हे हे प्रभु प्रभु हम हम पर पर दय दया अब कीजिये।
मन के सारे पापों को हर लीजिये ॥
मन के सागर में बहे जाते हैं हम।
करूणा करके पार इससे कीजिये ॥
मन सदा निर्लेप विषयों से रहे।
भक्ति और विश्वास हमको दीजिये ॥
तुमसे ही रिश्ता रहे, नाता रहे।
और सब आशा हरि हर लीजिये ॥
हो शहंशाह रंक सब एक-सा हमें।
ऐसी समता दान हमको दीजिये ॥







