दुनिया में चार दिन के, जिंदगी के खेल बा, झमेल कौने काम के।
जाये के अकेल बा, झमेल कौने काम के ॥
महल अटारी सब छुटि जाई पगला। तन से पंछी उड़ि जाई पगला ॥
हम-हम करेल विचार तोहार फेल बा,
झमेल कौना काम के ॥ जाये के अकेल बा
दुनिया में आई के तू दुनिया बसा ले।
बिगड़ल बतिया तूं अब से सुधार ले ॥
ना जाने दियरा में तोहरा केतना तेल बा,
झमेल कौना काम के ॥ जाये के अकेल बा
अपना के सपना तू मन में विचार ले।
घर के न घाट के, न कतहूं के भईले ॥
छूटि जाई गाड़ी तूफान मेल रेल बा,
झमेल कौना काम के ॥ जाये के अकेल बा
जान परतीत प्रीत कर ले तू संत से।
भक्ति के मर्म इहे जान लेहु संत से ॥
मोर तोर बावरा बेकार के दलेल बा,
झमेल कौने काम के ॥ जाये के अकेल बा …







