मिले सतगुरु, जिंदगी मिल गयी है।
कि मुरझाये दिल की, कली खिल गयी है ॥
यह अहसान सतगुरु का, हम पर हुआ है।
कि मन का अंधेरा, सभी मिट गया है।
हमें ज्ञान की रोशनी मिल गयी है।
कि मुरझाये दिल की ….
न पाया जिसे, दिल की वीरानियों में।
न दुनिया की सब ऐश-सामानियों में ॥
गुरु चरणों में ऐसी खुशी मिल गयी है।
कि मुरझाये दिल की ….
उनके चरणों में आकर के, जब सिर झुकाया।
इस दिल को मुहब्बत के, रंग में रंगाया ॥
गुरु प्रेम की चासनी मिल गयी है।
कि मुरझाये दिल की
मुबारक यह दीदार, हो सतगुरु का।
मुबारक हमें प्यार, हो सतगुरु का।।
उन्हें पा यह खुश-किश्मती मिल गयी है ॥
कि मुरझाये दिल की







