अच्छी शिक्षा

अच्छी शिक्षा

ब्रिटेन के स्कॉटलैंड में फ्लेमिंग नाम का एक गरीब किसान था।
एक दिन वह अपने खेत पर काम कर रहा था। अचानक पास में से किसी के चीखने की आवाज सुनाई पड़ी। किसान ने अपना साजो सामान व औजार फेंका और तेजी से आवाज की तरफ लपका।
आवाज की दिशा में जाने पर उसने देखा कि एक बच्चा दलदल में डूब रहा था। वह बालक कमर तक कीचड़ में फंसा हुआ बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा था। वह डर के मारे बुरी तरह कांप पर रहा था और चिल्ला रहा था।
किसान ने आनन-फानन में लंबी टहनी ढूंढी, और अपनी जान पर खेलकर उस टहनी के सहारे बच्चे को बाहर निकाला।
अगले दिन उस किसान की छोटी सी झोपड़ी के सामने एक शानदार गाड़ी आकर खड़ी हुई।
उसमें से कीमती वस्त्र पहने हुए एक सज्जन उतरे। उन्होंने किसान को अपना परिचय देते हुए कहा- “मैं उस बालक का पिता हूं और मेरा नाम राँडॉल्फ चर्चिल है।”
फिर उस अमीर राँडाल्फ चर्चिल ने कहा कि वह इस एहसान का बदला चुकाने आए हैं।
किसान फ्लेमिंग उन सज्जन के ऑफर को ठुकरा दिया। उसने कहा, मैंने जो कुछ किया उसके बदले में कोई पैसा नहीं लूंगा।
किसी को बचाना मेरा कर्तव्य है, मानवता है, इंसानियत है और उस मानवता इंसानियत का कोई पैसा नहीं होता।
इसी बीच फ्लेमिंग का बेटा झोपड़ी के दरवाजे पर आया।
उस अमीर सज्जन की नजर अचानक उस लड़के पर गई तो एक विचार सूझा। उसने पूछा – “क्या यह आपका बेटा है।”
किसान ने गर्व से कहा- “हां।” उस व्यक्ति ने अब नए सिरे से बात शुरू करते हुए किसान से कहा- “ठीक है अगर आपको मेरी कीमत मंजूर नहीं है तो ऐसा करते हैं कि आपके बेटे की शिक्षा का भार मैं अपने ऊपर लेता हूँ। मैं उसे उसी स्तर की शिक्षा दिलवाने की व्यवस्था करूंगा जो अपने बेटे को दिलवा रहा हूँ। फिर आपका बेटा आगे चलकर एक ऐसा इंसान बनेगा, जिस पर हम दोनों गर्व महसूस करेंगे।”
किसान ने सोचा मैं तो उच्च शिक्षा नहीं दिला पाऊंगा और ना ही सारी सुविधाएं जुटा पाऊंगा, जिससे कि यह बड़ा आदमी बन सके।

बच्चे के भविष्य की खातिर फ्लेमिंग तैयार हो गया।
अब फ्लेमिंग के बेटे को सर्वश्रेष्ठ स्कूल में पढ़ने का मौका मिला।
आगे बढ़ते हुए उसने लंदन के प्रतिष्ठित सेंट मेरीज मेडिकल स्कूल से स्नातक डिग्री हासिल किया और कालांतर, किसान का यही बेटा पूरी दुनिया में पेनिसिलिन का आविष्कारक महान वैज्ञानिक सर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग के नाम से विख्यात हुआ।
यह कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
कुछ वर्षों बाद, उस अमीर के बेटे को निमोनिया हो गया।
और उसकी जान पेनिसिलीन के इंजेक्शन से ही बची। उस अमीर राँडाल्फ चर्चिल के बेटे का नाम था- विंस्टन चर्चिल, जो दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहे।
इसलिए, व्यक्ति को हमेशा अच्छे कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि आपका किया हुआ कर्म आखिरकार लौटकर आपके ही पास आता है। यानी अच्छाई पलट-पलट कर आती रहती है।
अतः यकीन मानिए कि मानवता की दिशा में उठाया गया प्रत्येक कदम आपकी स्वयं की चिंताओं को कम करने में मील का पत्थर साबित होगा।

मगर लोग बहुत जल्दी भूल जाते हैं और महत्वाकांक्षाओं के भंवर में क्षणिक लाभ के लिए अपने पुण्य कर्मों को तिरोहित कर देते हैं। जीवन अनंत नहीं है बहुत ही अल्पकाल के हम मुसाफिर हैं। अपने संस्कारों को अपनी संस्कृति को अपने सद्कर्मों को और आप पर किए गए उपकारों को हमेशा याद रखें

सदैव प्रसन्न रहिये!!
जो प्राप्त है-पर्याप्त है!!
🙏🙏🌳🌳🙏🙏

*एक पुरानी कथा इस समय के लिए आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है*

*एक पुरानी कथा इस समय के लिए आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है*

एक राजा को राज भोगते काफी समय हो गया था । बाल भी सफ़ेद होने लगे थे । एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने गुरुदेव एवं मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया । उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया ।
…✍
राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दीं, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे उसे पुरस्कृत कर सकें । सारी रात नृत्य चलता रहा । ब्रह्म मुहूर्त की बेला आयी । नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है,वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे । तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक *दोहा* पढ़ा –
…✍
*”बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताई ।*
*एक पल के कारने, ना कलंक लग जाए ।”*
…✍
अब इस *दोहे* का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला । तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा ।
…✍
जब यह दोहा *गुरु जी* ने सुना और गुरु जी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को अर्पण कर दीं ।
…✍
दोहा सुनते ही *राजा की लड़की* ने भी अपना *नौलखा हार* नर्तकी को भेंट कर दिया ।
…✍
*दोहा* सुनते ही राजा के *पुत्र युवराज* ने भी अपना *मुकट* उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया ।

*राजा बहुत ही अचिम्भित हो गया ।*
सोचने लगा रात भर से नृत्य चल रहा है पर यह क्या! अचानक *एक दोहे* से सब अपनी मूल्यवान वस्तु बहुत ही ख़ुश हो कर नर्तिकी को समर्पित कर रहें हैं ,
*राजा* सिंहासन से उठा और नर्तकी को बोला *एक दोहे* द्वारा एक सामान्य नर्तिका होकर तुमने सबको लूट लिया ।”*

…✍
जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए और गुरु जी कहने लगे – “राजा ! इसको *नीच नर्तिकी मत कह, ये अब मेरी गुरु बन गयी है क्योंकि इसने दोहे से मेरी आँखें खोल दी हैं* । दोहे से यह कह रही है कि *मैं सारी उम्र जंगलों में भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ,* भाई ! मैं तो चला ।” यह कहकर गुरु जी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े ।
…✍
*राजा की लड़की* ने कहा – “पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ । आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरी शादी नहीं कर रहे थे और आज रात मैंने आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद कर लेना था । लेकिन इस *नर्तकी के दोहे ने मुझे सुमति दी है कि जल्दबाजी मत कर कभी तो तेरी शादी होगी ही । क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?”*
…✍
*युवराज ने कहा -* “पिता जी ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे । मैंने आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपका कत्ल करवा देना था । लेकिन इस *नर्तकी के दोहे ने समझाया कि पगले ! आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है । धैर्य रख ।”*
…✍
जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया । राजा के मन में वैराग्य आ गया । राजा ने तुरन्त फैंसला लिया – “क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ ।” फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा – “पुत्री ! दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं । तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो ।” राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया ।
…✍
*यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा -* “मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?” उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना बुरा नृत्य बन्द करती हूँ और कहा कि “हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना । बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी ।”

*Same implements on us at this lockdown*
*”बहु बीती, थोड़ी रही, पल पल गयी बिताई ।*
*एक पल के कारने, ना कलंक लग जाए ।”*
आज हम इस दोहे को यदि हम कोरोना को लेकर अपनी समीक्षा करके देखे तो हमने पिछले 22 तारीख से जो संयम बरता, परेशानियां झेली ऐसा न हो हमारी कि अंतिम क्षण में एक छोटी सी भूल,हमारी लापरवाही,हमारे साथ पूरे समाज को न ले बैठे।
आओ हम सब मिलकर कोरोना से संघर्ष करे , *घर पर रह सुरक्षित रहे व सावधानियों का विशेष ध्यान रखें।
**🙏🙏🙏**

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं –

पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं –
1. युधिष्ठिर 2. भीम 3. अर्जुन
4. नकुल। 5. सहदेव

( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )

यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।

वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र…..
कौरव कहलाए जिनके नाम हैं –
1. दुर्योधन 2. दुःशासन 3. दुःसह
4. दुःशल 5. जलसंघ 6. सम
7. सह 8. विंद 9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष 11. सुबाहु। 12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण। 14. दुर्मुख 15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण 17. शल 18. सत्वान
19. सुलोचन 20. चित्र 21. उपचित्र
22. चित्राक्ष 23. चारुचित्र 24. शरासन
25. दुर्मद। 26. दुर्विगाह 27. विवित्सु
28. विकटानन्द 29. ऊर्णनाभ 30. सुनाभ
31. नन्द। 32. उपनन्द 33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा 35. सुवर्मा 36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु 38. महाबाहु 39. चित्रांग 40. चित्रकुण्डल41. भीमवेग 42. भीमबल
43. बालाकि 44. बलवर्धन 45. उग्रायुध
46. सुषेण 47. कुण्डधर 48. महोदर
49. चित्रायुध 50. निषंगी 51. पाशी
52. वृन्दारक 53. दृढ़वर्मा 54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति 56. अनूदर 57. दढ़संघ 58. जरासंघ 59. सत्यसंघ 60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा 62. उग्रसेन 63. सेनानी
64. दुष्पराजय 65. अपराजित
66. कुण्डशायी 67. विशालाक्ष
68. दुराधर 69. दृढ़हस्त 70. सुहस्त
71. वातवेग 72. सुवर्च 73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी 75. नागदत्त 76. उग्रशायी
77. कवचि 78. क्रथन। 79. कुण्डी
80. भीमविक्र 81. धनुर्धर 82. वीरबाहु
83. अलोलुप 84. अभय 85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय 87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी। 89. विरवि
90. चित्रकुण्डल 91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि 93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान 95. दीर्घबाहु
96. सुजात। 97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी 99. विरज
100. युयुत्सु

( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहनभी थी… जिसका नाम””दुशाला””था,
जिसका विवाह”जयद्रथ”सेहुआ था )

“श्री मद्-भगवत गीता”के बारे में-

ॐ . किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।

ॐ . कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।

ॐ. भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।

ॐ. कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी

ॐ. कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।

ॐ. कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में

ॐ. क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।

ॐ. कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय

ॐ. कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक

ॐ. गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।

ॐ. गीता को अर्जुन के अलावा
और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने

ॐ. अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को

ॐ. गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में

ॐ. गीता किस महाग्रंथ का भाग है….?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।

ॐ. गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद

ॐ. गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना

ॐ. गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण जी ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.

अपनी युवा-पीढ़ी को गीता जी के बारे में जानकारी पहुचाने हेतु इसे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे। धन्यवाद

अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है।

33 करोड नहीँ 33 कोटी देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ।

कोटि = प्रकार।
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है,

कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता।

हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता हैं…

कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मे :-

12 प्रकार हैँ
आदित्य , धाता, मित, आर्यमा,
शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष,
सविता, तवास्था, और विष्णु…!

8 प्रकार हे :-
वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।

11 प्रकार है :-
रुद्र: ,हर,बहुरुप, त्रयँबक,
अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी,
रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।

एवँ
दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।

कुल :- 12+8+11+2=33 कोटी

अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं। ।

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

१ हिन्दु हाेने के नाते जानना ज़रूरी है

THIS IS VERY GOOD INFORMATION FOR ALL OF US … जय श्रीकृष्ण …

अब आपकी बारी है कि इस जानकारी
को आगे बढ़ाएँ ……

अपनी भारत की संस्कृति
को पहचाने.
ज्यादा से ज्यादा
लोगो तक पहुचाये.
खासकर अपने बच्चो को बताए
क्योकि ये बात उन्हें कोई नहीं बताएगा…

📜😇 दो पक्ष-

कृष्ण पक्ष ,
शुक्ल पक्ष !

📜😇 तीन ऋण –

देव ऋण ,
पितृ ऋण ,
ऋषि ऋण !

📜😇 चार युग –

सतयुग ,
त्रेतायुग ,
द्वापरयुग ,
कलियुग !

📜😇 चार धाम –

द्वारिका ,
बद्रीनाथ ,
जगन्नाथ पुरी ,
रामेश्वरम धाम !

📜😇 चारपीठ –

शारदा पीठ ( द्वारिका )
ज्योतिष पीठ ( जोशीमठ बद्रिधाम )
गोवर्धन पीठ ( जगन्नाथपुरी ) ,
शृंगेरीपीठ !

📜😇 चार वेद-

ऋग्वेद ,
अथर्वेद ,
यजुर्वेद ,
सामवेद !

📜😇 चार आश्रम –

ब्रह्मचर्य ,
गृहस्थ ,
वानप्रस्थ ,
संन्यास !

📜😇 चार अंतःकरण –

मन ,
बुद्धि ,
चित्त ,
अहंकार !

📜😇 पञ्च गव्य –

गाय का घी ,
दूध ,
दही ,
गोमूत्र ,
गोबर !

📜😇 पञ्च देव –

गणेश ,
विष्णु ,
शिव ,
देवी ,
सूर्य !

📜😇 पंच तत्त्व –

पृथ्वी ,
जल ,
अग्नि ,
वायु ,
आकाश !

📜😇 छह दर्शन –

वैशेषिक ,
न्याय ,
सांख्य ,
योग ,
पूर्व मिसांसा ,
दक्षिण मिसांसा !

📜😇 सप्त ऋषि –

विश्वामित्र ,
जमदाग्नि ,
भरद्वाज ,
गौतम ,
अत्री ,
वशिष्ठ और कश्यप!

📜😇 सप्त पुरी –

अयोध्या पुरी ,
मथुरा पुरी ,
माया पुरी ( हरिद्वार ) ,
काशी ,
कांची
( शिन कांची – विष्णु कांची ) ,
अवंतिका और
द्वारिका पुरी !

📜😊 आठ योग –

यम ,
नियम ,
आसन ,
प्राणायाम ,
प्रत्याहार ,
धारणा ,
ध्यान एवं
समाधि !

📜😇 आठ लक्ष्मी –

आग्घ ,
विद्या ,
सौभाग्य ,
अमृत ,
काम ,
सत्य ,
भोग ,एवं
योग लक्ष्मी !

📜😇 नव दुर्गा —

शैल पुत्री ,
ब्रह्मचारिणी ,
चंद्रघंटा ,
कुष्मांडा ,
स्कंदमाता ,
कात्यायिनी ,
कालरात्रि ,
महागौरी एवं
सिद्धिदात्री !

📜😇 दस दिशाएं –

पूर्व ,
पश्चिम ,
उत्तर ,
दक्षिण ,
ईशान ,
नैऋत्य ,
वायव्य ,
अग्नि
आकाश एवं
पाताल !

📜😇 मुख्य ११ अवतार –

मत्स्य ,
कच्छप ,
वराह ,
नरसिंह ,
वामन ,
परशुराम ,
श्री राम ,
कृष्ण ,
बलराम ,
बुद्ध ,
एवं कल्कि !

📜😇 बारह मास –

चैत्र ,
वैशाख ,
ज्येष्ठ ,
अषाढ ,
श्रावण ,
भाद्रपद ,
अश्विन ,
कार्तिक ,
मार्गशीर्ष ,
पौष ,
माघ ,
फागुन !

📜😇 बारह राशी –

मेष ,
वृषभ ,
मिथुन ,
कर्क ,
सिंह ,
कन्या ,
तुला ,
वृश्चिक ,
धनु ,
मकर ,
कुंभ ,
मीन!

📜😇 बारह ज्योतिर्लिंग –

सोमनाथ ,
मल्लिकार्जुन ,
महाकाल ,
ओमकारेश्वर ,
बैजनाथ ,
रामेश्वरम ,
विश्वनाथ ,
त्र्यंबकेश्वर ,
केदारनाथ ,
घुष्नेश्वर ,
भीमाशंकर ,
नागेश्वर !

📜😇 पंद्रह तिथियाँ –

प्रतिपदा ,
द्वितीय ,
तृतीय ,
चतुर्थी ,
पंचमी ,
षष्ठी ,
सप्तमी ,
अष्टमी ,
नवमी ,
दशमी ,
एकादशी ,
द्वादशी ,
त्रयोदशी ,
चतुर्दशी ,
पूर्णिमा ,
अमावास्या !

📜😇 स्मृतियां –

मनु ,
विष्णु ,
अत्री ,
हारीत ,
याज्ञवल्क्य ,
उशना ,
अंगीरा ,
यम ,
आपस्तम्ब ,
सर्वत ,
कात्यायन ,
ब्रहस्पति ,
पराशर ,
व्यास ,
शांख्य ,
लिखित ,
दक्ष ,
शातातप ,
वशिष्ठ !

॥ हरे कृष्णा हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥
॥ हरे राम हरे राम
॥ राम राम हरे हरे ॥

एक बार कक्षा छठवीं में चार बालकों को परीक्षा मे समान अंक मिले,

एक बार कक्षा छठवीं में चार बालकों को परीक्षा मे समान अंक मिले,

अब प्रश्न खडा हुआ कि किसे प्रथम रैंक दिया जाये ।

स्कूल प्रबन्धन ने तय किया कि प्राचार्य चारों से एक सवाल पूछेंगे,

जो बच्चा उसका सबसे सटीक जवाब देगा उसे प्रथम घोषित किया जायेगा ।

चारों बच्चे हाजिर हुए, प्राचार्य ने सवाल पूछा –

दुनिया में सबसे तेज क्या होता है ?

पहले बच्चे ने कहा,

मुझे लगता है -“विचार”सबसे तेज होता है,

क्योंकि दिमाग में कोई भी विचार तेजी से आता है, इससे तेज कोई नहीं ।

प्राचार्य ने कहा – ठीक है, बिलकुल सही जवाब है ।

दूसरे बच्चे ने कहा, मुझे लगता है –

“पलक झपकना” सबसे तेज होता है, हमें पता भी नहीं चलता और पलकें झपक जाती हैं और अक्सर कहा जाता है,”पलक झपकते”कार्य हो गया ।

प्राचार्य बोले – बहुत खूब, बच्चे दिमाग लगा रहे हैं ।

तीसरे बच्चे ने कहा –

“बिजली”, क्योंकि मेरे यहाँ गैरेज, जो कि सौ फ़ुट दूर है, में जब बत्ती जलानी होती है, हम घर में एक बटन दबाते हैं, और तत्काल वहाँ रोशनी हो जाती है,तो मुझे लगता है बिजली सबसे तेज होती है..

अब बारी आई चौथे बच्चे की । सभी लोग ध्यान से सुन रहे थे,

क्योंकि लगभग सभी तेज बातों का उल्लेख तीनो बच्चे पहले ही कर चुके थे ।

चौथे बच्चे ने कहा – सबसे तेज होते हैं “दस्त”…

सभी चौंके

प्राचार्य ने कहा – साबित करो कैसे ?

बच्चा बोला :-

कल मुझे दस्त हो गए थे, रात के दो बजे की बात है,

जब तक कि मैं कुछ ” विचार ” कर पाता,

या “पलक झपकाता” या कि “बिजली” का स्विच दबाता

दस्त अपना “काम” कर चुका था ।

टीचर ने अपनी पीएचडी की डिग्री फाड़ दी है ।

इस असाधारण सोच वाले बालक को ही प्रथम घोषित किया गया।

The Crows in The Kingdom (Akbar and Birbal)

The Crows in The Kingdom (Akbar and Birbal)

On one fine sunny day, Akbar and Birbal were taking a leisurely walk in the palace gardens. Suddenly, Akbar thought of testing Birbal’s wits by asking him a tricky question. Emperor asked Birbal, “How many crows are there in our kingdom?” Birbal could sense the amusement in the king’s voice, and within a few minutes Birbal replied, “My king, there are eighty thousand nine hundred and seventy-one crows in our kingdom”. Surprised and amazed, Akbar further tested Birbal, “What if we have more crows?” Birbal replied, “Oh, then the crows from the other kingdoms must be visiting us’’. “ What if there are lesser crows?” asked Akbar. “Well, then some of our crows must be visiting other kingdoms”, replied Birbal with a grin on his face. Akbar smiled at Birbal’s great sense of humour and wit.

Birbal’s Khichadi (Akbar and Birbal)

Birbal’s Khichadi (Akbar and Birbal)

Once on a cold winter day, Akbar and Birbal were walking by a lake. Akbar stopped and put his finger into the freezing water and immediately took it out saying, “I don’t think anyone can sustain a night in this cold water”. Birbal took that as a challenge and said that he would find someone who can do it. Akbar promised a sum of 1000 gold coins to whoever could spend a night standing in the cold water of the lake. Soon, Birbal found a poor man who agreed to undertake the challenge for the 1000 gold coins. Guarded by two royal guards, the poor man spent the entire night standing in the freezing water. In the morning, the poor man was taken to court for the reward. On being asked by the king how he could stand in freezing water, the man replied, “My lord, I kept looking at a lamp that was burning at a distance, and spent my entire night looking at it”. On learning this, the emperor said, “This man is not worthy of the reward as he could manage to stand in the lake because he was getting warmth from the lamp”. The poor man felt doomed and heart-broken. He reached out to Birbal for help. Birbal didn’t go to the court the next day. Akbar visited Birbal to find the reason. To his amusement, the King found Birbal sitting beside the fire with a pot hanging almost 6 feet above it. On being enquired, Birbal said, “I am cooking khichadi, my lord”. Akbar started laughing and said that was impossible. Birbal said, “It is possible my King. If a poor man can stay warm by simply looking at the lamp burning at a distance, I can cook this khichadi the same way.” Akbar understood Birbal’s point and rewarded the poor man for completing the challenge.

Moral:
Hope can inspire people to work hard.

The Foolish Thief (Akbar and Birbal)

The Foolish Thief (Akbar and Birbal)

Once upon a time, a rich merchant was robbed in King Akbar’s kingdom. The grief-stricken merchant went to the court and asked for help. Akbar asked Birbal to help the merchant find the robber. The merchant told Birbal that he was suspicious of one of his servants. On getting the hint from the merchant, Birbal summoned all the servants and told them to stand in a straight line. When asked about the robbery, everyone denied doing it, as expected. Birbal then handed over one stick of the same length, to each one of them. While dispersing, Birbal said, “By tomorrow, the robber’s stick will increase by two inches”. The next day when Birbal summoned everyone and inspected their sticks, one servant’s stick was shorter by two inches. On being asked by the merchant about the mystery of finding the real thief, Birbal said, “It was simple: the thief had cut his stick by two inches, fearing that it would increase in size”.

Moral
Truth always prevails.

Wise Birbal (Akbar and Birbal)

Wise Birbal (Akbar and Birbal)

Once upon a time, King Akbar lost a ring that was very precious to him. This ring was a gift from his father and losing it made the king very sad. Akbar summoned Birbal and requested him to find the ring. The court was full of courtiers. Birbal announced, “My great king, the ring is right here in the courtroom, and the one who has the ring has a straw stuck in his beard.” Everyone started looking at each other, and one of the courtiers started touching his beard to find the straw. Birbal called the guards and asked them to search the suspect. On searching the suspect, the ring was retrieved. Akbar was amazed at how Birbal managed to find the ring. Birbal said, “My King, the one who is guilty will always feel scared”.

Moral :
The guilty conscience needs no accusation.

लॉकडाउन और नारी की भूमिका

लॉकडाउन और नारी की भूमिका

दूध लाना था !
मैंने कहा ATM से
पैसे निकाल कर
लाता हूँ।
इतना सुनते ही
एक आवाज आई!
रुक जाओ।
500 का नोट देते हुए बोली….
ये मेरे हैं, बस इतने ही हैं
इसे ले जाओ।
पर ATM मत जाओ बहुतों ने उसकी बटन दबाई होगी
तुम बचो….

दूसरे दिन फिर कुछ जरूरत आन पड़ी
फिर 2000 का नोट देते हुए बोली….
ये मेरे हैं बस इतने ही हैं
ATM मत जाना….

लॉक डाउन के शुरुआत से
यह क्रम रोज चल रहा
रोज नई पोटली खुल रही
ATM जाने से रोक रही है
सामान बाहर ही धरवा रही
बाहर ही नहलवा रही है
जाने कौन से खजाने से पैसे निकाले जा रही है
पैसे मेरे हैं, इतने ही हैं कहकर
मुझे देते जा रही है

भारत की बेटी
भारत के संस्कार
आज समझ आया
घर खर्च में से पैसे को बचा कर जिस तिजोरी में धरती रही
वो तिजोरी
आज काम आ रही है..

जो हर घर में लापरवाहों को
भीड़ में जाने से बचा रही है।
इस भूमिका को पूरे देश में
माँ/पत्नी/भाभी/बहन
बखूबी निभा रही हैं..

कोई बालकनी में खड़ा है!
कोई TV वाले कमरे में पड़ा है!
कोई अपने मोबाइल में व्यस्त है!
थोड़ी थोड़ी देर में हर कोई अपनी जगह बदल रहा है!!
लेकिन एक शक्स है जिसकी, जगह नहीं बदलती है!
वो रसोई से बार बार आवाज दे रही है क्या बनाना है?
क्या खाओगे? मीठा या तीखा?

शायद आज उनकी वजह से ही
Lockdown सफल हो रहा है!!

सभी महिलाओं/मातृ शक्ति को समर्पित
👣👣👣👣
💐💐💐💐

एक प्रसंग जिंदगी का :-

 एक प्रसंग जिंदगी का :-

एक 6 साल का छोटा सा बच्चा अक्सर परमात्मा से मिलने की जिद किया करता था। उसकी चाहत थी की एक समय की रोटी वो परमात्मा के साथ खाये।

1 दिन उसने 1 थैले में 5, 6 रोटियां रखीं और परमात्मा को ढूंढने निकल पड़ा।
चलते चलते वो बहुत दूर निकल आया संध्या का समय हो गया।

उसने देखा नदी के तट पर 1 बुजुर्ग बूढ़ा बैठा हैं, और ऐसा लग रहा था जैसे उसी के इन्तजार में वहां बैठा उसका रास्ता देख रहा हों।

वो 6 साल का मासूम बालक,बुजुर्ग बूढ़े के पास जा कर बैठ गया,।अपने थैले में से रोटी निकाली और खाने लग गया।और उसने अपना रोटी वाला हाँथ बूढे की ओर बढ़ाया और मुस्कुरा के देखने लगा,बूढे ने रोटी ले ली,। बूढ़े के झुर्रियों वाले चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी आ गई आँखों में ख़ुशी के आंसू भी थे,,,,

बच्चा बुढ़े को देखे जा रहा था, जब बुढ़े ने रोटी खा ली बच्चे ने एक और रोटी बूढ़े को दी।

बूढ़ा अब बहुत खुश था। बच्चा भी बहुत खुश था। दोनों ने आपस में बहुत प्यार और स्नेह केे पल बिताये।
जब रात घिरने लगी तो बच्चा इजाज़त ले घर की ओर चलने लगा।

वो बार बार पीछे मुड़ कर देखता , तो पाता बुजुर्ग बूढ़ा उसी की ओर देख रहा था।
बच्चा घर पहुंचा तो माँ ने अपने बेटे को आया देख जोर से गले से लगा लिया और चूमने लगी,बच्चा बहूत खुश था।

माँ ने अपने बच्चे को इतना खुश पहली बार देखा तो ख़ुशी का कारण पूछा, तो बच्चे ने बताया !
माँ,….आज मैंने परमात्मा के सांथ बैठ कर रोटी खाई,आपको पता है उन्होंने भी मेरी रोटी खाई,,,माँ परमात्मा् बहुत बूढ़े हो गये हैं,,,मैं आज बहुत खुश हूँ माँ

उस तरफ बुजुर्ग बूढ़ा भी जब अपने गाँव पहूँचा तो गाव वालों ने देखा बूढ़ा बहुत खुश हैं,तो किसी ने उनके इतने खुश होने का कारण पूछा????
बूढ़ा बोलां,,,,मैं 2 दिन से नदी के तट पर अकेला भूखा बैठा था,,मुझे पता था परमात्मा आएंगे और मुझे खाना खिलाएंगे।

आज भगवान् आए थे, उन्होंने मेरे साथ बैठ कर रोटी खाई मुझे भी बहुत प्यार से खिलाई,बहुत प्यार से मेरी और देखते थे, जाते समय मुझे गले भी लगाया,,परमात्मा बहुत ही मासूम हैं बच्चे की तरह दिखते हैं।

✔ एक सीख:- –

इस कहानी का अर्थ बहुत गहराई वाला है। असल में बात सिर्फ इतनी है की दोनों के दिलों में परमात्मा के लिए प्यार बहुत सच्चा है। और परमात्मा ने दोनों को,दोनों के लिये, दोनों में ही (परमात्मा) खुद को भेज दिया। *जब मन परमात्मा भक्ति में रम जाता है तो हमे हर एक में वो ही नजर आने लग जाते है।