जितनी अधिक इच्छा, उतनी ही अधिक मन में अशान्ति….

जितनी अधिक इच्छा, उतनी ही अधिक मन में अशान्ति….

हमेशा याद रहे,
चाहे कितना भी धन इकट्ठा कमा करके रख लो, दरिद्रता नहीं मिटती और चाहे कितने ही बड़े पदों पर पहुंँच जाओ, हीन भाव नष्ट नहीं होता।
इसलिए कि दरिद्रता भीतर है और धन बाहर है। हीन भाव भीतर है और पद बाहर है। दोनों का कोई सम्बन्ध नहीं है।
इसलिए तो यह होता है कि एक पद मिले तो उससे बड़े पद की आकांँक्षा पैदा हो जाती है। वह पद मिल जायें तो और बड़े पद की आकांँक्षा पैदा हो जाती है।
यह ऊपर पहुंँच जाने की कोशिश इस बात का सबूत है कि मनुष्य को यह बोध है कि वह बहुत हीन है, उसे सिद्ध करना है कि वह शक्तिशाली है।

इतिहास गवाह है कि दुनिया में जिन लोगों में हीनता की भावना सर्वाधिक होती है, वे लोग मानवता को भी कुचलने में गुरेज नहीं करते। हिटलर, स्टालिन, मुसोलिनी जैसे लोग बहुत हीनता के भाव से पीड़ित थे। सिकन्दर या चंँगेज खांँ, तैमूरलंँग जैसे लोग बहुत हीनता के भाव से पीड़ित लोग थे। इन्हें तब तक चैन न था जब तक उन्होंने यह न दिखा दिया कि लाखों लोग हमारे कब्जे में हैं, उनकी गर्दन पर हमारे हाथ हैं। हम जब चाहें उनकी गर्दन मरोड़ दें।
जब तक उन्हें विश्वास न आ गया कि हम शक्तिशाली हैं तब तक वे भागते गये!
और यह विश्वास कभी नहीं आता आखिरी स्वांँस तक नहीं आता। चाहे सारी दुनिया पर कब्जा हो जाये लेकिन फिर भी ऐसे अभिमानी हीन-बुद्धि व्यक्ति के भीतर डर बना रहता है।
ऐसा व्यक्ति अभिमान से जितना शक्तिशाली होता है, उतनी ही निर्बलता उसको पकड़ने लगती है, उतनी ही उसे अपनी सुरक्षा की व्यवस्था करनी होती है।
लेकिन इतनी भारी भरकम सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद भी ऐसा व्यक्ति मौत को नहीं जीत सकता क्योंकि ऐसा व्यक्ति प्राणों के भीतर की शक्ति के पूर्ण सत्य से दूर रहता है।
जीवन में समय के महापुरुष के द्वारा मिले ज्ञान के ध्यान -सुमिरण के अभ्यास के प्रति प्रतिबद्धता ही प्राणों के भीतर की शक्ति की पहचान करवाते हुए मृत्यु के पार ले जाती है और अहंँकार जड़ से नष्ट हो जाता है।
तभी व्यक्ति मानवता के प्रति सम्पूर्ण समर्पण करता है। अगर प्रत्येक व्यक्ति”नाम-सुमिरण”के अभ्यास से स्वयं को जानकर हृदय में शान्ति का अनुभव कर ले तो सम्पूर्ण विश्व में शान्ति सम्भव है।

  • श्री हंस जी महाराज
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धैर्य

धैर्य

एक बार एक व्यक्ति अकेला उदास बैठा कुछ सोच रहा था कि उसके पास भगवान आये और भगवान को अपने समक्ष देख उस व्यक्ति ने पूछा, मुझे ज़िन्दगी में बहुत असफलताएं मिली! अब मैं निराश हो चूका हूँ! हे भगवन, मुझे बताओ कि मेरे इस जीवन की क्या कीमत है?

भगवान ने उस व्यक्ति को एक लाल रंग का चमकदार पत्थर दिया और कहा “जाओ इस पत्थर की कीमत का पता लगा लो! तुम्हे अपनी ज़िन्दगी की कीमत का भी पता चल जाएगा! लेकिन ध्यान रहे कि इस पत्थर को बेचना नहीं है!”

वो व्यक्ति उस लाल चमकदार पत्थर को लेकर सबसे पहले एक फल वाले के पास गया और कहा “भाई..ये पत्थर कितने का खरीदोगे?”

फल वाले ने पत्थर को ध्यान से देखा और कहा “मुझसे 10 संतरे ले जाओ और ये पत्थर मुझे दे दो!”

उस व्यक्ति ने कहा कि, नहीं, मैं ये पत्थर बेच नहीं सकता! फिर वो आदमी एक सब्ज़ी वाले के पास गया और उसे कहा, “भाई …ये लाल पत्थर कितने का खरीदोगे?”

सब्ज़ी वाले ने कहा कि मुझसे एक बोरी आलू की ले जाओ और ये पत्थर मुझे बेच दो! लेकिन भगवान् के कहे अनुसार उस व्यक्ति ने कहा कि नहीं, मैं ये बेच नहीं सकता!

फिर वो व्यक्ति उस पत्थर को लेकर एक सुनार की दूकान में गया जहाँ कई तरह-तरह के आभूषण पड़े हुए थे! उस व्यक्ति ने सुनार को वो पत्थर दिखाया और उस सुनार ने बड़े गौर से उस पत्थर को देखा और फिर कहा, “मैं तुम्हे 1 करोड़ रुपये दूंगा, ये पत्थर मुझे बेच दो!” फिर उस व्यक्ति ने सुनार से माफ़ी मांगी और कहा कि ये पत्थर मैं बेच नहीं सकता। सुनार ने फिर कहा “अच्छा चलो ठीक है! मैं तुम्हे 2 करोड़ दूंगा! ये पत्थर मुझे बेच दो!”

सुनार की बात सुनकर वो व्यक्ति चौंक गया लेकिन सुनार को मना कर वो आगे बढ़ गया और एक हीरे बेचने वाले की दूकान में गया!

हीरे के व्यापारी ने उस लाल चमकदार पत्थर को पूरे 10 मिनट तक देखा और फिर एक मलमल का कपडा लिया और उस पत्थर को उस पे रख दिया। फिर उस व्यापारी ने अपना सर उस पत्थर पर लगा कर माथा टेका और कहा “तुम्हे ये कहा मिला! ये इस दुनिया में सबसे अनमोल रत्न है! अगर इस दुनिया की पूरी दौलत भी लगा दी जाए तो इस पत्थर को नहीं खरीद सकता!”

ये सुन वो व्यक्ति बहुत हैरान हुआ और सीधा भगवान के पास गया और उन्हें आप बीती बताई और फिर उसने भगवान से पूछा, “हे भगवन अब मुझे बताईये कि मेरे इस जीवन की क्या कीमत है?”

भगवान ने कहा “फल वाले ने, सब्ज़ी वाले ने, सुनार ने और हीरे के व्यापारी ने तुम्हें जीवन की कीमत बता दी थी! हे मनुष्य, किसी के लिए तुम एक पत्थर के टुकड़े सामान हो और किसी के लिए बहुमूल्य रत्न समान।

हर किसी ने अपनी जानकारी के अनुसार तुम्हें उस पत्थर की कीमत बताई लेकिन उस हीरे के व्यापारी ने इस पत्थर को पहचान लिया। ठीक उसी तरह कुछ लोग तुम्हारी कीमत नहीं पहचानते! इसलिए ज़िन्दगी में कभी निराश मत हो!

इस दुनिया में हर मनुष्य के पास कोई ना कोई ऐसा हुनर होता है जो सही वक़्त पर निखार कर आता है लेकिन उसके लिए परिश्रम और धैर्य की ज़रूरत है!
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Yearly Horoscope 2023

मेष राशिफल 2023 

मेष राशि वालों का इस साल मनोबल ऊंचा रहेगा। मन उत्साहित रहेगा जिससे जातक लगातार सक्रिय रहेगा। व्यापारियों के लिए वर्ष लगभग अनुकूल रहेगा। इस वर्ष जातक कई महत्वपूर्ण व्यावसायिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सफल होंगे। व्यापार में लाभ की स्थिति बनी रहेगी, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के लिए यह वर्ष थोड़ा मिलाजुला रहेगा। जातक मानसिक उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ेंगे। महिलाओं के लिए यह साल थोड़ा सावधान रहने वाला है। क्रोध आदि पर नियंत्रण बनाए रखें। लॉटरी शेयर और सट्टे से जुड़े लोगों के लिए यह वर्ष मध्यम फलदायी रहेगा, लेकिन भूमि-भवन आदि के क्रय-विक्रय के लिए यह समय अनुकूल रहेगा। भाई-बहनों से भी तालमेल औसत रहेगा। प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ने की संभावना है, लेकिन सावधान रहें। संतान पक्ष के लिए अनुकूल स्थिति बनेगी। संतान की उन्नति होगी। कोर्ट कचहरी के मामलों में प्रगति होगी।
लाभ की स्थिति बनी रहेगी

वृषभ वार्षिक राशिफल 2023

वृषभ राशि वालों के लिए यह वर्ष थोड़ा संघर्षपूर्ण रहेगा, लेकिन संघर्ष के साथ उन्नतिशील स्थितियां बनती रहेंगी। मित्रों और सहकर्मियों का निरंतर सहयोग प्राप्त होगा, जिससे व्यक्ति अपनी आय को बढ़ाने में सफल हो सकता है। अनावश्यक वाद-विवाद से दूर रहें। सेहत से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां हो सकती हैं, लेकिन जातक उन समस्याओं का निदान करने में सफल हो सकते हैं। खाने-पीने में सावधानी बरतें। यदि आप कोई संपत्ति खरीदना चाहते हैं, तो वर्ष के पहले महीनों की तुलना में वर्ष के अंतिम महीनों में जातक के लिए शुभ स्थितियां बन सकती हैं, तभी खरीदने का निर्णय लेना उचित होगा। विद्यार्थियों के लिए समय लगभग अनुकूल है। पढ़ाई में मेहनत करनी पड़ेगी। सामाजिक कार्यों में व्यक्ति का मन लगेगा। तथा सामाजिक प्रतिष्ठा में भी वृद्धि होगी। कोर्ट कचहरी से जुड़ा कोई विवाद सुलझने की संभावना है। प्रेम संबंधों में कुछ तनाव हो सकता है इसलिए प्रेम संबंधों से दूर ही रहें तो बेहतर होगा अन्यथा आपको तनाव का सामना करना पड़ सकता है। धार्मिक कार्य करने का अवसर मिल सकता है। व्यापारियों के लिए यह वर्ष अनुकूल रहेगा। लाभ की स्थितियां बनेंगी। नौकरीपेशा लोगों के लिए यह वर्ष विशेष रूप से शुभ है। तरक्की और आर्थिक लाभ की स्थिति बन सकती हैं।
संघर्ष के बाद मिलेगी सफलता

मिथुन वार्षिक राशिफल 2023

मिथुन राशि के जातकों पर ईश्‍वर की कृपा इस साल बनी रहेगी। लोगों पर ज्यादा भरोसा करने से बचें, नहीं तो धोखा मिल सकता है। अनावश्यक धन खर्च करने से बचें, अन्यथा आर्थिक दबाव बन सकता है। पूंजी निवेश की दृष्टि से यह वर्ष बहुत अनुकूल नहीं है, अनावश्यक वाद-विवाद से बचें, वाणी पर संयम रखें। सगे-संबंधियों और भाई-बहनों के तालमेल में कमी आ सकती है। विद्यार्थियों के लिए भी यह वर्ष थोड़ा संघर्षपूर्ण रहेगा। कड़ी मेहनत के बाद भी पढ़ाई भी पटरी पर आ जाएगी। प्रेम संबंधों में उतार-चढ़ाव के साथ आपसी तालमेल बना रहेगा। संतान पक्ष से कुछ तनाव हो सकता है। बच्चों के साथ कई मुद्दों पर बहस हो सकती है। शत्रु पक्ष से भी परेशानी आ सकती है, इसलिए सावधान रहें। पारिवारिक जीवन की स्थितियां सामान्य रहेंगी। लोगों का सहयोग मिलेगा। व्यापारियों के लिए यह साल मिलाजुला रहेगा। बाजार में सोच-समझकर पैसा लगाएं, नहीं तो दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
अनावश्यक धन खर्च करने से बचें

कर्क वार्षिक राशिफल 2023

कर्क राशि वालों के लिए यह साल शुरुआती संघर्ष के बाद फलदायी साबित हो सकता है। मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा। जिससे संपत्ति अर्जित करने के योग बन सकते हैं। किसी बहुप्रतीक्षित वस्तु की खरीदारी की संभावना बन रही है। रुका हुआ काम पूरा हो सकता है। भाई बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। जोश में आकर कोई भी काम करने से बचें। धैर्य में कमी आ सकती है, जातक यदि जमीन, वाहन और मकान का क्रय-विक्रय करना चाहते हैं तो उसके लिए स्थितियां शुभ हैं। राजनीतिक हस्तियों के लिए भी यह समय अनुकूल है। राजनीति में प्रगति का अवसर मिल सकता है। माता-पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें, नहीं तो उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह समय अनुकूल है। पढ़ाई में आपकी रुचि हो सकती है। घूमने-फिरने का अवसर मिलेगा। धार्मिक यात्रा के भी योग बनेंगे। संतान की परेशानी कम होगी। व्यवसाय की दृष्टि से यह वर्ष मिलाजुला रहेगा, लेकिन जातक यदि अधिक मेहनत करेंगे तो व्यापार में बड़े लाभ की स्थिति बन सकती है।
रुके हुए कई कार्य होंगे पूरे

सिंह वार्षिक राशिफल 2023

सिंह राशि वालों की किस्‍मत का सितारा इस वर्ष बुलंद है और इस साल आपके लिए कई लाभकारी स्थितियां बन रही हैं। अनुकूल परिस्थितियां बनेंगी। परिवारिक सहयोग एवं सुख बढ़ेगा। स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। कार्यक्षेत्र में आने वाली परेशानियं कम होगीं। लोगों का निरंतर सहयोग बना रहेगा। रुका धन मिलेगा। आर्थिक क्षेत्र में लाभ की स्थिति बनी रहेगी। घरेलू सुख-साधनों में वृद्धि होगी। अनावश्यक तर्क-वितर्क से बचें यदि कोई संपत्ति खरीदना चाहते हैं तो यह वर्ष अनुकूल रहेगा। माता-पिता के साथ कोई यात्रा या धार्मिक यात्रा की योजना बन सकती है। विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष अनुकूल है। पढ़ाई-लिखाई में मन लगेगा। किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफल होने के योग हैं। जीवनसाथी के साथ घूमने-फिरने का अवसर मिल सकता है। नौकरी वालों के लिए यह वर्ष अनुकूल है। लाभकारी स्थितियां बनेगीं। व्यापार की दृष्टि से भी समय अनुकूल है। व्यापार में पैसा लगाना लाभप्रद रहेगा।
किस्‍मत का सितारा इस साल बुलंद

कन्या वार्षिक राशिफल 2023

कन्या राशि वालों की किस्‍मत के सितारे बता रहे हैं कि इस वर्ष जातक की प्रगति थोड़ी धीमी गति से होगी लेकिन जातक के कई महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण होंगे। स्वास्थ्य के मामले में सावधानी बनाए रखें। स्वास्थ्य संबंधित परेशानी आ सकती है। आर्थिक मामलों में यह वर्ष सामान्य एवं संघर्षशील रहेगा। अधिक खर्च से बचें। भूमि एवं भवन खरीदने के योग हैं। माता-पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें, नहीं तो बड़ी परेशानी का योग बन सकता है। नौकरीपेशा वालों को लिए यह वर्ष मिलाजुला रहेगा। व्यापारियों के लिए यह वर्ष संघर्ष के साथ आगे बढ़ने वाला है। बाजार एवं शेयर मार्केट में सोच-समझकर ही पैसा लगाएं। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। कोर्ट कचहरी के कार्यों में धीमी गति से प्रगति का योग बन रहा है। प्राइवेट नौकरी करने वालों के लिए यह वर्ष थोड़ा अनुकूल हो सकता है। बोनस मिल सकता है। परिवार में मतभेद सुधरेंगे और सहयोग बढ़ेगा।
आर्थिक मामलों में अधिक खर्च से बचें

तुला वार्षिक राशिफल 2023

तुला राशि वाले इस साल कोई भी नया कार्य करें तो उसमें सोच-समझकर ही कोई फैसला करें। कोई बड़ा कार्य भी संपन्न हो सकता है। छोटी-मोटी यात्रा का भी योग है। किसी पर सोच-समझकर ही विश्वास करें नहीं तो तनाव का सामना करना पड़ सकता है। वाद-विवाद से बचें वाणी पर संयम रखें। भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा जिससे जातक उन्नति करने में सफल होंगे। जमीन-जायदाद के क्रय-विक्रय से लाभकारी स्थितियां बन सकती हैं। माता-पिता से लगाव बनाए रखें, नहीं तो मतभेद या भ्रम की स्थिति बन सकती है। विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष थोड़ा संघर्षमय रहेगा। पढ़ाई-लिखाई में रुचि कम लगेगी। संतान पक्ष से भी सहयोग मिलाजुला रहेगा। वैवाहिक जीवन में सामान्य स्थिति बनी रहेगी। कोर्ट कचहरी के कार्यों में थोड़ा तनाव की स्थिति रहेगी। विरोधियों से सहमति या मित्रता हो सकती है। व्यवसाय की दृष्टि से यह वर्ष सामान्य रहेगा।
कोई बड़ा कार्य संपन्न हो सकता है

वृश्चिक वार्षिक राशिफल 2023

वृश्चिक राशि वालों के लिए यह पूरा साल ही लगभग अनुकूल रहेगा। लंबे समय से चली आ रही परेशानियों का अंत होगा। यह वर्ष लगभग सभी मामलों में लाभकारी एवं उन्नतिशील स्थिति बनाए रखने वाला हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधित सावधानी रखें। इस राशि वालों के लिए यह वर्ष लाभकारी रहेगा। आय के नवीन स्रोत बनेंगे। भिन्न-भिन्न स्रोतों से आय की स्थिति बनी रहेगी। बड़े लाभ की स्थिति बन सकती है। धार्मिक कार्यों में भी रुचि बढ़ेगी। नौकरी के क्षेत्र में भी अनुकूल स्थितियां बनेंगी। आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। व्यवसाय के दृष्टि से वर्ष अनुकूल है। लाभकारी स्थितियां बनेगीं। नए व्यवसाय की शुरुआत भी लाभप्रद रहेगी।
आय के नवीन स्रोत बनेंगे

धनु वार्षिक राशिफल 2023

धनु राशि वालों के लिए यह साल अधिक अनुकूल नहीं है। इस वर्ष अनावश्यक भागदौड़ एवं कार्यों में अनावश्यक देरी हो सकती है। बने हुए कार्य रुक सकते हैं या उनमें विलंब की स्थिति बन सकती है। अनावश्यक मानसिक कष्ट एवं तनाव का सामना करना पड़ सकता है। चोट-चपेट से सावधान रहें। विरोधियों से अनावश्यक तर्क-वितर्क न करें नहीं तो तनाव का सामना करना पड़ सकता है। अनावश्यक भागदौड़ एवं खर्चे की अधिकता के कारण थोड़ी परेशानी रहेगी। पारिवारिक सुख-शांति बनाए रखने का प्रयास करें। वर्ष का मध्य थोड़ा संघर्ष वाला रहेगा। भागदौड़ एवं खर्च की अधिकता रहेगी, लेकिन वर्ष के मध्य के बाद आय के साधनों में वृद्धि होगी। भाई बहनों एवं परिजनों की उन्नति का योग है। खाने-पीने में सावधानी रखें। घरेलू खान-पान में ज्यादा रुचि लें बाहरी खान-पान से बचें। भूमि मकान एवं वाहन खरीदने एवं बेचने में थोड़ा परेशानी के योग हैं। सूझ-बूझ से काम लें। वाहन आदि सावधानीपूर्वक चलाएं। व्यापारियों के लिए यह वर्ष विस्तार देने वाला होगा। नौकरी में लाभ की स्थितियां बन सकती हैं। शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीच दीपक जलाएं, जिससे आर्थिक परेशानियां कम होंगी। कई महत्वपूर्ण कार्य पटरी पर आएंगे।
विरोधियों से अनावश्यक तर्क-वितर्क न करें

मकर वार्षिक राशिफल 2023

मकर राशि के जातकों को इस साल कार्यक्षेत्र में कुछ परेशानियां हो सकती हैं। नौकरी में स्थान परिवर्तन या ट्रांसफर की संभावना बन रही है। सेहत से जुड़ी छोटी-मोटी तकलीफ भी हो सकती है, इसलिए सेहत का ध्यान रखें। व्यक्ति अपने व्यवहार से सामाजिक सम्मान में वृद्धि प्राप्त करने में सफल हो सकता है। माता पिता का सहयोग व स्नेह प्राप्त होगा। प्रेम प्रसंग के क्षेत्र में थोड़ा संयम बनाए रखें, नहीं तो आपको मानसिक उलझन का सामना करना पड़ सकता है। संतान पक्ष के साथ भी भावनात्मक तालमेल बनाए रखें। दांपत्य जीवन में कुछ वैचारिक मतभेद होने की संभावना है, इसलिए पति-पत्नी को समझदारी से काम लेना चाहिए। विद्यार्थियों के लिए यह समय मिलाजुला रहेगा। मेहनत ही पढ़ाई में सफलता का योग बना सकती है। व्यापारियों के लिए यह समय समझदारी से व्यापार करने का है। टालमटोल करने से कारोबार को नुकसान हो सकता है।
ट्रांसफर की संभावना बन रही है

कुंभ वार्षिक राशिफल 2023

कुंभ राशि के जातकों को इस वर्ष मानसिक कष्ठ एवं अनावश्यक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। भौतिक सुख-साधनों में अनावश्यक खर्च का योग बन सकता है। सावधानी बनाए रखें। भौतिक सुख-साधनों पर अधिक खर्च से बचें। घरेलू समस्याओं का समाधान करने में जातक सफल हो सकता है। धैर्य एवं सूझ-बूझ से काम लें। जमीन-जायदाद एवं वाहन के क्रय-विक्रय में सोच-समझकर आगे बढ़े। संतान पक्ष से थोड़ा मतभेद हो सकता है। न्यायालय के मामलों में खर्च बढ़ सकता है। वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी थोड़ा उदासीन हो सकते हैं। सावधानी बनाए रखें। विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष थोड़ा अच्छा रहेगा। पढ़ाई-लिखाई में जिज्ञासा बढ़ेगी। कोई बड़ी सफलता भी मिल सकती है। व्यापार में लाभकारी स्थितियां बनेंगी लेकिन नौकरी वालों पर थोड़ा दबाव बन सकता है। पत्नी के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है इसलिए सावधानी बनाए रखें।
भौतिक सुख-साधनों पर अधिक खर्च से बचें

मीन वार्षिक राशिफल 2023

मीन राशि वालों के लिए वर्ष अनुकूल रहेगा। लाभ की कई स्थितियां बन सकती हैं। रुका हुआ धन मिलने से लाभ की स्थिति बन सकती है। घर परिवार में खुशी का वातावरण रहेगा। घर में मांगलिक कार्य भी हो सकते हैं। देश-विदेश में घूमने का अवसर मिल सकता है। विदेश से भी लाभकारी स्थितियां बन सकती हैं। जातक यदि योजनाबद्ध तरीके से कार्य करेंगे तो आर्थिक उन्नति के साथ बड़े लाभ की स्थिति भी बन सकती है। संगीत कला के प्रति रुझान बढ़ेगा। भाई-बहनों के साथ सौहार्द बढ़ेगा। नवीन संपत्ति के क्रय-विक्रय के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा। सामाजिक गतिविधियों में भी जातक का मान-सम्मान बढ़ेगा। विरोधियों का दबाव कम होगा या विरोधी परास्त होंगे। दांपत्‍य जीवन में खुशी का वातावरण बनेगा। स्वास्थ्य भी अनुकूल रहेगा। विद्यार्थियों के लिए अनुकूल समय है। पढ़ाई-लिखाई के क्षेत्र में भी विशेष उन्नति के योग बन रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन आदि का लाभ मिल सकता है। व्यापार से जुडे़ लोगों के लिए भी यह वर्ष अनुकूल रहेगा। बाजार में पैसा लगाना लाभप्रद रहेगा।
विदेश में घूमने का अवसर मिल सकता है

कर्मों का खेल

कंस को मारने के बाद भगवान श्रीकृष्ण कारागृह में गए और वहां से माता देवकी तथा पिता वसुदेव को छुड़ाया।

तब माता देवकी ने श्रीकृष्ण से पूछा, “बेटा, तुम तो भगवान हो, तुम्हारे पास असीम शक्ति है, फिर तुमने चौदह साल तक कंस को मारने और हमें यहां से छुड़ाने की प्रतीक्षा क्यों की?”

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, “क्षमा करें आदरणीय माता जी, क्या आपने मुझे पिछले जन्म में चौदह साल के लिए वनवास में नहीं भेजा था।”

माता देवकी आश्चर्यचकित हो गईं और फिर पूछा, “बेटा कृष्ण, यह कैसे संभव है? तुम ऐसा क्यों कह रहे हो ?”

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, “माता, आपको अपने पूर्व जन्म के बारे में कुछ भी स्मरण नहीं है। परंतु तब आप कैकेई थीं और आपके पति राजा दशरथ थे।”

माता देवकी ने और ज्यादा आश्चर्यचकित होकर पूछा, “फिर महारानी कौशल्या कौन हैं ?”

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, “वही तो इस जन्म में माता यशोदा हैं। चौदह साल तक जिनको पिछले जीवन में मां के जिस प्यार से वंचित रहना पड़ा था, वह उन्हें इस जन्म में मिला है।”अर्थात्, प्रत्येक प्राणी को इस भू मृत्युलोक में अपने कर्मों का भोग भोगना ही पड़ता है । यहां तक कि देवी-देवता भी इससे अछूते नहीं हैं।

इसलिय शास्त्रों में कहा है कि –
शुभाशुभफलं प्रेत्य लभते भूतसाक्षिकम्।
अतिरिच्येत यो यत्र तत्कर्ता लभते फलम्।।
मनुष्य के अच्छे और बुरे कर्म के साक्षी पंचमहाभूत होते हैं इन कर्मों का फल मृत्यु के बाद मिलता है अच्छे और बुरे कर्मों में जैसे कर्म अधिक होते हैं उनका फल पहले मिलता है।
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एक कौवा और गरुड़

एक कौवा और गरुड़

एक बार एक कौआ मांस के एक टुकड़े को पकड़कर कहीं एकांत में बैठने और उसे खाने के लिए उड़ रहा था। ईगल्स का एक झुंड उसका पीछा कर रहा था। कौवा चिन्तित था और ऊँची और ऊँची उड़ान भर रहा था, फिर भी चील गरीब कौवे के पीछे थी।

तभी “गरुड़” ने कौवे की आंखों में दुर्दशा और पीड़ा देखी। कौवे के करीब आकर उसने पूछा: “क्या दिक्कत है? आप बहुत परेशान और तनाव में हैं?”

कौवा रोया – “इन बाजों को देखो! वे मुझे मारने के लिए मेरे पीछे हैं!”

गरुड़ ज्ञान का पक्षी होने के कारण बोला “अरे मेरे मित्र, वे तुम्हें मारने के लिए तुम्हारे पीछे नहीं हैं! वे मांस के उस टुकड़े के पीछे हैं – जिसे आप अपनी चोंच में पकड़े हुए हैं!
बस इसे गिराएं और देखें कि क्या होगा।

कौवे ने गरुड़ के निर्देशों का पालन किया और मांस का टुकड़ा गिरा दिया! और तुम जहाँ जाना चाहते हो – वहाँ जाओ! सभी चील उसका पीछा छोड़ – गिरते हुए मांस की ओर उड़ गए।

गरुड़ ने मुस्कुराते हुए कहा *”दर्द केवल तब तक है- जब तक आप इसे पकड़ते हैं!
उपाय एक ही है कि उसे छोड़ दीजिये!”

कौवा झुककर बोला, “मैंने मांस का यह टुकड़ा गिरा दिया तो अब, मैं और भी ऊंची उड़ान भर सकता हूँ!

इस कहानी से हमारे लिए भी एक संदेश भी है:

  1. लोग “अहंकार” नामक विशाल बोझ को ढोते हैं, जो हमारे बारे में एक झूठी पहचान बनाता है! हम अपने लिए यह कहते हुए पैदा करते हैं कि “मुझे प्यार की ज़रूरत है, मुझे आमंत्रित करने की आवश्यकता है, मैं ऐसा हूं और इसलिए ..” आदि-आदि!
    इस अहंकार से बचने का उपाय – बस गिरा दो!
  2. लोग “अन्य कार्यों” से तेजी से चिढ़ जाते हैं, यह मेरा दोस्त, मेरे माता-पिता, मेरे बच्चे, मेरा सहयोगी, मेरा जीवन साथी हो सकता है … और मुझे “क्रोध”आता है – उस क्रोध से बचने का उपाय – बस गिरा दो!
  3. लोग खुद की तुलना दूसरों से करते हैं .. सुंदरता, धन, जीवन शैली, अंक, प्रतिभा और मूल्यांकन में और परेशान महसूस करते हैं … हमें जो कुछ भी है उसके प्रति आभारी होना चाहिए! तुलना, नकारात्मक भावनाएं घर कर जाती हैं – उनसे बचने का उपाय – बस गिरा दो!

मनुष्य के बार-बार जन्म-मरण का क्या कारण है?

मनुष्य के बार-बार जन्म-मरण का क्या कारण है?

एक बार द्वारकानाथ श्रीकृष्ण अपने महल में दातुन कर रहे थे। रुक्मिणी जी स्वयं अपने हाथों में जल लिए उनकी सेवा में खड़ी थीं। अचानक द्वारकानाथ हंसने लगे। रुक्मिणी जी ने सोचा कि शायद मेरी सेवा में कोई गलती हो गई है; इसलिए द्वारकानाथ हंस रहे हैं।

रुक्मिणी जी ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा, ‘प्रभु! आप दातुन करते हुए अचानक इस तरह हंस क्यों पड़े, क्या मुझसे कोई गलती हो गई? कृपया, आप मुझे अपने हंसने का कारण बताएं।’

श्रीकृष्ण बोले, ‘नहीं, प्रिये! आपसे सेवा में त्रुटि होना कैसे संभव है? आप ऐसा न सोचें, बात कुछ और है।’

रुक्मिणी जी ने कहा, ‘आप अपने हंसने का रहस्य मुझे बता दें तो मेरे मन को शान्ति मिल जाएगी; अन्यथा मेरे मन में बेचैनी बनी रहेगी।’

तब श्रीकृष्ण ने मुसकराते हुए रुक्मिणी जी से कहा, ‘देखो, वह सामने एक चींटा चींटी के पीछे कितनी तेजी से दौड़ा चला जा रहा है। वह अपनी पूरी ताकत लगा कर चींटी का पींछा कर उसे पा लेना चाहता है। उसे देख कर मुझे अपनी मायाशक्ति की प्रबलता का विचार करके हंसी आ रही है।’”

रुक्मिणी जी ने आश्चर्यचकित होते हुए कहा, ‘वह कैसे प्रभु? इस चींटी के पीछे चींटे के दौड़ने पर आपको अपनी मायाशक्ति की प्रबलता कैसे दीख गई?’

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा, ‘मैं इस चींटे को चौदह बार इंद्र बना चुका हूँ। चौदह बार देवराज के पद का भोग करने पर भी इसकी भोगलिप्सा समाप्त नहीं हुई है। यह देख कर मुझे हंसी आ गई।’

इंद्र की पदवी भी भोग योनि है। मनुष्य अपने उत्कृष्ट कर्मों से इंद्रत्व को प्राप्त कर सकता है। सौ अश्वमेध यज्ञ करने वाला व्यक्ति इंद्र-पद प्राप्त कर लेता है। लेकिन जब उनके भोग पूरे हो जाते हैं तो उसे पुन: पृथ्वी पर आकर जन्म ग्रहण करना पड़ता है।

प्रत्येक जीव इंद्रियों का स्वामी है; परंतु जब जीव इंद्रियों का दास बन जाता है तो जीवन कलुषित हो जाता है और बार-बार जन्म-मरण के बंधन में पड़ता है। वासना ही पुनर्जन्म का कारण है। जिस मनुष्य की जहां वासना होती है, उसी के अनुरूप ही अंतसमय में चिंतन होता है और उस चिंतन के अनुसार ही मनुष्य की गति, ऊंच-नीच योनियों में जन्म होता है। अत: वासना को ही नष्ट करना चाहिए। वासना पर विजय पाना ही सुखी होने का उपाय है।

बुझै न काम अगिनि तुलसी कहुँ,
विषय भोग बहु घी ते ।

अग्नि में घी डालते जाइये, वह और भी धधकेगी, यही दशा काम की है। उसे बुझाना हो तो संयम रूपी शीतल जल डालना होगा।

संसार का मोह छोड़ना बहुत कठिन है। वासनाएं बढ़ती हैं तो भोग बढ़ते हैं, इससे संसार कटु हो जाता है। वासनाएं जब तक क्षीण न हों तब तक मुक्ति नहीं मिलती है। पूर्वजन्म का शरीर तो चला गया परन्तु पूर्वजन्म का मन नहीं गया।

नास्ति तृष्णासमं दु:खं नास्ति त्यागसमं सुखम्।
सर्वांन् कामान् परित्यज्य ब्रह्मभूयाय कल्पते ।।

तृष्णा के समान कोई दु:ख नहीं है और त्याग के समान कोई सुख नहीं है। समस्त कामनाओं मान, बड़ाई, स्वाद, शौकीनी, सुख-भोग, आलस्य आदि का परित्याग करके केवल भगवान की शरण लेने से ही मनुष्य ब्रह्मभाव को प्राप्त हो जाता है। अपने अन्दर के अविनाशी से उसका सम्बन्ध जुड़ जाता है!

इसलिय भक्त ह्रदय से हमेशा उनके दर्शनों की आस बनी रहनी चाहिय –
नहीं है भोग की वांछा, न दिल में लालसा धन की ।
प्यास दरसन की भारी है, सफल कर आस को मेरी ।।
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तीन पुतले

तीन पुतले

महाराजा चन्द्रगुप्त का दरबार लगा हुआ था। सभी सभासद अपनी अपनी जगह पर विराजमान थे। महामन्त्री चाणक्य दरबार की कार्यवाही कर रहे थे।

महाराजा चन्द्र्गुप्त को खिलौनों का बहुत शौक था। उन्हें हर रोज़ एक नया खिलौना चाहिए था। आज भी महाराजा के पूछने पर कि क्या नया है; पता चला कि एक सौदागर आया है और कुछ नये खिलौने लाया है। सौदागर का ये दावा है कि महाराज या किसी ने भी आज तक ऐसे खिलौने न कभी देखें हैं और न कभी देखेंगे। सुन कर महाराज ने सौदागर को बुलाने की आज्ञा दी। सौदागर आया और प्रणाम करने के बाद अपनी पिटारी में से तीन पुतले निकाल कर महाराज के सामने रख दिए और कहा कि अन्नदाता ये तीनों पुतले अपने आप में बहुत विशेष हैं। देखने में भले एक जैसे लगते हैं मगर वास्तव में बहुत निराले हैं। पहले पुतले का मूल्य एक लाख मोहरें हैं, दूसरे का मूल्य एक हज़ार मोहरे हैं और तीसरे पुतले का मूल्य केवल एक मोहर है।

सम्राट ने तीनों पुतलों को बड़े ध्यान से देखा। देखने में कोई अन्तर नहीं लगा, फिर मूल्य में इतना अन्तर क्यों? इस प्रश्न ने चन्द्रगुप्त को बहुत परेशान कर दिया। हार के उसने सभासदों को पुतले दिये और कहा कि इन में क्या अन्तर है मुझे बताओ। सभासदों ने तीनों पुतलों को घुमा फिराकर सब तरफ से देखा मगर किसी को भी इस गुत्थी को सुलझाने का जवाब नहीं मिला। चन्द्रगुप्त ने जब देखा कि सभी चुप हैं तो उस ने वही प्रश्न अपने गुरू और महामन्त्री चाणक्य से पूछा।

चाणक्य ने पुतलों को बहुत ध्यान से देखा और दरबान को तीन तिनके लाने की आज्ञा दी। तिनके आने पर चाणक्य ने पहले पुतले के कान में तिनका डाला। सब ने देखा कि तिनका सीधा पेट में चला गया, थोड़ी देर बाद पुतले के होंठ हिले और फिर बन्द हो गए। अब चाणक्य ने अगला तिनका दूसरे पुतले के कान में डाला। इस बार सब ने देखा कि तिनका दूसरे कान से बाहर आगया और पुतला ज्यों का त्यों रहा। ये देख कर सभी की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी कि आगे क्या होगा। अब चाणक्य ने तिनका तीसरे पुतले के कान में डाला। सब ने देखा कि तिनका पुतले के मुँह से बाहर आगया है और पुतले का मुँह एक दम खुल गया। पुतला बराबर हिल रहा है जैसे कुछ कहना चाहता हो।
चन्द्रगुप्त के पूछ्ने पर कि ये सब क्या है और इन पुतलों का मूल्य अलग अलग क्यों है, चाणक्य ने उत्तर दिया।

राजन, चरित्रवान सदा सुनी सुनाई बातों को अपने तक ही रखते हैं और उनकी पुष्टी करने के बाद ही अपना मुँह खोलते हैं। यही उनकी महानता है। पहले पुतले से हमें यही ज्ञान मिलता है और यही कारण है कि इस पुतले का मूल्य एक लाख मोहरें है।

कुछ लोग सदा अपने में ही मग्न रहते हैं। हर बात को अनसुना कर देते हैं। उन्हें अपनी वाह-वाह की कोई इच्छा नहीं होती। ऐसे लोग कभी किसी को हानि नहीं पहुँचाते। दूसरे पुतले से हमें यही ज्ञान मिलता है और यही कारण है कि इस पुतले का मूल्य एक हज़ार मोहरें है।

कुछ लोग कान के कच्चे और पेट के हलके होते हैं। कोई भी बात सुनी नहीं कि सारी दुनिया में शोर मचा दिया। इन्हें झूठ सच का कोई ज्ञान नहीं, बस मुँह खोलने से मतलब है। यही कारण है कि इस पुतले का मूल्य केवल एक मोहर है।

आप कौन से पुतले है

💐💐शिक्षा💐💐

दोस्तों, जीवन मे किसी भी बात को पहले जांच परख करने के बाद ही उस पर अपने विचार प्रकट करने चाहिए,सुनी सुनाई बातों पर कभी विश्वास नही करना चाहिए।

कहाँ छुपी हैं शक्तियां

कहाँ छुपी हैं शक्तियां

एक बार देवताओं में चर्चा हो रहो थी। चर्चा का विषय था मनुष्य कि हर मनोकामनाओं को पूरा करने वाली गुप्त चमत्कारी शक्तियों को कहाँ छुपाया जाये?
सभी देवताओं में इस पर बहुत वाद- विवाद हुआ।
एक देवता ने अपना मत रखा और कहा कि इसे हम एक जंगल की गुफा में रख देते हैं।
दूसरे देवता ने उसे टोकते हुए कहा कि, नहीं-नहीं, हम इसे पर्वत की चोटी पर छिपा देंगे।
उस देवता की बात ठीक पूरी भी नहीं हुई थी कि कोई कहने लगा, “न तो हम इसे कहीं गुफा में छिपायेंगे और न ही इसे पर्वत की चोटी पर, हम इसे समुद्र की गहराइयों में छिपा देते हैं। यही स्थान इसके लिए सबसे उपयुक्त रहेगा।”

सबकी राय खत्म हो जाने के बाद एक बुद्धिमान देवता ने कहा, क्यों न हम मानव की चमत्कारिक शक्तियों को मानव -मन की गहराइयों में छिपा दें?

चूँकि बचपन से ही मानव मन इधर -उधर दौड़ता रहता है तो मनुष्य कभी कल्पना भी नहीं कर सकेगा कि ऐसी अदभुत और विलक्षण शक्तियांँ उसके भीतर छिपी हो सकती हैं और वह इन्हें बाह्य जगत में खोजता रहेगा!

अतः इन बहुमूल्य शक्तियों को हम उसके मन की निचली तह में छिपा देंगे।

बाकी सभी देवता भी इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए और ऐसा ही किया गया। मनुष्य के भीतर ही चमत्कारी शक्तियों का भण्डार छुपा दिया गया!
इसलिए कहा भी जाता है कि, मानव मन में अद्भुत शक्तियांँ निहित हैं।

यह कहानी यही संदेश देती है कि मानव मन असीम ऊर्जा का कोष है।
इन्सान जो भी चाहे वो हासिल कर सकता है। मनुष्य के लिए कुछ भी असाध्य नहीं है।

लेकिन बड़े दुःख की बात है उसे स्वयं ही विश्वास नहीं होता कि उसके भीतर इतनी शक्तियांँ विद्यमान हैं।
इसलिय लोगों के लिय जरूरी है कि अपने अन्दर की शक्तियों को पहचानिये, उन्हें पर्वत, गुफा या समुद्र में मत ढूंँढिए बल्कि अपने अन्दर खोजिये और अपनी शक्तियों को निखारिए।

वर्तमान में, सुविख्यात शांति के संदेश को पिछले 56 साल से पूरे संसार के अन्दर फ़ैलाने वाले आदरणीय श्री प्रेम रावत जी ह्रदय स्थित उस आनन्द का व्यावहारिक बोध करा रहे हैं! उनका कहना है कि अगर मनुष्य उस दिशा में एक कदम बढ़ाये तो आज के माहोल में भी हर मनुष्य के लिय शांति सम्भव है!
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बुढ़िया का यकीन

बुढ़िया का यकीन

एक बार कैंसर के एक बहुत मशहूर डॉक्टर डॉ. तेजल को नयी दिल्ली एक अवार्ड सेरेमनी में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देने के लिए बुलाया जाता है।

इस आवर्ड को लेकर डॉ. तेजल ही नहीं पूरा झुंझुनूं शहर बहुत उत्साहित था क्योंकि डॉ. साहब न सिर्फ एक काबिल डॉक्टर थे बल्कि एक बहुत नेक दिल इंसान भी थे।

अवार्ड सेरेमनी वाले दिन वो सुबह फ्लाइट पकड़ने के लिए एअरपोर्ट पहुँचते हैं,पर कुछ टेक्निकल खराबी आ जाने के कारण वो फ्लाइट कैंसिल हो जाती है.. और दुर्भ्ग्यवाश कोई अगली फ्लाइट भी मौजूद नहीं होती है।

डॉ. तेजल सोचते हैं चलो कोई बात नहीं सेरेमनी तो शाम को है… और झुंझुनूं से दिल्ली 6-7 घंटे का ही रास्ता है तो चलो टैक्सी से निकल लेते हैं।

वे जल्द ही एक टैक्सी हायर करके दिल्ली की तरफ बढ़ने लगते हैं…आधे रास्ते तक तो सब ठीक रहता है लेकिन अचानक ही ड्राईवर कहता — “साहब! सामने देखिये… बहुत बड़ा जाम लगा हुआ है… अगर हम इस रास्ते से जाते हैं तो पहुँचने में रात लगा जायेगी! अगर आप कहें तो कोई दूसरा रास्ता ट्राई करूँ…”

डॉ तेजल पहले तो ड्राईवर को मना कर देते हैं पर जब 10-15 मिनट बाद भी गाड़ियाँ टस से मस नहीं होती हैं तो वे ड्राईवर से दूसरा रास्ता ट्राई करने को कहते हैं।

ड्राईवर अपने अंदाजे पर गाड़ी सर्विस लेन पर ले लेता है और जो पहले कट मिलता है उससे बायीं तरफ मुड़ जाता है। उबड़-खाबड़ रास्तों पर घंटे भर चलने के बाद भी कोई पक्की सड़क या रास्ता नहीं दिखाई देता।

डॉ. तेजल बिलकुल मायूस हो जाते हैं तभी उनको दूर एक झोपड़ी दिखाई देती है।

वो देखिये ड्राईवर साहब उधर एक झोपड़ी है, चलिए वहीं चल कर पता पूछते हैं।

ड्राईवर तुरंत गाड़ी रोकता है और वे दोनों उतर कर उस झोपड़ी के पास पहुँचते है।

“अरे कोई है!”, ड्राईवर जोर से पुकारता है।

झोपड़ी से एक बूढी सी औरत बाहर निकलती है।

“क्या बात है बेटा, क्यों पुकार रहे हो?”
“माता जी हम लोगों को दिल्ली जाना है पर हम रास्ता भटक कर इधर आ गए हैं क्या आप हमारी मदद कर सकती हैं?”, ड्राईवर वृद्धा से निवेदन करता है.

बिलकुल मदद करुँगी बेटा पहले आप लोग अन्दर आकर पानी तो पी लो।

वह उन दोनों के लिए पानी और कुछ गुड़ लेकर आती है।

डॉ. तेजल उस गरीब की आवभगत से खुश हो जाते हैं और पूछते हैं – “आप यहाँ अकेली रहती हैं क्या?”

नहीं-नहीं, मेरा पोता भी मेरे साथ रहता है. बिचारे के माता-पिता बचपन में ही मर गए थे तबसे मैं ही इसका ख़याल रखती हूँ… देखिये न बेचारा बिस्तर में बीमार पड़ा है…शायद ये भी अब कुछ दिनों बाद मुझे छोड़ कर चला जाएगा…।

और इतना कहते-कहते उनकी आँखों से आंसूं निकलने लगे।

डॉ. तेजल आगे बढ़ते हैं और वृद्धा को ढांढस बंधाते हुए कहते हैं, कुछ नहीं होगा इसे बताइये क्या हुआ है इस नन्हे बालक को।

इस अभागे को कैंसर है साहब…लोग कहते हैं इसका इलाज सिर्फ झुंझुनूं के डॉ. तेजल के पास है… बहुत कोशिश की, कई बार चक्कर लगाए पर डॉ. साहब से मुलाक़ात नहीं हो पायी…अब तो सब कुछ ईश्वर पर छोड़ दिया है…अगर मैंने सच्चे मन से उसे माना होगा तो एक दिन वो मेरी मदद ज़रूर करेगा।

इतना सुनते ही डॉ. तेजल का गला रुंध गया…आँखों में नमी आ गयी…वे पूरे दिन के घटनाक्रम को सोचने लगे कि कैसे बुढ़िया का यकीन हकीकत बन गया…कैसे उस ऊपर वाले ने अपने बंदे के उन्हें यहाँ भेजा!

गहरी सांस लेते हुए वे बोले, “मैं ही हूँ डॉ. तेजल आपके ईश्वर ने ही मुझे यहाँ भेजा है।चलिए मेरे साथ हम आज से ही इस बालक का इलाज शुरू करेंगे!”

फिर वे ड्राईवर से बोले, “ड्राईवर गाडी वापस ले लो!”

“ल..ल..लेकिन वो आपका लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड!”, ड्राईवर अचरज से बोला.

लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड कभी भी किसी की लाइफ से ज़रूरी नहीं हो सकता है…

जैसा मैं कहता हूँ वैसा करो” और सभी गाड़ी में बैठ कर झुंझुनूं वापस लौट गए।और बच्चे का इलाज करके उसे एक दम सही कर दिया।

आज लोगों की नज़र में भले डॉ. तेजल ने एक जीवन बचाने के लिए जीवन भर की मेहनत का अवार्ड छोड़ दिया था..पर ऐसा करके उन्हें अन्दर से जो ख़ुशी और संतोष मिला था वो ऐसे हज़ारों अवार्ड से भी बड़ा था।

💐💐शिक्षा💐💐

दोस्तों, कहते हैं ऊपर वाले के घर देर है अंधेर नहीं. यदि आप सच्चे दिल से किसी चीज में यकीन करते हैं और उसके लिए हर संभव प्रयास करते हैं तो एक न एक दिन वो आपको मिल ही जाती है.

इसलिए उस बूढी औरत की तरह दृढ विश्वास के साथ जो कुछ भी आप पाना चाहते हैं उसके लिए कर्म करिए…लेकिन फल कब कैसे कहाँ मिलेगा वो भगवान् पर छोड़ दीजिये।

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।

हमारे मन बुद्धि से परे

हमारे मन बुद्धि से परे

द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त “श्रीकृष्ण” ने अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि, हे पार्थ तराजू पर पैर संभलकर रखना, संतुलन बराबर रखना, लक्ष्य मछली की आंख पर ही केंद्रित हो उसका खास खयाल रखना।

तो अर्जुन ने कहा, “हे प्रभु”, सब कुछ अगर मुझे ही करना है, तो फिर आप क्या करोगे?

वासुदेव हंसते हुए बोले, हे पार्थ जो आप से नहीं होगा वह में करुंगा।

अर्जुन ने कहा, प्रभु ऐसा भी क्या है जो मैं नहीं कर सकता?

वासुदेव फिर हंसे और बोले, जिस अस्थिर, विचलित, हिलते हुए पानी में तुम मछली का निशाना साधोगे, उस विचलित “पानी” को मैं स्थिर रखूंगा!

कहने का तात्पर्य यह है कि –
आप चाहे
कितने ही निपुण क्यूँ ना हो!
कितने ही बुद्धिवान क्यूँ ना हो!
कितने ही महान एवं विवेकपूर्ण क्यूँ ना हो!

लेकिन आप
स्वयं हरेक परिस्थिति के उपर
पूर्ण नियंत्रण नहीँ रख सकते।

आप सिर्फ
अपना प्रयास कर सकते हो।
लेकिन
उसकी भी एक सीमा है।
और जो उस सीमा से आगे की बागडोर संभालता है!
उसी का नाम “भगवान” है!

यही सच है कि शरनागत भाव से भगवान का साक्षात्कार हो सकता है!
इसलिए
अपने मन बुद्धि का बृधा अभिमान नहीं करना चाहिए!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏