💎काँच और हीरा💎
एक राजा का दरबार लगा हुआ था। क्योंकि सर्दी का दिन था इसलिये राजा का दरवार खुले मे लगा हुआ था!
पूरी आम सभा सुबह की धूप मे बैठी थी।
महाराज के सिंहासन के सामने एक शाही मेज थी और उस पर कुछ कीमती चीजें रखी थीं!
राज्य के पंडित लोग, मंत्री और दीवान आदि सभी दरबार मे बैठे थे और राजा के परिवार के सदस्य भी बैठे थे!
💎उसी समय एक व्यक्ति आया और उसने भी सभा में प्रवेश की अनुमति मांगी और उसे इजाजत प्रवेश गई!
उसने व्यक्ति ने कहा, ” मेरे पास दो वस्तुएं हैं! मै हर राज्य के राजा के पास जाता हूँ और अपनी वस्तुओं को दिखाता हूँ पर इन्हें कोई परख ही नहीं पाता – सब हार जाते हैं और मैं विजेता बनकर घूमते-घामते अब आपके नगर मे आया हूँ!”
राजा ने उत्सुकता से पूछा, “ऐसी कौन सी वस्तु है तुम्हारे पास?”
💎तो उसने झट से दोनों वस्तुए राजा के मेज पर रख दीं! वे दोनों वस्तुएं बिल्कुल समान आकार, समान रुप रंग, समान प्रकाश सब कुछ नख-शिख समान था!
राजा ने कहा “ये दोनो वस्तुएं तो एक हैं!”
तो उस व्यक्ति ने कहा, “हाँ दिखाई तो एक सी ही देती है लेकिन हैं भिन्न!
इनमें से एक है बहुत कीमती हीरा और एक है काँच का टुकडा! “
“💎लेकिन रूप रंग सब एक है!”
इसलिए कोई आज तक परख नहीं पाया क़ि कौन सा हीरा है और कौन सा काँच का टुकड़ा!”
💎 आप में से भी कोइ परख कर बताये कि ये हीरा है और ये काँच! अगर आपकी परख खरी निकली तो मैं हार जाऊंगा और यह कीमती हीरा मैं आपके राज्य की तिजोरी मे जमा करवा दूंगा!”
पर शर्त यह है क़ि यदि कोई नहीं पहचान पाया तो इस हीरे की जो कीमत है उतनी धनराशि आपको मुझे देनी होगी!इसी प्रकार से मैं कई राज्यों से जीतता आया हूँ!”
राजा ने कहा “मैं तो नही परख सकूंगा!
दीवान भी बोले कि हम भी हिम्मत नहीं कर सकते क्योंकि दोनों बिल्कुल समान है!
💎 कोई भी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था! हारने पर पैसे देने होंगे – इसका कोई सवाल नहीं था क्योंकि राजा के पास बहुत धन था!
राजा की प्रतिष्ठा गिर जायेगी, इसका सबको भय था।
आखिरकार पीछे थोडी हलचल हुई!
एक अंधा आदमी हाथ मे लाठी लेकर उठा!
उसने कहा मुझे महाराज के पास ले चलो!
मैंने सब शर्त सुनी है और यह भी सुना है कि कोई उस वस्तु परख नहीं पा रहा है!एक अवसर मुझे भी दो!
वह एक आदमी के सहारे राजा के पास पहुंचा।
उसने राजा को बतलाया कि मैं तो जनम से अंधा हूं फिर भी मुझे एक अवसर दिया जाये!
जिससे मैं भी एक बार अपनी बुद्धि को परखूँ और हो सकता है कि सफल भी हो जाऊं!
और यदि सफल न भी हुआ तो वैसे भी आप तो हारे ही है!
राजा को लगा कि इसे अवसर देने में हर्ज ही क्या है?
राजा ने कहा क़ि ठीक है!
तो तब उस अंधे आदमी को दोनों चीजें छुआ दी गयी और पूछा गया कि इनमें कौन सा हीरा है और कौन सा काँच? यही तुम्हें परख कर बतलाना है!
उस आदमी ने एक क्षण में कह दिया कि यह हीरा है और यह काँच!
जो आदमी इतने राज्यों में जीतकर आया था वह नतमस्तक हो गया और बोला “सही है, आपने ठीक पहचान लिया!धन्य हो आप!
उसने अपने वचन के मुताबिक घोषणा की कि यह हीरा मैं आपके राज्य की तिजोरी में दे रहा हूँ !”
सब बहुत खुश हो गये और जो आदमी आया था वह भी बहुत प्रसन्न हुआ कि कम से कम कोई तो मिला परखने वाला!
सभी लोगों ने उस अंधे व्यक्ति से एक ही जिज्ञासा जताई कि तुमने यह कैसे पहचाना कि यह हीरा है और वह काँच!
उस अंधे ने कहा कि यह तो बहुत ही सरल बात है मालिक! हम सब धूप में बैठे हैं! मैंने दोनों चीज़ों को छुआ – 💎जो ठंडा रहा वह हीरा और जो गरम हो गया वह काँच!
यह प्रसंग हमको भी प्रेरणा देता है कि *जीवन में पारखी बनने के लिए हमें शान्त सीतल रहना होगा!
☝🏻 अक्सर हमारे जीवन में भी देखने को मिलता है कि जो बात बात में गरम होकर उलझ जाये – वह व्यक्ति काँच है!
और….
*🌷जो विपरीत परिस्थिति मे भी ठंडा रहे *💎वह व्यक्ति हीरा है!💎*
हर व्यक्ति के जीवन में शीतलता हो सकती है, अगर इन्सान के अन्दर चाहत हो तो आज भी ऐसे पारखी हैं जो कहते हैं कि शान्ति सम्भव है!
बस हमने शान्ति दिशा में एक कदम बढ़ाना है!
कहा भी है कि –
बहता था बहे जात था,
लोक वेद के साथ!
पैंढे में सद्गुरु मिले,
दीपक दीना हाथ!
दीपक दीना हाथ कर
वस्तु दई लखाय!
कोटि जनम का पंथ था,
पल में पहुंचा जाए!!
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