कल्पना कीजिए कि *आपके पास एक बैंक अकाउंट है और हर रोज सुबह उस बैंक अकाउंट में 86,400 रूपये जमा हो जाते है, जिसे आप उपयोग में ले सकते है! आप रूपयों को बैंक अकाउंट से निकाल कर अपनी तिजोरी में जमा करके नहीं रख सकते!*
इस बैंक अकाउंट में कैरी फोरवर्ड का सिस्टम नहीं है यानि कि *जिन रूपयों को आप उपयोग में नहीं ले पाते, वह रूपये शाम को वापस ले लिए जाते हैं और आपका अब उन पर कोई अधिकार नहीं रहता! यह बैंक अकाउंट कभी भी बंद हो सकता है!*
हो सकता है कि *कल ही यह बैंक अकाउंट बंद हो जाए या फिर 2 वर्ष बाद या फिर 50 वर्ष बाद!*
लेकिन इतना तो निश्चित है कि *यह बैंक अकाउंट एक दिन जरूर बंद होगा!*
*ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे?*
जाहिर है *आप पूरे के पूरे 86,400 रूपयों का उपयोग कर लेंगे और इन 86,400 रूपयों का उपयोग अच्छे कार्यों के लिए करेंगे!*
क्योंकि *यह बैंक अकाउंट कभी भी बंद हो सकता है!*
क्या आप जानते है कि *ऐसा ही एक बैंक अकाउंट हमारे पास होता है जिसका नाम है “जिंदगी (Life)”* और *इस “जीवन” रुपी बैंक अकाउंट में प्रतिदिन 86,400 सेकंड्स जमा होते हैं – जिनका उपयोग कैसे करना है यह हम पर निर्भर करता है हम चाहें तो इन 86,400 सेकंड्स का उपयोग बेहतरीन कार्यों के लिए कर सकते हैं और अगर ऐसा नहीं करते तो यह व्यर्थ हो जाएंगे! यह जीवन रुपी बैंक अकाउंट कभी भी बंद हो सकता है!*
इसलिए देर मत कीजिए *आपके जीवन का हर पल अमूल्य है इस समय का सदुपयोग कीजिए!*
कोई भी समझदार आदमी *जिस किसी को भी ऐसा बैंक अकाउंट दे दिया जाए जिसमें रोज 86,400 रूपये जमा हो तो वह व्यक्ति बहुत खुश हो जाएगा और एक रूपया भी व्यर्थ नहीं गवाएंगा!*
*क्या हमारे जीवन के एक सेकंड की कीमत एक रूपये से भी कम है? हम कैसे अपने जीवन की सबसे अनमोल सम्पति को ऐसे ही व्यर्थ गँवा सकते हैं?*
*खोया हुआ धन फिर कमाया जा सकता है, लेकिन खोया हुआ समय वापस नहीं आता| उसके लिए केवल पश्चाताप ही शेष रह जाता है। हर एक दिन को व्यर्थ गंवाना आत्महत्या करने के समान है! बिना समय प्रबंधन के आज तक कोई भी सफल नहीं हुआ!*
इसलिय समझदारी इसी में है कि *बीते हुए कल को भूल जाइए, बीते कल का आज कोई वजूद नहीं! आज आपका है! आज से एक नयी शुरुआत कीजिए! अपने स्वांसों को व्यर्थ मत गंवाइए!*
जिस किसी ने संतों की चेतावनी को नज़रअंदाज किया; उनके लिए सच ही कहा है कि *“जो व्यक्ति अपने समय को नष्ट कर देते है, समय उन्हें नष्ट कर देता है!!’’*
कबीर दास जी ने कहते हैं कि –
*कहता हूँ कही जात हूँ, कहूँ बजा के ढोल।*
*स्वांस जो खाली जात है, ये तीन लोक का मोल।।*
इसका लाभ कैसे लिया जा सकता है? यह मार्ग दर्शन भी संतों ने दिया है –
*स्वांस स्वांस सुमिरन करो, वृथा स्वांस मत खोय।*
*ना जाने इस स्वांस का, आवन होय न होय।।*
*🙏🏼🙏🙏🏽सुप्रभात*🙏🏻🙏🏾🙏🏿

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