गुरुदेव मुझको, तू देना सहारा।
कहीं छूट जाये न दामन तुम्हारा ॥
तेरे प्रेम से ये, छुड़ाती है दुनिया।
इशारे से मुझको, बुलाती है दुनिया ॥
नहीं देखूं दुनिया का, झूठा पसारा ॥
सिवा तेरे दिल में, समाये न कोई।
लगी लौ का दीपक, बुझाये न कोई ॥
तुम्हीं मेरे दीपक, तुम्हीं हो उजाला ॥
स्वारथ की दुनिया में, कोई न हमारा।
बता दो प्रभु तुम बिन, कौन है सहारा ॥
तुम्हीं मेरी नैया, तुम्हीं हो किनारा ॥
बराबर न तेरे, कहीं और दूजा।
तुम्हीं देव मेरे, करूं जिसकी पूजा ॥
तुम्हीं पर है सर्वस्व, हमने ये वारा ॥
निराशा सभी, सामने आ खड़ी है।
प्रभु हंस दासी, शरण आ पड़ी है ॥
लगा लो चरण जीव, हूं मैं तुम्हारा ॥







