O mind, why did you forget, why did you forget Hari’s worship?

भूल गया मन रे, तू हरि भजन क्यों भूल गया।
भूल गया मन रे, तू नाम जपन क्यों भूल गया॥

मानुष चोला रतन अमोला, प्रभु कृपा से पाया।
भूल गया क्यों वायदे अपने, इसमें दाग लगाया ॥

आयु जड़ को काट रहे, दिन-रात के दो कुल्हाड़े।
तेरे देखत काल बली ने, कितने बाग उजाड़े ॥

भूखे प्यासे रहकर जोड़ी, दौलत बना करोड़ी।
लेकिन जब तू जायेगा जग से, साथ चले ना कौड़ी ॥

अरबों-खरबों खर्च करे पर, एक स्वांस ना पाये।
आज वही अनमोल ख़जाना, यूं ही लुटता जाये ॥