May 20, 2024 in News
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May 15, 2024 in News
वाराणसी, विशेष संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र के साथ जो हलफनामा दाखिल किया है, उसके मुताबिक मोदी के पास न तो कार है और न ही कोई जमीन। उन्होंने 10 साल से कोई ज्वेलरी नहीं खरीदी। 10 वर्षों के दौरान उनकी पूरी सम्पत्ति 87 लाख रुपये बढ़ी है।
पहले चुनाव में 1.65 करोड़ रुपये संपत्ति बताई थी : मोदी ने कुल 3.02 करोड़ की संपत्ति बताई है। पांच साल में यह संपत्ति 87 लाख रुपये बढ़ी है। उनके पास 52 हजार 920 रुपये कैश है। वाराणसी में अपने पहले चुनाव (2014) में मोदी ने अपनी कुल संपत्ति 1.65 करोड़ रुपये बताई थी। 2019 में यह 2.15 करोड़ हो गई थी। मोदी ने अपने नामांकन पत्र में पत्नी के रूप में जशोदाबेन का नाम लिखा है लेकिन पत्नी की आय समेत दूसरी जानकारी नहीं दी है। मोदी जब 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने अक्तूबर में एक जमीन खरीदी थी। इसमें वह तीसरे हिस्सेदार थे। बाद में उन्होंने अपना हिस्सा दान कर दिया था।
सन-2014 और 2019 में नरेंद्र मोदी के पास सोने की चार अंगूठी थीं। इनका वजन 45 ग्राम है। पिछली बार इस गोल्ड की कीमत 1.13 लाख रुपये बताई गई थी। इस बार यह बढ़कर 2.67 लाख रुपये हो गई है। उनका शेयर या फिर म्यूचुअल फंड में कोई निवेश नहीं है। पोस्ट ऑफिस में 9.12 लाख रुपये के नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) हैं। 2019 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक, नरेंद्र मोदी ने नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में 7 लाख 61 हजार 466 रुपये जमा कराए थे। उनके पास 1 लाख 90 हजार 347 रुपये का जीवन बीमा भी था।
प्रधानमंत्री ने अपनी कमाई का जरिया सरकार से मिली तनख्वाह और बैंकों से मिलने वाले ब्याज को बताया है। इसके अलावा उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं है।
प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया अकाउंट में खासा वृद्धि देखी गई है। वर्तमान चुनाव में उनके पास प्रमुख सोशल मीडिया मंचों के छह अकाउंट हैं। फेसबुक, ट्विटर (एक्स), यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम और ■ व्हाट्सअप चैनल भी है। 2014 में फेसबुक और ट्विटर अकाउंट ही था। 2019 में सोशल मीडिया अकाउंट की संख्या तीन हो गई थी।
Varanasi, Special Correspondent. According to the affidavit filed by Prime Minister Narendra Modi along with his nomination papers for the Lok Sabha elections on Tuesday, Modi neither has a car nor any land. He has not bought any jewelery for 10 years. His total wealth has increased by Rs 87 lakh in 10 years.
In the first election, he had declared assets worth Rs 1.65 crore: Modi has declared total assets worth Rs 3.02 crore. This property has increased by Rs 87 lakh in five years. He has Rs 52 thousand 920 in cash. In his first election (2014) in Varanasi, Modi had declared his total assets as Rs 1.65 crore. In 2019 it increased to Rs 2.15 crore. Modi has mentioned Jashodaben’s name as his wife in his nomination papers but has not given any other information including his wife’s income. When Modi was the Chief Minister of Gujarat in 2002, he had purchased a land in October. He was the third partner in this. Later he donated his share.
In 2014 and 2019, Narendra Modi had four gold rings. Their weight is 45 grams. Last time the price of this gold was said to be Rs 1.13 lakh. This time it has increased to Rs 2.67 lakh. He does not have any investment in shares or mutual funds. The post office has National Savings Certificates (NSC) worth Rs 9.12 lakh. According to the 2019 election affidavit, Narendra Modi had deposited Rs 7 lakh 61 thousand 466 in the National Savings Certificate. He also had life insurance worth Rs 1 lakh 90 thousand 347.
The Prime Minister has stated that his source of income is the salary received from the government and the interest received from banks. Apart from this they have no means of earning.
There has been a significant growth in the Prime Minister’s social media accounts. In the current election, he has six accounts on major social media platforms. There is also Facebook, Twitter (X), YouTube, Instagram and WhatsApp channels. In 2014, there were only Facebook and Twitter accounts. In 2019, the number of social media accounts increased to three.
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टीडीपी, राजद, जदयू, शिवसेना (यूपीटी), शिवसेना, एलजेपी, आईएमयूएल और एनसीपी के 100 फीसदी सांसद करोड़पति हैं। राष्ट्रीय दलों में आप के सभी 100% सांसद करोड़पति हैं। चुनाव में 240 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा के 95% सांसद करोड़पति हैं। भाजपा के सिर्फ 227 सांसदों के संपत्ति का विश्लेषण किया गया है। वहीं, कांग्रेस- डीएमके के 93-93, सपा के 92, एनसीपी (एसपी) के 88% सांसद करोड़पति हैं।
April 5, 2024 in News
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल देश के इतिहास में लंबे समय तक याद रखे जाएंगे। आने वाली पीढ़ियां किताबों में यही पढ़ेंगी कि कैसे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अपने ऊपर लगे आरोपों के बावजूद नैतिकता को ताक पर रखकर शासन करते रहे। देखा जाए, तो दिल्ली के मुख्यमंत्री को सांविधानिक पद से इस्तीफा देकर संविधान की रक्षा करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का मजबूती से सामना करना चाहिए। इस देश में भ्रष्टाचार के आरोपी एकमात्र मुख्यमंत्री केजरीवाल नहीं हैं। इससे पूर्व जयललिता, लालू प्रसाद यादव, मधु कोड़ा, हेमंत सोरेन जैसे तमाम मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरने के बाद जेल जा चुके हैं, पर जेल जाने से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी दिया। हेमंत सोरेन का उदाहरण तो सबसे ताजा है। मगर केजरीवाल ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। इससे यही पता चलता है कि वह किसी भी तरह से कुरसी पर बस बने रहना चाहते हैं।
जेल से शासन चलाना हास्यास्पद है। इससे अन्य देशों में भारत की छवि बिगढ़ रही है। दूसरे देश तो यही जानना चाह रहे होंगे कि क्या भारत का संविधान इसकी इजाजत देता है? बेशक, भारतीय संविधान इस सवाल पर मौन है, लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं कि संविधान में दर्ज होने से बची रह गई जरूरी बातों को दरकिनार करके हम गलती पर गलती करते जाएं। क्या भारत का लोकतंत्र इस बात की इजाजत देता है कि चोर, डकैतों, अपराधियों के सुधार-गृह, यानी जेल से मुख्यमंत्री अपने अधीनस्थ अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी करें? यह भी तो उचित नहीं है।
ऐसी किसी भी जांच में वक्त लगता है। ऐसा भी नहीं है कि केजरीवाल को जेल में डालकर मामला खत्म कर दिया जाएगा।
जांच एजेंसियां सघन जांच में जुटी हुई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री को धैर्य रखना चाहिए और न्यायपालिका पर विश्वास करना चाहिए। अगर वह सही हैं, तो बेशक कुछ वक्त लगेगा, लेकिन उनको न्याय जरूर मिलेगा। हालांकि, एजेंसी को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच के दायरे में कोई निर्दोष न आ जाए। शराब घोटाले की चिनगारी कहां-कहां उड़ने वाली है, यह अभी तक साफ नहीं हो सका है। हालांकि, आम आदमी पार्टी की मंत्री आतिशी ने यह भी कहा कि एक करीबी के जरिये उनको खरीदने के कोशिश हुई और यह कहा गया कि बात न मानने पर अगले एक महीने में उनके साथ कुछ अन्य आप नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। ऐसे बयान जांच एजेंसी की छवि धूमिल कर सकते हैं, इसलिए जल्द ही इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए।
युगल किशोर राही, टिप्पणीकार, Hindustan, 5 April
Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal will be remembered for a long time in the history of the country. The coming generations will read in books how the Chief Minister of the national capital Delhi continued to rule by keeping morality at bay, despite the allegations against him. If seen, the Chief Minister of Delhi should resign from the constitutional post and protect the Constitution and strongly face the allegations leveled against him. Kejriwal is not the only Chief Minister accused of corruption in this country. Earlier, many Chief Ministers like Jayalalitha, Lalu Prasad Yadav, Madhu Koda, Hemant Soren have gone to jail after being surrounded on corruption charges, but before going to jail, they also resigned from the post of Chief Minister. The example of Hemant Soren is the most recent. But Kejriwal refused to do so. This shows that he just wants to remain on the chair by any means.
Governing from jail is ridiculous. This is spoiling India’s image in other countries. Other countries would want to know whether the Constitution of India allows this? Of course, the Indian Constitution is silent on this question, but it does not mean that we should keep making mistake after mistake by ignoring the important things that are left out of being recorded in the Constitution. Does India’s democracy allow the Chief Minister to issue directions to his subordinate officers from the prison for thieves, dacoits and criminals? This is also not appropriate.
Any such investigation takes time. It is not that the matter will be ended by putting Kejriwal in jail.
The investigating agencies are engaged in intensive investigation, hence the Chief Minister should be patient and trust the judiciary. If he is right, then of course it will take some time, but he will definitely get justice. However, the agency should also ensure that no innocent person comes under the scanner. It is not yet clear where the sparks of the liquor scam are going to fly. However, Aam Aadmi Party minister Atishi also said that an attempt was made to buy her through a close friend and it was said that if she did not agree, some other AAP leaders along with her would be arrested in the next one month. Such statements can tarnish the image of the investigating agency, so soon there should be milk and water in this case.
Couple Kishore Rahi, Commentator, Hindustan, 5 April
March 31, 2024 in News
कथित शराब घोटाले में गिरफ्तार किए गए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पूछताछ में जुटी है। आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो से हर दिन करीब पांच घंटे पूछताछ की जा रही है। हालांकि, ईडी अभी तक उनके फोन और डिजिटल डिवाइसेज का एक्सेस हासिल नहीं कर पाई है। केजरीवाल से बार-बार पासवर्ड बताने को कहा जा रहा है। लेकिन उन्होंने हर बार इससे इनकार कर दिया। अब इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईडी ने केजरीवाल के आईफोन को अनलॉक कराने के लिए ऐपल से संपर्क किया है।
21 मार्च को केजरीवाल की गिरफ्तारी की रात पुलिस ने उनके घर से चार मोबाइल फोन बरामद किए थे। केजरीवाल की पत्नी का फोन भी ईडी ने जब्त किया था। ईडी ने 28 मार्च को रिमांड बढ़ाए जाने की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया था कि केजरीवाल के पत्नी के फोन का एक्सेस मिल गया है और इसका डेटा भी निकाल लिया गया है। लेकिन केजरीवाल अपने फोन का पासवर्ड नहीं बता रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री ने छापेमारी के दौरान अपने आईफोन को स्विच ऑफ कर दिया और अभी तक ईडी अधिकारियों को पासवर्ड नहीं बताया है।
केजरीवाल से बार-बार उनका पासवर्ड मांगा गया, लेकिन उन्होंने हर बार इनकार किया। रिपोर्ट के मुताबिक जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया, केजरीवाल का कहना है कि उनके फोन का एक्सेस लेने पर ईडी को उनकी चुनावी रणनीति और चुनाव पूर्व हुए गठबंधन से संबंधित डेटा हासिल हो जाएगा। अखबार ने यह भी बताया है कि ईडी ने आधिकारिक रूप से फोन निर्माता कंपनी ऐपल से भी संपर्क किया है। हालांकि, ऐपल का कहना है कि कुछ भी डेटा निकालने के लिए पहले पासवर्ड जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने ईडी को बताया है कि यह फोन उनके पास करीब एक साल से है और 2020-21 में शराब नीति निर्माण के दौरान जिस डिवाइस का इस्तेमाल वह कर रहे थे वह अब उनके पास नहीं है। वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि केजरीवाल से हर दिन करीब 5 घंटे पूछताछ की जा रही है। केजरीवाल एक अप्रैल तक ईडी की कस्टडी में रहेंगे।
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March 12, 2024 in News
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस की शुरुआत करते हुए कहा कि डाटाबेस की मदद से सहकारिता क्षेत्र को गति मिलेगी। इसके विस्तार में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि 75 साल बाद पहली बार सहकारिता डाटाबेस शुरू किया जा रहा है। । अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहसिक फैसला लेकर उसे अंजाम तक पहुंचाते हुए सहकारिता मंत्रालय का गठन किया। उन्होंने कहा कि सहकारिता को गति देने में समस्या आई, हमें ये पता नहीं था कि परेशानी कहां है और तब इस डेटाबेस का विचार आया। जिसके द्वारा परेशानी की पहचान कर विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डाटाबेस की पेशकश, सहकारी क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। एक क्लिक पर पूर्ण जानकारी उपलब्ध होगी: केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा, इस को-ऑपरेटिव डाटाबेस से सहकारिता का विस्तार, डिजिटल माध्यम से डेवलपमेंट और डाटाबेस से डिलीवरी का काम होगा। डाटा, विकास को सही दिशा देने का काम करता है। यह समस्या का अध्ययन करने में बहुत कारगर सिद्ध होगा।
शाह ने कहा कि अब तक 20 नई गतिविधियों को पैक्स के साथ जोड़ा है, जिससे पैक्स मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पैक्स के कम्यूटरीकरण से इनके विकास की कई संभावनाएं खुली। यह तय किया गया कि 2027 से पहले देश की हर पंचायत में एक पैक्स होगा। देश में आठ लाख से अधिक समितियां पंजीकृत है। 30 करोड़ से अधिक नागरिक इनसे जुड़े हैं।
राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस एक वेब-आधारित डिजिटल डैशबोर्ड है, जिसमें राष्ट्रीय एवं राज्य संघों सहित सहकारी समितियों के आंकड़ों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय डाटाबेस (आंकड़ों की सूची) के तहत देश के विभिन्न क्षेत्रों में फैली 29 करोड़ से अधिक की सामूहिक सदस्यता वाली आठ लाख सहकारी समितियों के बारे में जानकारी एकत्र की गई है।