जब से मिले मेरे सतगुरु जी।
जाग उठी तकदीर मेरी ॥
दिल के अंदर नाम तेरा।
होंठों पर पैगाम तेरा।
आँखों में तसवीर तेरी ॥
तू सारे जग का पालक है।
तू मेरे मन का मालिक है।।
सच कहंदी है जमीर मेरी ॥
अब दुनिया से मुख मोड़ लिया।
तेरे चरणों में चित्त जोड़ दिया ॥
सब हो गई दूर पीर मेरी ॥
तू ही सुंदर श्याम पियारा है।
हंस ही जीवन उजियारा है॥
सब कर दी माफ तक़सीर मेरी ॥







