Category: Stories

  • जाको राखे साँईयां, मार सके न कोई।
    बाल ना बाँका करि सकें,जो जग बैरी होई।।

    संसार के सारे रिश्ते झूठे हैं,केवल आत्मा का रिश्ता सच्चा है!एक राजा था! उसके कोई पुत्र नहीं था।राजा बहुत दिनों से पुत्र की प्राप्ति के लिए आशा लगाए बैठा था! लेकिन पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई! उसके सलाहकारों ने तान्त्रिकों से सहयोग लेने को कहा।तान्त्रिकों की तरफ से राजा को सुझाव मिला कि यदि किसी…

  • प्रेम रावत – जो व्यक्ति शान्ति को अपने जीवन में साक्षात रूप में लाना चाहता है, उनका मैं मार्गदर्शन कर सकता हूँ

    इस जीवन की पुस्तक में जो कुछ भी लिखा है-अगर उसे पढ़ना है तो बड़े ध्यान से पढ़ना चाहिए। क्योंकिइसमें जो लिखा है-वह दुःख के लिए नहीं, बल्कि सुख पाने के लिए लिखा है। उस परम आनंद,परम शांति के लिए लिखा है,जो पहले से तुम्हारे अन्दर मौजूद है!पर तुम उससे अनभिज्ञ हो। अगरइस पुस्तक को…

  • चश्मा और एक गाँव वाला

    चश्मा और एक गाँव वाला एक ग्रामीण था। वह अनपढ़ था। वह पढ़ना-लिखना नहीं जानता था। उन्होंने अक्सर लोगों को किताबें या पेपर पढ़ने के लिए चश्मा पहना हुआ देखा था। उसने सोचा, अगर मेरे पास चश्मा हो, तो मैं भी इन लोगों की तरह पढ़ सकता हूँ। मुझे शहर जाना चाहिए और अपने लिए…

  • लालच का फल

    लालच का फल किसी गांव में एक गड़रिया रहता था। वह लालची स्वभाव का था, हमेशा यही सोचा करता था कि किस प्रकार वह गांव में सबसे अमीर हो जाये। उसके पास कुछ बकरियां और उनके बच्चे थे। जो उसकी जीविका के साधन थे। एक बार वह गांव से दूर जंगल के पास पहाड़ी पर…

  • परीक्षा

    परीक्षा ”पापा वैभव बहुत अच्छा है। मैं उससे ही शादी करूंगी,वरना !! ‘पापा ने बेटी के ये शब्द सुनकर एक घडी को तो सन्न रह गए।फिर सामान्य होते हुए बोले, ठीक है पर पहले मैंतुम्हारे साथ मिलकर उसकी परीक्षा लेना चाहता हूँ।तभी होगा तुम्हारा विवाह वैभव से,कहो मंज़ूर है ? ‘बेटी चहकते हुए बोली, -”हाँ…

  • जितनी अधिक इच्छा, उतनी ही अधिक मन में अशान्ति….

    जितनी अधिक इच्छा, उतनी ही अधिक मन में अशान्ति…. हमेशा याद रहे,चाहे कितना भी धन इकट्ठा कमा करके रख लो, दरिद्रता नहीं मिटती और चाहे कितने ही बड़े पदों पर पहुंँच जाओ, हीन भाव नष्ट नहीं होता।इसलिए कि दरिद्रता भीतर है और धन बाहर है। हीन भाव भीतर है और पद बाहर है। दोनों का…

  • धैर्य

    धैर्य एक बार एक व्यक्ति अकेला उदास बैठा कुछ सोच रहा था कि उसके पास भगवान आये और भगवान को अपने समक्ष देख उस व्यक्ति ने पूछा, मुझे ज़िन्दगी में बहुत असफलताएं मिली! अब मैं निराश हो चूका हूँ! हे भगवन, मुझे बताओ कि मेरे इस जीवन की क्या कीमत है? भगवान ने उस व्यक्ति…

  • कर्मों का खेल

    कंस को मारने के बाद भगवान श्रीकृष्ण कारागृह में गए और वहां से माता देवकी तथा पिता वसुदेव को छुड़ाया। तब माता देवकी ने श्रीकृष्ण से पूछा, “बेटा, तुम तो भगवान हो, तुम्हारे पास असीम शक्ति है, फिर तुमने चौदह साल तक कंस को मारने और हमें यहां से छुड़ाने की प्रतीक्षा क्यों की?” भगवान…

  • एक कौवा और गरुड़

    एक कौवा और गरुड़एक बार एक कौआ मांस के एक टुकड़े को पकड़कर कहीं एकांत में बैठने और उसे खाने के लिए उड़ रहा था। ईगल्स का एक झुंड उसका पीछा कर रहा था। कौवा चिन्तित था और ऊँची और ऊँची उड़ान भर रहा था, फिर भी चील गरीब कौवे के पीछे थी। तभी “गरुड़”…

  • मनुष्य के बार-बार जन्म-मरण का क्या कारण है?

    मनुष्य के बार-बार जन्म-मरण का क्या कारण है?एक बार द्वारकानाथ श्रीकृष्ण अपने महल में दातुन कर रहे थे। रुक्मिणी जी स्वयं अपने हाथों में जल लिए उनकी सेवा में खड़ी थीं। अचानक द्वारकानाथ हंसने लगे। रुक्मिणी जी ने सोचा कि शायद मेरी सेवा में कोई गलती हो गई है; इसलिए द्वारकानाथ हंस रहे हैं। रुक्मिणी…