गुरुवर मेरा सहारा, तेरे सिवा नहीं है।
आधार एक तू है, कोई दूसरा नहीं है॥
तू बंधु, तू सखा है, तू बाप, तू ही मां है।
तेरे सिवाय कोई, जग में मेरा नहीं है॥
वह कौन वस्तु लाऊं, जिसको तुझे चढ़ाऊं।
जो कुछ है सब है तेरा, कुछ भी मेरा नहीं है ॥
धीमी सुलग रही है, कर तेज आग अपनी ।
मेरे ममत्व का मल, सारा जला नहीं है ॥







