Respecting heritage: A journey from obscurity to glory!

विरासत का सम्मान: गुमनामी से गौरव तक का सफर!

इतिहास गवाह है कि जो राष्ट्र अपने नायकों के बलिदान को भुला देता है, उसका अस्तित्व संकट में पड़ जाता है।

दशकों तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस के शौर्य को इतिहास की फाइलों के आख़िरी पन्नों में दबाकर रखा गया, लेकिन 2014 के बाद भारत का विज़न बदला और बदला राष्ट्र का आत्मसम्मान।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आज नेताजी को वह सम्मान मिला, जिसके वे हक़दार थे।

कर्तव्य पथ पर उनकी भव्य प्रतिमा और अंडमान-निकोबार के द्वीपों का ‘शहीद’ और ‘स्वराज’ के रूप में नया नामकरण, इसी कृतज्ञता का प्रतीक है।

आज का युवा उसी ‘पराक्रम’ को अपनी रगों में महसूस कर रहा है, जो न कभी झुकता है और न ही समझौतों पर रुकता है।

आइए, नेताजी के सपनों के ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपना योगदान दें।

जय हिंद! 🇮🇳
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