मेरो मन, गुरु चरणन में लाग।
गुरु चरणन में तीरथ सारे, धोले अपने दाग ॥
कौन सहारा है दाता बिन, कौन हमारा है दाता बिन।
ज्ञान-धन सब गुरु बिन झूठा, अब तो मूरख जाग ॥
दाता बिना है जीवन सूना, दाता बिना है हर क्षण सूना।
दाता बिना है उजड़ा-उजड़ा, दुनिया का ये बाग ॥
इस जीवन में दाता आये, किरपा से फिर ज्ञान भी पाये।
दाता दानी जब मिल गये हैं, खुल गये अपने भाग ॥







