भजन बिना नादान, उमर खो दई सारी ॥
भजन किया नहीं, राम नाम का ॥
दास बना रहा, सदा काम का।
रे मूरख अज्ञान, उमर खो दई सारी ॥
कबहूं न संत शरण में आया।
ना कबहूं हरि का गुण गाया ।।
नाम धरा इंसान, उमर खो दई सारी ॥
दासानुदास मुश्किल अटकेगी।
जब यम की तेगा खटकेगी ॥
कर उस दिन का सामान, उमर खो दई सारी ॥







