December 6, 2022 in Stories
सचमुच संचयात्मक सोच ही संशय और लोभ की जननी है!
एक बहुत धनी व्यापारी था। उसने बहुत धन संपत्ति इकट्ठा कर रखी थी। उसका एक नौकर था संभु। जो अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा गरीबों की मदद में खर्च कर देता था। व्यापारी रोज उसे धन बचाने की शिक्षा देता। लेकिन संभु पर कोई असर नहीं होता था। इससे तंग आकर एक दिन व्यापारी […]






