता है। इन दिनों के लेखन में

‘ च-कार’ की जगह ‘न-कार’ ही सब कुछ है। यूं अन्य भारतीय भाषाएं अपने विरोधी तेवरों के लिए बहुत इतराती हैं, पर हिंदी वाला अपने विरोधी होने का ढिंढोरा नहीं पीटता। इसीलिए बहुत भाषा लेखकों मीडिया से लोग उसे विरोध की जगह अनुरोध की समझ लेते हैं। यकीन न हो, तो हिंदी के की विरोधी परंपरा को देख लें। सोशल में तो ऐसे लेखकों की भरमार ही है।

यहां एक से एक विरोधी लेखक हैं। कोई जन्मजात विरोधी है, तो कई अनुरोधी से विरोधी हुएलेखक हैं, तो कई विरोधियों के भी धुर विरोधी हैं। ही और तो और, हिंदी में एक अलंकार का नाम विरोधाभास रख दिया गया है। अगर विरोध हिंदी की भाषा न होती, तो क्या उसके एक अलंकार का नाम ही विरोध से शुरू होता ?

हिंदी ऐसी कमाल की भाषा है कि उसका मुंह ही नहीं, मुहावरा तक विरोध का मुहावरा है और शायद इसीलिए यह कमाल है कि एक से एक विरोधी लेखक होने के बावजूद उसके एक भी लेखक को किसी ने ‘टच’ नहीं किया। यही हिंदी का हुनर है। बाकी भारतीय भाषाओं के विरोधी लेखक आसानी से पकड़ में आ जाते हैं, सजा पाते हैं और चर्चा में आ जाते हैं, जबकि हिंदी में एक से एक विरोधी लेखक होने के बावजूद कोई किसी को ‘टारगेट’ नहीं कर सका है।

इसीलिए मैं कहता हूं कि अगर विरोध की कला सीखनी हो, तो हिंदी से सीखें कि विरोध भी करते रहें, चर्चा भी कराते रहें, लेकिन मजाल कि कोई कुछ बिगाड़ पाए। कारण यह है कि हिंदी दोहरे-तिहरे अर्थ की मास्टर है, इसीलिए इसमें विरोधाभास नाम का अलंकार सक्रिय रहता है, जिसकी परिभाषा हेरा-फेरी को सही ठहराती है-जहं विरोध सो लगत है होत न सांच विरोध, यानी जहां विरोध जैसा लगे, वास्तव में विरोध न हो, यानी हिंदी में विरोध भी अनुरोध हो सकता है।

हिंदी में ‘ब्याज निंदा’ व ‘ब्याज स्तुति’ नामक कभी स्तुति दो अलंकार और भी हैं, जिनके चलते निंदा भी स्तुति सी नजर आती है और कभी भी निंदा सी नजर आती है। इसी तरह, हिंदी में तो एक गाने में भी ‘ना-ना’ का मतलब ‘हां-हो जाता है, जिसमें नायिका गाती है कि ना-हां’ ना करते प्यार तुम्हीं से कर बैठे।

सुधीश पचौरी हिंदी साहित्यकार

What did you write? How did you write it? What quality was it? When was it written? Where was it published? Was it read or not? Were there reviews? Was it discussed or not? Did any prominent people mention it or not? All of this is useless now. The real question is: are you a writer of protest or a request? Are you against power and the system or not? Like Guru Dutt, we first portray ourselves as victims of the system, then finally start singing about how even if we get this world, what is there?

This is the era of protest in Hindi. Here, there is creation. Resistance is creation. In the opposite of protest and request, everything is clear: agreement is fascism, sycophancy, flattery, slavery. In contrast, dissent is freedom, democracy, literature. Dissent is poetry, story, and criticism. The beauty of dissent is true beauty. Only that has value.

Agreement is limited, finite, while disagreement is unlimited, limitless. Disagreement is “neti-neti.”

The Neti-Neti that great scholars and meditators reached after studying the Vedas and Upanishads, today’s writers reach it as soon as they open their eyes. Saying yes, yes, yes, yes, yes, and shirking only creates a sycophant, a flatterer, and a servile slave.

It was once said that the first poet would be a person of sorrow, but nowadays it’s more like an opponent, a rebel, a protester, or a provocateur. In life, everyone works as someone’s sycophant, a ladle, or a tong. In today’s writing,

Instead of the “ch-kar,” “na-kar” is everything. While other Indian languages ​​boast of their oppositional stances, Hindi doesn’t boast about its oppositional nature. That’s why many writers in the media mistake requests for protests. If you don’t believe it, just look at Hindi’s tradition of opposition. Social media is rife with such writers.

There are many oppositional writers here. Some are born opponents, many have become opponents from requests, and many are staunch opponents of their opponents. Moreover, a figure of speech in Hindi is called “contradiction.” If opposition weren’t a Hindi language, would the name of one of its figures of speech even begin with “opposition”?

Hindi is such a remarkable language that not only its mouth, but even its idioms are idioms of opposition. Perhaps that’s why, despite having so many oppositional writers, not a single one has been touched. This is the genius of Hindi. Dissenting writers in other Indian languages ​​are easily caught, punished, and brought into the spotlight, whereas in Hindi, despite the abundance of dissenting writers, no one has been able to target anyone.

That’s why I say that if you want to learn the art of dissenting, learn from Hindi: keep protesting and keep discussing, but dare not let anyone do anything wrong. The reason is that Hindi is a master of double and triple meanings, which is why the figure of speech called paradox is active in it, whose definition justifies manipulation: “Jahan Virodh So Lagat Hai Hot Na Sach Virodh,” meaning that where it seems like opposition, it is not actually opposition. In Hindi, opposition can also be a request.

In Hindi, there are two other figures of speech called “Byaaj Ninda” (interest condemnation) and “Byaaj Stuti,” which sometimes make criticism seem like praise and sometimes like criticism. Similarly, in Hindi, there’s a song where the meaning of ‘no-no’ becomes ‘yes’, in which the heroine sings, “No, yes, I should have said no, but I fell in love with you.”

Sudhish Pachauri, Hindi writer

kaamil kaam kamaal kiya, taine khyaal se khel banaaye diya

कामिल काम कमाल किया, तैने ख्याल से खेल बनाये दिया।।

नही कागज कलम जरूरत है, बिन रंग बनी सब मूरत है।
इन मूरत मे एक सूरत है, तैने एक अनेक लखाय दिया।।

जल बूंद को लेकर देह रची, सुर दानव मानव जीव जुदा।
सबके घट अन्दर मन्दिर में, तैने आप मुकाम जमाय दिया।।

कोई पार न वार अधार बिना, सब विश्व चराचर धार रहा।
बिन भूमि मनोहर महल रचा, बिन बीज के बाग लगाय दिया।।

सब लोकन के नित संग रहे, फिर आप असंग स्वरूप सदा।
‘ब्रह्मानंद’ आनंद भयो मन में, गुरूदेव अलख लखाय दिया।।

सतपुड़ा के जंगल

भवानीप्रसाद मिश्र

सतपुड़ा के घने जंगल

नींद में डूबे हुए-से,

ऊँघते अनमने जंगल।

झाड़ ऊँचे और नीचे

चुप खड़े हैं आँख भींचे;

घास चुप है, काश चुप है

मूक शाल, पलाश चुप है;

बन सके तो धँसो इनमें,

धँस न पाती हवा जिनमें,

सतपुड़ा के घने जंगल

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

सड़े पत्ते, गले पत्ते,

हरे पत्ते, जले पत्ते,

वन्य पथ को ढँक रहे-से

पंक दल में पले पत्ते,

चलो इन पर चल सको तो,

दलो इनको दल सको तो,

ये घिनौने-घने जंगल,

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

अटपटी उलझी लताएँ,

डालियों को खींच खाएँ,

पैरों को पकड़ें अचानक,

प्राण को कस लें कपाएँ,

साँप-सी काली लताएँ

बला की पाली लताएँ,

लताओं के बने जंगल,

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

मकड़ियों के जाल मुँह पर,

और सिर के बाल मुँह पर,

मच्छरों के दंश वाले,

दाग़ काले-लाल मुँह पर,

बात झंझा वहन करते,

चलो इतना सहन करते,

कष्ट से ये सने जंगल,

नींद मे डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

अजगरों से भरे जंगल

अगम, गति से परे जंगल,

सात-सात पहाड़ वाले,

बड़े-छोटे झाड़ वाले,

शेर वाले बाघ वाले,

गरज और दहाड़ वाले,

कंप से कनकने जंगल,

नींद मे डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

इन वनों के ख़ूब भीतर,

चार मुर्ग़े, चार तीतर,

पाल कर निश्चिंत बैठे,

विजन वन के बीच बैठे,

झोंपड़ी पर फूस डाले

गोंड तगड़े और काले

जब कि होली पास आती,

सरसराती घास गाती,

और महुए से लपकती,

मत्त करती बास आती,

गूँज उठते ढोल इनके,

गीत इनके गोल इनके।

सतपुड़ा के घने जंगल

नींद मे डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

जगते अँगड़ाइयों में,

खोह खड्डों खाइयों में

घास पागल, काश पागल,

शाल और पलाश पागल,

लता पागल, वात पागल,

डाल पागल, पात पागल,

मत्त मुर्ग़े और तीतर,

इन वनों के ख़ूब भीतर।

क्षितिज तक फैला हुआ-सा,

मृत्यु तक मैला हुआ-सा

क्षुब्ध काली लहर वाला,

मथित, उत्थित ज़हर वाला,

मेरु वाला, शेष वाला,

शंभु और सुरेश वाला,

एक सागर जानते हो?

ठीक वैसे घने जंगल,

नींद मे डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

धँसो इनमें डर नहीं है,

मौत का यह घर नहीं है,

उतर कर बहते अनेकों,

कल-कथा कहते अनेकों,

नदी, निर्झर और नाले,

इन वनों ने गोद पाले,

लाख पंछी, सौ हिरन-दल,

चाँद के कितने किरन दल,

झूमते बनफूल, फलियाँ,

खिल रहीं अज्ञात कलियाँ,

हरित दूर्वा, रक्त किसलय,

पूत, पावन, पूर्ण रसमय,

सतपुड़ा के घने जंगल

लताओं के बने जंगल।

vishwa hindi diwas 2024

vishwa hindi diwas Wed, 10 Jan, 2024 ki shubh kamnayen

विश्व हिंदी दिवस बुधवार, 10 जनवरी, 2024 की शुभ कामनाएँ

एक विशाल दुनिया में हिंदी बिना नहीं चलता कोई काम

हिंदी का समाज दुनिया में फैलता पूरी जा रहा है और संयुक्त राष्ट्र ने भी इस भाषा को स्वीकार किया है। विश्व हिंदी दिवस पर विशेषः

बहुत पहले ही महाकवि रविंद्रनाथ टैगोर ने यह बात कही थी कि राष्ट्र को जोड़ने वाली भाषा हिंदी ही हो सकती है। उनका सोचना कितना सही था। टैगोर या गांधी, ये सब बहुत दूरदर्शी लोग थे, जिन्होंने अहिंदीभाषी होते हुए भी बहुत पहले ही हिंदी की ताकत का अंदाजा लगा लिया था। आज बाजार से ही हिंदी की बात शुरू करें, तो सारे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड जानते हैं कि हिंदी के बिना काम नहीं चलेगा। चूंकि हिंदी बोलने वालों का बाजार बहुत बड़ा है, तो हिंदी भाषी समाज भी पूरी दुनिया में फैलता जा रहा है और दूसरे समाजों में भी हिंदी का प्रसार तेज हुआ है। दुनिया में हिंदी की क्या स्थिति है, इसका अनुमान आप इससे लगा सकते हैं, है, अकेले अमेरिका के 12 विश्वविद्यालयों और 40 से ज्यादा कॉलेजों में हिंदी पढ़ाई जाती है। मैं बुडापेस्ट, हंगरी गया था, वहां टैगोर पर बड़ा आयोजन हुआ था। वहां के विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में जाना हुआ, वहां यह भाषा बहुत अच्छी बोली जा रही थी। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन इत्यादि में हिंदी रचनाओं के खूब अनुवाद हुए है। हिंदी लेखिका गीतांजलि श्री को बूकर मिलना तो एक बहुत बड़ी घटना है और एक सबक भी कि अगर अच्छे अनुवाद हों, तो हिंदी किसी दिन नोबेल पुरस्कार की अधिकारी बन सकती है। मुझे याद है, जब निर्मल वर्मा संसार में नहीं रहे, तब गुंटर ग्रास जैसे बड़े जर्मन लेखक ने उन पर श्रद्धांजलि लेख लिखा था। जापान में भी मैं एक विश्वविद्यालय के बुलाने पर गया था, वहां हिंदी विभाग में सारी कार्यवाही हिंदी में ही होती है। दुनिया के अनेक देशों में लोग आज हिंदी की सेवा में लगे हैं। मिसाल के लिए, दिव्या माथुर हैं लंदन में, वर्षों से ऑनलाइन कार्यक्रम करती हैं और हिंदी के लेखक उनसे जुड़ते रहते हैं। ऐसे आधुनिक जुड़ाव की अब अपनी भूमिका है।

हां, हिंदी के विविध रूप हैं। हर बड़ी भाषा के साथ ऐसा ही होता है। बड़ी भाषाएं अशुद्ध रूप में भी दुनिया में इस्तेमाल होती हैं। चिंता की बात नहीं, आज कहीं अगर अशुद्धता है, तो वहां देर-सबेर शुद्धता भी आएगी।

बहरहाल, विश्व में हिंदी की बात चले, तो हिंदी सिनेमा को नहीं भुलाया जा सकता। हिंदी फिल्में दुनिया के कोने-कोने में देखी जाती हैं, दुनिया की तमाम बड़ी फिल्में हिंदी में डब की जाती हैं। हिंदी फिल्मों के गाने दुनिया भर में न जाने कितने उत्सवों में गाए-बजाए जाते हैं और तब लोगों के चेहरों पर जो खुशी होती है, वह दरअसल हिंदी की बहुमूल्य पूंजी है। दुनिया भर में हिंदी सुख और खुशी का माध्यम बनती जा रही है।

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ‘ हिन्दी के एक प्रमुख लेखक, कवि व निबन्धकार थे। वे आधुनिक युग के श्रेष्ठ वीर रस के कवि के रूप में स्थापित हैं। राष्ट्रवाद अथवा राष्ट्रीयता को इनके काव्य की मूल-भूमि मानते हुए इन्हे ‘युग-चारण’ व ‘काल के चारण’ की संज्ञा दी गई है।

एक और बात गौर करने की है कि हमारे तमाम महान गायकों-संगीतकारों ने शास्त्रीय संगीत के माध्यम से भी दुनिया भर में जगह-जगह हिंदी को गाया-सुनाया है। दुनिया के न जाने कितने घरों में भीमसेन जोशी के पद गूंजते हैं, कुमार गंधर्व के साथ सुबह होती है। आज हिंदी समाज और हिंदी लेखकों को आप कतई कमतर नहीं आंक सकते। हिंदी में अनेक रचनाकार हैं, जो नोबेल योग्य रहे हैं, कुछ नाम गिनाएं, तो प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, महादेवी, पंत, अज्ञेय, रेणु, निर्मल वर्मा, कृष्णा सोबती, ये सब विश्वस्तरीय हैं। हिंदी में ऐसे अनेक लेखक हैं, जो दुनिया के अनेक देशों में बार-बार बुलाए जाते हैं।

बहरहाल, हिंदी को अभी तक नोबेल नहीं मिला है। बुनियादी रूप से हिंदी को लेकर अभी भी जैसा सांस्कृतिक परिवेश चाहिए, वह नहीं बना है, पर वह बनेगा जरूर और वह बनने की प्रक्रिया में है। ऐसा भी नहीं है कि हिंदी के परिवेश ने नोबेल विजेता लेखक नहीं दिए हैं। त्रिनिदाद में जन्मे नोबेल विजेता अंग्रेजी लेखक वी एस नायपॉल ने लिखा है कि बचपन में वह हिंदी खूब सुनते थे, उनकी दादी, मामा, मौसियां हिंदी बोलती थीं। अतः यह बिल्कुल सही मांग होगी कि नोबेल के स्तर पर भी हिंदी को मान्यता मिले। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस भाषा को स्वीकार किया है। हिंदी की तुलना में कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं के लेखकों को भी नोबेल मिला है। जब किसी भाषा के लेखक को सम्मान मिलता है, तो उस लेखक और उस भाषा के अन्य तमाम लेखकों के प्रति दुनिया भर में दिलचस्पी बढ़ती है। एक दिन हिंदी के साथ भी ऐसा ही होगा और हिंदी ज्यादा सशक्त स्वरूप में स्वीकार की जाए‌गी।

प्रयाग शुक्ल ।

कवि और कला मर्मज्ञ

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

Hindi community is spreading all over the world and the United Nations has also accepted this language. Special on World Hindi Day:

Long ago, the great poet Rabindranath Tagore had said that only Hindi could be the language that could unite the nation. How right he was in thinking. Tagore or Gandhi, all these were very far-sighted people, who despite being non-Hindi speaking, had realized the power of Hindi long ago. Today, if we start talking about Hindi in the market, then all the international brands know that without Hindi it will not work. Since the market of Hindi speaking people is very large, the Hindi speaking society is also expanding all over the world and the spread of Hindi has increased in other societies also. You can estimate the status of Hindi in the world from this, Hindi is taught in 12 universities and more than 40 colleges in America alone. I went to Budapest, Hungary, there was a big event on Tagore. I went to the Hindi department of the university there, this language was being spoken very well there. Many Hindi works have been translated in France, Germany, Britain, Spain etc. Hindi writer Gitanjali Shri getting the Booker is a big event and also a lesson that if there are good translations, Hindi can someday become a Nobel Prize winner. I remember, when Nirmal Verma passed away, a great German writer like Gunter Grass had written a tribute article on him. I also went to Japan on the invitation of a university, where all the proceedings in the Hindi department are conducted in Hindi only. Today people in many countries of the world are engaged in the service of Hindi. For example, Divya Mathur is in London, has been doing online programs for years and Hindi writers keep connecting with her. Such modern connectivity now has its role to play.

Yes, there are various forms of Hindi. Same thing happens with every big language. Major languages are used in the world even in impure form. No need to worry, if there is impurity somewhere today, sooner or later purity will also come there.

Ramdhari Singh, known by his pen name Dinkar, was an Indian Hindi language poet, essayist, freedom fighter, patriot and academic. He emerged as a poet of rebellion as a consequence of his nationalist poetry written in the days before Indian independence.

However, if we talk about Hindi in the world, Hindi cinema cannot be forgotten. Hindi films are watched in every corner of the world, all the big films of the world are dubbed in Hindi. Songs from Hindi films are sung and played in many festivals across the world and the happiness that appears on people’s faces is actually a valuable asset of Hindi. Hindi is becoming the medium of happiness and joy all over the world.

Another thing to note is that all our great singers and musicians have sung and narrated Hindi at many places across the world even through classical music. Bhimsen Joshi’s verses resonate in many homes across the world, morning dawns with Kumar Gandharva. Today you cannot underestimate Hindi society and Hindi writers at all. There are many writers in Hindi who have been Nobel worthy, to name a few, Premchand, Prasad, Nirala, Mahadevi, Pant, Agyeya, Renu, Nirmal Verma, Krishna Sobti, all of them are world class. There are many such writers in Hindi who are invited again and again in many countries of the world.

However, Hindi has not received the Nobel yet. Basically, the desired cultural environment for Hindi has not yet been created, but it will definitely be created and is in the process of being created. It is not that the Hindi environment has not produced Nobel winning writers. Trinidad-born Nobel-winning English writer VS Naipaul has written that he used to listen to Hindi a lot in his childhood, his grandmother, maternal uncle and aunts spoke Hindi. Therefore, it would be a right demand that Hindi should be recognized even at the level of Nobel. The United Nations has also accepted this language. Writers of languages spoken by fewer people than Hindi have also received Nobel. When a writer of any language gets respect, interest towards that writer and all other writers of that language increases throughout the world. One day the same will happen with Hindi and Hindi will be accepted in a more powerful form.

Prayag Shukla.

Poet and art connoisseur

(These are the author’s own views)

Our language could not find a proper place

उचित स्थान नहीं बना पाई हमारी भाषा

हिंदी भले ही संघर्ष की भाषा हो, बहुसंख्य जनता की भाषा हो, पर अपना वह स्थान न बना पाई, जिस जगह की वह वास्तव में हकदार थी। उसकी उपेक्षा, जितनी गैर-हिंदी आंग्लभाषियों ने की, उससे कम हिंदी प्रदेश के लेखकों ने नहीं की। कहने का मतलब है कि हिंदी प्रदेश के साहित्यकारों ने अब तक अपने कृतित्व और व्यक्तित्व पर ही बातें कीं, हिंदी के भविष्य की चिंता नहीं की। कुछ अपवादों को छोड़ दें, तो उन्होंने उसकी भविष्णुता पर खास सवाल नहीं उठाए। गोकि, हिंदी के पुरोधा लेखकों के पास भारतेंदु, महावीर प्रसाद द्विवेदी, श्याम सुंदर दास आदि जैसे कुछ चिंतक- लेखकों को छोड़कर य अपनी कोई सोच या दृष्टि नहीं है। इनमें से अधिकतर अपनी रचनाओं को लेकर मुग्ध हैं। अरे भाई, मान लेंगे कि आपकी कविता, कहानी, उपन्यास, संस्मरण, सब कुछ उत्कृष्ट कोटि के हैं और वे अंग्रेजी या अन्य भाषा साहित्य से बराबर की टक्कर लेने में समर्थ भी हैं, लेकिन इन सारी बातों को पूरी ताकत से विश्व पटल पर रखेगा कौन ?

आप अगर समझते हैं कि यह आपका काम नहीं है, हिंदी शास्त्रियों या भाषा विज्ञानियों का काम है, तो कहां हैं ये, जो वैश्विक साहित्य के पटल पर इसकी वकालत कर सकें ? हिंदी की रचनाधर्मिता के गुण-गौरव का एहसास बिना हिंदी-शक्ति के आभास के नहीं हो सकता। उल्टे व्यापारिक और विज्ञापन की भाषा बन जाने के कारण यह अब अपनी जड़ से भी कटने लगी है। बाहर से आकर कोई इस दिशा में पहल करने से तो रहा। लिखने से ज्यादा जरूरी है, पहले से लिखे का प्रसार। प्रसार तभी संभव है, जब हिंदी भाषा के प्रति मेरे खुद के मन में व्यापक मोह पैदा हो, तभी उस मोह से माया की उत्पत्ति होगी। मगर यह व्यामोह हमारे लेखकों की आत्ममुग्धता और स्वार्थ तक ही सीमित है। हम न भाषा विज्ञानियों, लेखकों की कद्र करते हैं, न हिंदी वैयाकरणिकों की, बल्कि जो सच्चे मन से इस दिशा में लगना चाहते हैं, उनका मजाक उड़ाते हैं, उनको मानसिक कष्ट देते हैं। उनको मुख्यधारा में लाने और उन पर कभी गंभीर चर्चा करने की आवश्यकता ही नहीं समझते। कोई भी लेखक या कवि अगर यह समझता है कि जो कुछ भी ‘सु’ है, उसे लिख देने मात्र से ही समाज और साहित्य का भला हो जाएगा, तो वह भारी गलतफहमी का शिकार है। सही सवाल तो यह है कि उसके इस इतने अच्छे लिखे को कितने लोग पढ़ते हैं ? बिना पाठकीयता (रीडरशिप) सब बेमानी है, व्यर्थ है।

सुशील कुमार, टिप्पणीकार

Hindi may be the language of struggle, the language of the majority of the people, but it could not make the place it actually deserved. The writers of the Hindi region ignored it no less than the non-Hindi Anglophones did. It means to say that till now the litterateurs of Hindi state have talked only about their work and personality and did not worry about the future of Hindi. With a few exceptions, they did not specifically question his future. However, except some thinkers and writers like Bharatendu, Mahavir Prasad Dwivedi, Shyam Sundar Das etc., the leading writers of Hindi do not have any thinking or vision of their own. Most of them are fascinated by their creations. Hey brother, we will accept that your poetry, stories, novels, memoirs, everything is of excellent quality and they are capable of competing equally with English or other language literature, but we will put all these things on the world stage with full force. Who ?

If you think that this is not your work, it is the work of Hindi scholars or linguists, then where are they who can advocate it on the platform of global literature? The glory of Hindi creativity cannot be realized without the realization of Hindi power. On the contrary, because it has become the language of business and advertising, it has now started getting cut off from its roots. Someone from outside has been prevented from taking initiative in this direction. More important than writing is the dissemination of what has already been written. Spreading is possible only when there is a widespread fascination in my own mind towards the Hindi language, only then Maya will arise from that fascination. But this paranoia is limited to the narcissism and selfishness of our writers. We neither respect linguists, writers, nor Hindi grammarians, rather we make fun of those who sincerely want to pursue this direction, and give them mental trouble. They do not understand the need to bring them into the mainstream and ever have a serious discussion on them. If any writer or poet thinks that just writing whatever is ‘good’ will be beneficial for the society and literature, then he is the victim of a huge misunderstanding. The right question is, how many people read this well written work of his? Without readership everything is meaningless, useless.

Sushil Kumar, Commentator

कबीर के दोहे की लिस्ट

कबीर के दोहे की लिस्ट इस प्रकार है:

  1. यह तन विष की बेलरी, गुरु अमृत की खान। शीश दियो जो गुरु मिले, तो भी सस्ता जान ।
  2. “लाडू लावन लापसी ,पूजा चढ़े अपार पूजी पुजारी ले गया,मूरत के मुह छार !!”
  3. “पाथर पूजे हरी मिले, तो मै पूजू पहाड़ ! घर की चक्की कोई न पूजे, जाको पीस खाए संसार !!”
  4. “जो तूं ब्राह्मण , ब्राह्मणी का जाया ! आन बाट काहे नहीं आया !! ”
  5. “माटी का एक नाग बनाके, पुजे लोग लुगाया ! जिंदा नाग जब घर मे निकले, ले लाठी धमकाया !!”
  6. माटी कहे कुमार से, तू क्या रोंदे मोहे । एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदुंगी तोहे ।
  7. काल करे सो आज कर, आज करे सो अब । पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब ।
  8. ज्यों तिल माहि तेल है, ज्यों चकमक में आग । तेरा साईं तुझ ही में है, जाग सके तो जाग ।
  9. जग में बैरी कोई नहीं, जो मन शीतल होए । यह आपा तो डाल दे, दया करे सब कोए ।
  10. गुरु गोविंद दोऊ खड़े ,काके लागू पाय । बलिहारी गुरु आपने , गोविंद दियो मिलाय ।।
  11. सब धरती काजग करू, लेखनी सब वनराज । सात समुद्र की मसि करूँ, गुरु गुण लिखा न जाए ।
  12. ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये । औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ।
  13. ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोये । औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए ।
  14. बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर । पंथी को छाया नहीं फल लागे अति दूर ।
  15. बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय । जो मन देखा आपना, मुझ से बुरा न कोय ।
  16. दुःख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय । जो सुख में सुमिरन करे, तो दुःख काहे को होय ।
  17. चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोये । दो पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोए ।
  18. मलिन आवत देख के, कलियन कहे पुकार । फूले फूले चुन लिए, कलि हमारी बार ।
  19. जाती न पूछो साधू की, पूछ लीजिये ज्ञान । मोल करो तलवार का, पड़ा रहने दो म्यान ।
  20.  तीरथ गए से एक फल, संत मिले फल चार । सतगुरु मिले अनेक फल, कहे कबीर विचार ।
  21. नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए । मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए ।
  22. कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी । एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पाँव पसारी ।
  23. जिनके नौबति बाजती, मैंगल बंधते बारि । एकै हरि के नाव बिन, गए जनम सब हारि ॥
  24. मैं-मैं बड़ी बलाइ है, सकै तो निकसो भाजि । कब लग राखौ हे सखी, रूई लपेटी आगि ॥
  25. उजला कपड़ा पहरि करि, पान सुपारी खाहिं । एकै हरि के नाव बिन, बाँधे जमपुरि जाहिं ॥
  26. कहा कियौ हम आइ करि, कहा कहैंगे जाइ । इत के भये न उत के, चाले मूल गंवाइ ॥
  27. `कबीर’ नौबत आपणी, दिन दस लेहु बजाइ । ए पुर पाटन, ए गली, बहुरि न देखै आइ ॥
  28. पाहन पूजे हरि मिलें, तो मैं पूजौं पहार। याते ये चक्की भली, पीस खाय संसार।।
  29. गुरु गोविंद दोउ खड़े, काके लागूं पाँय । बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय॥
  30. निंदक नियेरे राखिये, आँगन कुटी छावायें । बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुहाए ।
  31. पानी केरा बुदबुदा, अस मानस की जात । देखत ही छुप जाएगा है, ज्यों सारा परभात ।
  32. जहाँ दया तहा धर्म है, जहाँ लोभ वहां पाप । जहाँ क्रोध तहा काल है, जहाँ क्षमा वहां आप ।
  33. जो घट प्रेम न संचारे, जो घट जान सामान । जैसे खाल लुहार की, सांस लेत बिनु प्राण ।
  34. ते दिन गए अकारथ ही, संगत भई न संग । प्रेम बिना पशु जीवन, भक्ति बिना भगवंत ।
  35. तन को जोगी सब करे, मन को विरला कोय । सहजे सब विधि पाइए, जो मन जोगी होए ।
  36. प्रेम न बारी उपजे, प्रेम न हाट बिकाए । राजा प्रजा जो ही रुचे, सिस दे ही ले जाए ।
  37. जिन घर साधू न पुजिये, घर की सेवा नाही । ते घर मरघट जानिए, भुत बसे तिन माही ।
  38. साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै थोथा देई उडाय।
  39. जल में बसे कमोदनी, चंदा बसे आकाश । जो है जा को भावना सो ताहि के पास ।
  40. राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय । जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होय ।

ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है

ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है
आती हैं आंधियां तो कर उनका खैर मकदम
तूफां से ही तो लड़ने खुदा ने तुझे गढ़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है

अग्नि में तप के सोना है और भी निखरता
दुर्गम को पार कर के हिमालय कोई चढ़ाए
लाएगी रंग मेहनत आखिर तुम्हारी इकदिन
होगा विशाल तरुवर,वो बीज जो पड़ा है
ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है

वो सर्व शक्तियों से जब साथ है हमारे
हर काम उसके रहते हरदम हुआ पड़ा है
कभी हारना ना,हिम्मत के कदम बढ़ाओ
हज़ारों कदम बढ़ाने वो सामने खड़ा है
ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है

ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है

ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है
आती हैं आंधियां तो कर उनका खैर मकदम
तूफां से ही तो लड़ने प्रभु ने तुझे गढ़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है

अग्नि में तप के सोना है और भी निखरता
दुर्गम को पार कर के हिमालय कोई चढ़ाए
लाएगी रंग मेहनत आखिर तुम्हारी इकदिन
होगा विशाल तरुवर,वो बीज जो पड़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है

वो सर्व शक्तियों से जब साथ है हमारे
हर काम उसके रहते हरदम हुआ पड़ा है
कभी हारना ना,हिम्मत के कदम बढ़ाओ
हज़ारों कदम बढ़ाने वो सामने खड़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है

happy deepavali

Happy Diwali Wishes In Hindi | दिवाली की शुभकामना

दीप जलते रहे जगमगाते रहे,
हम आपको-आप हमें याद आते रहे,
जब तक ज़िन्दगी है दुआ है हमारी,
आप फूलो की तरह मुस्कुराते रहे।
Happy Diwali

इस दिवाली जलाना हज़ारों दिए,
खूब करना उजाला ख़ुशी के लिए,
एक कोने में एक दिया जलाना जरूर,
जो जले उम्र भर हमारी दोस्ती के लिए।
दिवाली की शुभकामनाएँ

पल पल से बनता हैं एहसास,
एहसास से बनता है विश्वास,
विश्वास से बनता हैं रिश्ता,
और रिश्ते से बनता हैं कोई ख़ास।
Happy Diwali

दिवाली पर्व है, खुशीयों का,
उजालों का,लक्ष्मी का,
इस दिवाली आपकी जिंदगी खुशियों से भरी हो,
घर पर माँ लक्ष्मी का आगमन हो।
शुभ दीवाली

दीप जलते जगमगाते रहे,
हम आपको और आप हमें याद आते रहे,
जब तक जिंदगी है दुआ है हमारी,
आप यु ही दिए की तरह जगमगाते रहे।
दिवाली की शुभकामनाएँ

सागर भरी ख़ुशियाँ,
आसमान भरा प्यार,
मिठाई की खुशबू,
दीपों की बहार,
आपके लिए शुभ हो दिवाली का त्यौहार।
Happy Diwali

दिवाली कभी ना जाए खाली,
हमेशा घर पर आपके रहे खुशहाली,
लाओ कुम कुम और पूजा की थाली,
मनाओ लक्ष्मी जी को और
कहो शुभ दीवाली।

दीवाली है रौशनी का त्यौहार,
लाए हर चेहरे पर मुस्कान,
सुख और समृधि की बहार
समेट लो सारी ख़ुशियाँ,
अपनों का साथ और प्यार
इस पावन अवसर पर
आप सभी को दीवाली का प्यार।
Happy Diwali

दीपावली सिर्फ दीप की दीपावली नहीं है,
यह प्रेम की दीप है जो हमारे दिलों में उजाला करता है,
जो हमारे विश्वास को जगाता है।
शुभ दीवाली

झिलमिल झिलमिल दीप सजे हैं,
ख़ुशियाँ हैं अपार,
आई दिवाली लेकर मस्ती,
फुलझड़ियों की फुहार,
पा के अपनों का प्यार,
मंगलमय हो दिवाली का त्यौहार।
Happy Diwali

रोशन हो दीपक और सारा जग जगमगाए,
लिए साथ सीता मैय्या को राम जी हैं आए,
हर शहर यु लगे मानो अयोध्या हो,
आओ हर द्वार हर गली हर मोड़ पे हम दीप जलाए।
शुभ दीवाली

दीप से दीप जले तो हो दीपावली,
उदास चेहरे खिलें तो हो दीपावली,
बाहर की सफाई तो हो चुकी बहुत
दिल से दिल मिले तो हो दीपावली।
शुभ दीवाली

तमाम जहाँ जगमगाया,
फिर से त्योहार रोशनी का आया,
कोई तुम्हें हमसे पहले ना देदे बधाई,
इसलिए ये पैगाम ए मुबारक सबसे पहले तुमको भिजवाया।
दीवाली मुबारक

दीप जलते रहे,मन से मन मिलते रहें,
गिले-शिकवे सारे दिल से निकलते रहें,
सारे विश्व भर में सुख शान्ति की प्रभात ले आए,
ये दीपों का त्यौहार ख़ुशी की सौगात ले आए।
दिवाली की शुभकामनाएँ

जरा-सा मुस्कुरा देना दिवाली से पहले,
हर गम को भुला देना दिवाली से पहले,
ना सोचो किस किस ने दिल दुखाया,
सबको माफ कर देना दिवाली से पहले।
Happy Diwali

दुनिया भर कि याद मैं हमें न भुला देना,
आए जब याद हमारी थोडा सा मुस्करा देना,
ज़रूर मिलेगें हम अगर ज़िंदा रहें,
याद मैं हमारी दीवाली का एक “दिया” जला देना।
Happy Diwali

दीए की रोशनी से सब अंधेरा दूर हो जाए,
दुआ है कि आप जो चाहो वो सब खुशी मंज़ूर हो जाए।
शुभ दीवाली

दीपक की रौशनी,
मिठाइयों की मिठास,
पटाखों की बौछार,
धन-धान की बरसात,
हर दिन आपके लिए लाए दिवाली का त्यौहार।
दिवाली की शुभकामनाएँ

दिवाली की Light,
करे सब को Delight,
पकड़ो मस्ती की Flight,
धूम मचाओ All Night.
Happy Diwali

होठो पे हसीं,
आंखो मे खुशी,
गम का कही नाम नहीं,
ए दीवाली लाए आपकी जिंदगी मे इतनी ख़ुशियाँ,
जिसकी कभी शाम ना हो।
शुभ दीवाली

हरदम ख़ुशियाँ हो आपके साथ,
कभी दामन ना हो खाली,
आपको हमारी ओर से हैप्पी दिवाली।

दीपों की है दीप दिवाली,
खुशियों की है रात दिवाली जगमग है दीप जले दिवाली,
मस्ती का त्यौहार है दिवाली।
शुभ दीवाली

दीपक का प्रकाश हर पल आपके जीवन में नई रोशनी
और खुशी लाए,
बस यही है शुभकामना
आपके लिए।
शुभ दीपावली 

आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

झिलमिल – झिलमिल दीप ऐसे ही जगमगाते रहे,
आपके परिवार में सब सदा मुस्कराते रहे।
शुभ दीवाली

दिए की रौशनी से सब अँधेरा दूर हो जाए,
दुआ हैं की जो चाहो वो ख़ुशी मंज़ूर हो जाए।
दिवाली की शुभकामनाएँ

हर घर में हो उजाला,
आए ना कभी रात काली,
हर घर में मने ख़ुशियाँ,
हर घर में हो दिवाली।
शुभ दीवाली

दीप जले तो रौशन आपका जहान हो,
पूरा आपका हर एक अरमान हो,
माँ लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे आप पर हर दम,
ऐसा शुभ दीपावली का आपका त्यौहार हो।

सुख के दीपक जले,
घर आंगन में खुशहाली हो,
बड़ों का आशीर्वाद और अपनों का प्यार मिले,
ऐसी आपकी मंगल दिवाली हो।
शुभ दीवाली

खुशियों का पर्व है दिवाली,
मस्ती की फुहार है दिवाली,
लक्ष्मी पूजन का दिन है दिवाली,
अपनों का प्यार है दिवाली।
Happy Diwali

happy deepavali

Diwali 2022 status in Hindi

Best Happy Diwali 2022 Wishes Quotes Status for facebook and Whatsapp

रोशनी से हर जगह अंधेरे दूर हो जाये
माँ लक्ष्मी की बरसे आप पर कृपा
इस दिवाली आप जो चाहे सब मंजूर हो जाये
हैप्पी दिवाली

Diwali Wishes in Hindi and Mubarakbad

माँ लक्ष्मी की कृपा सदा आप पर रहे. …
आपको और आपके परिवार को
दीपावली के पावन पर्व पर हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं

Diwali Greetings in Hindi

Diyo ka hai ye parv
Hota hai manane sabko garv
jala daal mann ke sab ahankar
Mubarak ho aapko diwali ka tyohar

Diwali SMS Hindi Wishes

यह दिवाली आपके जीवन में खुशियों की बरसात लिए
धन और शोहरत की बौछार करे
दिवाली की हार्दिक शुभकामनाये

Happy Diwali Hindi Wishes

Deepavali me deep ka deedar ho
Khushiya beshumar ho
Kabhi na ho aapko dukho ka samna
Happy Diwali ki meri aur se shubhkamna

Happy Diwali Text Messages in Hindi

डीप हर साल यही जगमगाते रहे
सबके घर में झिलमिलाते रहे
साथ हो सब अपनों का
आप हमेशा यही मुस्कुराते रहे
हैप्पी दीपावली 2022

Diwali Wishes in Hindi for Friends

Diwali ki shubh bela me
apne mann ka ahankar mitaye
apne man ke burai jalalye
Khub mithai khaye
Dip ke iss tyohar ko hans ke manaye
Diwali ki hardik shubhkamanaye

Diwali Mubarak Wishes SMS in Hindi

हर तरफ जब दीप जले
आपको खूब खुशियाँ मिले
माँ लक्ष्मी आप की कृपा आप बार बरसे
धन दौलत आप से मिलने को तरसे
दिवाली की हार्दिक शुभकामना

Diwali Festival Wishes Status

दिवाली है आई
खुशियाँ खूब लायी
फोरो खूब पटाखे
खाओ खूब मिठाई
मुबारक हो दिवाली मेरे भाई

Diwali Wishes for Family in Hindi

Dip ka parv ho
Khushiya beshumar ho
Dhan ki barsaat ho
Patakho ki bauchar ho
Mubarak aapko diwali
Ka tyohar ho

Diwali Mubarak Wishes in Hindi

Deepawali ka prakash aapke jeevan me
har pal nayi roshani lekar aaye
Diwali ki aapko dher sari shubhkamanaye

Funny Diwali Wishes in Hindi

दिवाली का है यह प्यारा त्यौहार
लेकर आयें खुशियाँ आपार
माँ लक्ष्मी विराजे आपके द्वार
दिवाली की शुब्कामने हमारी करे स्वीकार

Best Whatsapp Diwali Wishes in Hindi

Diyo ka hai yeh pyara tyohar
Laye aapke jeevam me khshuiya hazaar
Mubarak ho aap sabko
Deepavali ka tyohaar

Hindi Diwali Wishes 2022

हर पल धन की बौछार हो
साथ हमेशा अपनों का प्यार हो
आया है प्यार और ख़ुशी का ये दिन
मुबारक आपको दिवाली का त्यौहार हो.

Happy Diwali Wishes for 2022

हर पल बढ़ता आपका व्यापर हो
मनाये प्यार से ख़ुशी का दिन
साथ हमेशा अपनों का प्यार हो
मुबारक आपको दिवाली का त्यौहार हो
हैप्पी दिवाली

Happy Diwali Wishes Message in Hindi

Deepon ka ujala, Patakon ka rang,
Dhoop ki khushbu, Pyar bhari umang,
Mithai ka swad, Apno ka pyar,
Mubarak ho aapko.. Diwali ka tyohar

Happy Diwali!