जीवन का राजपथ
जीवन के पथ पर हमें सुंदर उपवन भी मिलते हैं
और कँटीली झाड़ियाँ भी।
सुख सागर में हम गोते खाते हैं ;
तो कभी दुःख का तूफान हमें भयभीत करता है!
कभी की सुषमा हमें मनोहारी दृश्य दिखाती है;
तो कभी पतझड़ का परिवेश, हमारे हृदय को कष्ट देता है।
जीवनयात्रा का यह पथ कभी सुरम्य घाटियों से होकर गुजरता ;
तो कभी ऊबड़-खाबड़ दुर्गम रास्तों से।|
दुर्गम रास्तों से गुजरते समय, कभी-कभी पथ को छोटा करने के लिए यात्री छोटी-छोटी पगडंडियाँ बना लेते हैं।
इनमें से कुछ पगडंडियाँ तो रास्ते को छोटा करती हैं, पर कुछ मात्र भटकावा बनकर रह जाती हैं।
जीवन-पथ पर भी ऐसी पगडंडियाँ बहुत हैं, जो दिखती तो छोटी हैं और ऐसा आभास भी देती हैं कि वे मार्ग तक पहुँचा देंगी, पर वो कहीं भी पहुँचाती नहीं हैं।
दुःख के क्षणों में मनुष्य ऐसी भूल अक्सर कर बैठते हैं, जब वे छोटे व सरल रास्ते के लालच में मुख्य मार्ग को छोड़कर कहीं और की यात्रा पर निकल पड़ते हैं।
💐जीवन का मुख्य मार्ग, जीवन का राजपथ धर्म का मार्ग ही है। 💐सुख आए अथवा दुःख, इस राजमार्ग को छोड़ने की भूल हमें कभी नहीं करनी चाहिए; क्योंकि अंतत: गंतव्य तक पहुँचाने का कार्य मात्र राजपथ ही करता है।
पाप, पतन, अनीति का मार्ग शीघ्र सफलता का स्वप्न जरूर दिखाता है, परंतु पहुँचाता कहीं भी नहीं है। हमारी चाहतें शीघ्रातिशीघ्र पूरी हो जाएँ, इस लालच में लोग धर्म व सदाचार का पथ छोड़कर अपूर्ण महत्त्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए निकल जरूर पड़ते हैं, परंतु वो पथ मात्र कीचड़ भरे दलदल में पहुँचाने के अतिरिक्त कुछ नहीं करता।
धर्म का पथ समयसाध्य हो, समय के महापुरुष का मार्गदर्शन हो, उनकी आज्ञा का पालन करने का मन में संकल्प हो, हमारा जीवन कर्तव्यों से परिपूर्ण है – वही जीवन का राजमार्ग है; उस पर चलते हुए जीवन के उद्देश्य को प्राप्त करना ही श्रेष्ठ है व श्रेयस्कर भी!
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