भर दिया भक्ति से उर मेरा, गुरुदेव तुम्हारी जय होवे।
दे दिया खोज प्रभु धन मेरा, गुरुदेव तुम्हारी जय होवे ॥
वह दिन वह घड़ी बड़ी शुभ थी, जिस दिन तेरे चरण निहारे थे।
मिटा जन्म-मरण का दुख फेरा, गुरुदेव तुम्हारी जय होवे ॥
अपनी बुद्धि के चक्कर में, हम जिसे खोजते फिरते थे।
अब दृष्टि घुमाकर दिखा दिया, गुरुदेव तुम्हारी जय होवे ॥
दे सुधा प्रेम के प्याले में, मेरे विषय विकारों को मारा।
भव पंक से खींचा कर मेरा, गुरुदेव तुम्हारी जय होवे ॥
हम तुम पर शंका करते थे, तुम प्यार हृदय में भरते थे।
करुणा का हठ करके तारा, गुरुदेव तुम्हारी जय होवे ॥







