भारतीय संस्कृति में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है। इन्हीं पावन व्रतों में से एक है वट सावित्री व्रत, जिसे विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
वट सावित्री व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें सावित्री ने अपने तप, प्रेम और बुद्धिमत्ता से यमराज से अपने पति के प्राण वापस प्राप्त किए थे।
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पूजा और धार्मिक सामग्री
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वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को रखा जाता है।
वट सावित्री व्रत 2026 तिथि
- तारीख: 15 मई 2026, शुक्रवार
- अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 मई 2026 रात
- अमावस्या तिथि समाप्त: 15 मई 2026 शाम
वट सावित्री व्रत का महत्व
वट सावित्री व्रत भारतीय महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन बरगद (वट) के वृक्ष की पूजा की जाती है। बरगद का पेड़ लंबी आयु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
इस व्रत को करने से:
- पति की आयु लंबी होती है
- वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है
- परिवार में समृद्धि आती है
- सौभाग्य और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है
वट सावित्री व्रत पूजा सामग्री
पूजा के लिए निम्न सामग्री तैयार रखें:
- वट वृक्ष (बरगद का पेड़)
- रोली और कुमकुम
- हल्दी
- फूल और माला
- धूप और दीप
- जल से भरा कलश
- लाल धागा या कच्चा सूत
- फल और मिठाई
- भीगा हुआ चना
- पंखा और श्रृंगार सामग्री
वट सावित्री व्रत पूजा विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- व्रत का संकल्प लें।
- वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें।
- रोली, अक्षत, फूल और धूप-दीप से पूजा करें।
- बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए परिक्रमा करें।
- सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें।
- पति की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना करें।
- अंत में प्रसाद वितरित करें।
वट सावित्री व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था। विवाह से पहले ही ऋषियों ने बता दिया था कि सत्यवान की आयु बहुत कम है। फिर भी सावित्री ने सत्यवान को ही अपना पति चुना।
जब सत्यवान की मृत्यु का समय आया, तब यमराज उनके प्राण लेकर जाने लगे। सावित्री ने दृढ़ निश्चय और बुद्धिमत्ता से यमराज को प्रसन्न कर लिया। अंततः यमराज ने सत्यवान को पुनः जीवनदान दिया।
यह कथा प्रेम, समर्पण और नारी शक्ति का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है।
वट वृक्ष का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में वट वृक्ष को त्रिदेवों का प्रतीक माना गया है:
- जड़ में ब्रह्मा
- तने में विष्णु
- शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है
इसलिए वट वृक्ष की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है।
व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
- व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करें
- पूजा के समय मन शांत रखें
- किसी का अपमान या विवाद न करें
- सात्विक भोजन का सेवन करें
- जरूरतमंदों को दान दें
निष्कर्ष
वट सावित्री व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक है। यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता लाने वाला माना जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया यह व्रत परिवार में खुशहाली और मंगल का संदेश देता है।
SOA Technology की ओर से आप सभी को वट सावित्री व्रत की शुभकामनाएं।





