सेवक पे ऐ प्रभु जी! करुणा बनाये रखना।
चरणों में अपने मुझको, हरदम लगाये रखना॥
माया के रंग-ढंग से, झूठी मलिन उमंग से।
इस नागिनी के डंक से, मुझको बचाये रखना ॥
ऐसी दया हो मुझ पर, दृढ़ मन रहे निरंतर ।
भक्ति में मुझको दाता, पुख्ता बनाये रखना ॥
इस मोहिनी छवि का, नक्शा यह प्यारा प्यारा।
हिरदय में मेरे भगवन, निशदिन बसाये रखना ॥
अपमान मान दुख-सुख, परवाह न इनकी हो कुछ।
इन झंझटों से मुझको, ऊंचा उठाये रखना ॥
दिल से भुला न देना, चित्त से हटा न देना।
इस दास को हमेशा, बस अपने साये रखना ॥







