शब्द नहीं पास कैसे, विनय सुनाऊं मैं।
पंख नहीं पास कैसे, पास चला आऊं मैं ॥
ऐसा कोई त्याग कहां, योग अनुराग कहां।
आपको बुला लूं प्रभु, ऐसा मेरा भाग्य कहां ॥
मन की व्यथा को किस, भाषा में सुनाऊं मैं ॥
पंख नहीं पास कैसे
मीरा जैसा प्यार नहीं, करूण पुकार नहीं।
आपको रिझाऊं ऐसा, कोई उपकार नहीं ॥
तेरा बन जाऊं ऐसी, समझ कहां पाऊं मैं ।।
पंख नहीं पास कैसे
अपना इशारा दे दो, चरणों में गुजारा दे दो।
द्वार पर भिखारी आया, थोड़ा-सा सहारा दे दो ॥
तुम्हें छोड़ कर गुरुवर, और कहां जाऊं मैं ॥
पंख नहीं पास कैसे







