गुरूपर्णिमा पर गुरु जी को भेंट🌹
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दीदार करके आप का, मन मुग्ध हो गया,
भूला हूँ इस जहान को,अपने में खो गया।
दुनियाँ जो प्यारी लगती थी, अब लगने लगा है डर।
सुख में सभी हैं साथी, दुख में न हम सफर।
कांटे पड़े थे राहों में, तुमने हटा दिया।
भूला हूँ इस जहान को अपने में खो गया।
सारे जहाँ में आप का जलवा बिखर गया,
छोटा बड़ा न आप की नजरों में रह गया।
सबको गले लगाया, जो पास आ गया।
भूला हूँ इस जहां को अपने में खो गया।
सर्वज्ञ व सर्वस्व प्रभु आप ही तो हैं,
चर व अचर के स्वामी प्रभु आप ही तो है,
जाना श्रवण ने आप को ,फिर आप का हुआ।
भूला हूँ इस जहाँ को,अपने में खो गया।
विनती प्रभु है आप से, जब छूटे तन मेरा,
कोई न याद आवे ,बस याद हो तेरा।
पल पल करूँ मैं चिन्तन,यही यत्न है किया।
भूला हूँ इस जहाँ को , अपने में खो गया।
हृदय के उद्गार
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