मंजिल मेरी तू ही तो है, और तू ही रास्ता है।
ऐ सतगुरू जी मेरा, अब कौन तेरे सिवा है ॥
हर कदम साथ देकर, हाथों में हाथ लेकर ।
अपनी तरफ मुझे तू, खींचे ही जा रहा है॥
तेरा जो साथ छूटे, तो कदम डगमगायें।
साथी तू ही है मेरा, और तू ही रहनुमा है ॥
सबकुछ तुझी से होना, सब कुछ तू करनेहारा।
मेरा तो नाम है बस, तेरा ही आसरा है ॥
सौंपी है बाग अपनी, तेरे ही हाथ अब तो।
आधार फकत तू ही, दासों के दास का है ॥







