योग और तंत्र के अनुसार इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना शरीर की तीन मुख्य ऊर्जा नाड़ियाँ (channels) हैं, जो रीढ़ की हड्डी में प्राण के प्रवाह को नियंत्रित करती हैं। इड़ा बाईं ओर (चंद्र/शीतलता), पिंगला दाईं ओर (सूर्य/गर्मी) और सुषुम्ना मध्य में स्थित है। इन तीनों में संतुलन से ही शरीर में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बना रहता है।
इड़ा नाड़ी (Ida Nadi):
- स्थान व गुण: यह शरीर की बाईं नासिका से जुड़ी है, जिसे ‘चंद्र नाड़ी’ भी कहते हैं।
- प्रभाव: यह ठंडक, मानसिक शक्ति, भावनात्मकता, और अंतर्ज्ञान (Intuition) का प्रतीक है।
- कार्य: यह अवचेतन मन और आराम की अवस्था से संबंधित है।
पिंगला नाड़ी (Pingala Nadi):
- स्थान व गुण: यह शरीर की दाईं नासिका से जुड़ी है, जिसे ‘सूर्य नाड़ी’ कहते हैं।
- प्रभाव: यह गर्मी, शारीरिक शक्ति, तर्क-बुद्धि (Logic) और मर्दाना ऊर्जा का प्रतीक है।
- कार्य: यह क्रियाशीलता और पाचन जैसी ऊर्जावान गतिविधियों से संबंधित है।
सुषुम्ना नाड़ी (Sushumna Nadi):
- स्थान व गुण: यह रीढ़ की हड्डी के ठीक मध्य में स्थित है, जो मूलाधार से सहस्रार चक्र तक जाती है।
- प्रभाव: यह चेतना, आध्यात्मिकता और संतुलन की नाड़ी है।
- कार्य: जब इड़ा और पिंगला संतुलित होती हैं, तब ऊर्जा सुषुम्ना में प्रवाहित होती है, जो उच्च ध्यान और योगिक प्रगति का मार्ग है।
इड़ा-पिंगला-सुषुम्ना का संतुलन क्यों आवश्यक है?
- संतुलन: इड़ा और पिंगला के बीच संतुलन (जैसे- नाड़ी शोधन प्राणायाम द्वारा) स्वास्थ्य और मानसिक स्पष्टता लाता है।
- स्वस्थ जीवन: जब प्राण इन नाड़ियों में सुचारू रूप से बहता है, तो शारीरिक और मानसिक स्थिरता रहती है।
- आध्यात्मिक विकास: पिंगला में सूर्य के समान गर्मी और इड़ा में चंद्रमा के समान शीतलता है, जिनके मिलन से ही सुषुम्ना में ऊर्जा प्रवेश कर सकती है।







