मेरे गुरुवर तेरा, जब सहारा मिला।
नाव मंझधार में थी, किनारा मिला ॥
मेरे दिल में नहीं, कोई भी चाह है। तुम मिले अब, न दुनिया की परवाह है॥
अब तो मुर्शिद मुझे, प्यारा-प्यारा मिला ॥
नाव मंझधार में थी …..
तेरे चरणों में हमको, जगह मिल गयी।
जिंदगी को भी जीने की, शह मिल गयी ॥
जो हमारा था, हमको हमारा मिला ॥
नाव मंझधार में थी
भूल जाने की हम सबकी, आदत प्रभो।
तुम हमारे हो, दिल से इबादत प्रभो ॥
संत सद्गुरु कृपा का, नज़ारा मिला ॥
नाव मंझधार में थी ….







