सतगुरु आये री सजनियां, मोरे अंगना ॥
उड़े बदरवा कभी-कभी, बिजली अरू तारे चमकें।
सूरज, चांद, मणी और मोती, रंग-बिरंगे दमकें ॥
जगमग ज्योति की जगनियां, मोरे अंगना ॥
कभी अंधेरा, कभी उजाला, कभी दर्श दिखलाये ।
रूप तेरा इस जग में आला, भक्तों के मन भाये ॥
प्यारी बाजे तेरी बंसुरिया, मोरे अंगना ॥
सतगुरु संत शरण में आके, भाग्य हमारे जागे।
प्रेम मनोहर छवि देख के, सब नर-नारी जागे ॥
मानो-मानों जी बचनियां, मोरे अंगना ॥







