Category: Stories
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तीन पुतले
तीन पुतले महाराजा चन्द्रगुप्त का दरबार लगा हुआ था। सभी सभासद अपनी अपनी जगह पर विराजमान थे। महामन्त्री चाणक्य दरबार की कार्यवाही कर रहे थे। महाराजा चन्द्र्गुप्त को खिलौनों का बहुत शौक था। उन्हें हर रोज़ एक नया खिलौना चाहिए था। आज भी महाराजा के पूछने पर कि क्या नया है; पता चला कि एक…
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कहाँ छुपी हैं शक्तियां
कहाँ छुपी हैं शक्तियां एक बार देवताओं में चर्चा हो रहो थी। चर्चा का विषय था मनुष्य कि हर मनोकामनाओं को पूरा करने वाली गुप्त चमत्कारी शक्तियों को कहाँ छुपाया जाये?सभी देवताओं में इस पर बहुत वाद- विवाद हुआ।एक देवता ने अपना मत रखा और कहा कि इसे हम एक जंगल की गुफा में रख…
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बुढ़िया का यकीन
बुढ़िया का यकीन एक बार कैंसर के एक बहुत मशहूर डॉक्टर डॉ. तेजल को नयी दिल्ली एक अवार्ड सेरेमनी में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड देने के लिए बुलाया जाता है। इस आवर्ड को लेकर डॉ. तेजल ही नहीं पूरा झुंझुनूं शहर बहुत उत्साहित था क्योंकि डॉ. साहब न सिर्फ एक काबिल डॉक्टर थे बल्कि एक…
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हमारे मन बुद्धि से परे
हमारे मन बुद्धि से परे द्रौपदी के स्वयंवर में जाते वक्त “श्रीकृष्ण” ने अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि, हे पार्थ तराजू पर पैर संभलकर रखना, संतुलन बराबर रखना, लक्ष्य मछली की आंख पर ही केंद्रित हो उसका खास खयाल रखना। तो अर्जुन ने कहा, “हे प्रभु”, सब कुछ अगर मुझे ही करना है,…
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ईर्ष्या, निंदा, घृणा, धोखा से मुक्त मन
श्री हंस जी महाराज जी की अनमोल सीख! लोग निन्दा करें तो करने दो बल्कि सब लोगों को अपनी तरफ से छुट्टी दे दो!वे चाहे निन्दा करें, चाहे प्रशंँसा करें! जिसमें लोग राजी हों – करें। आप सबको छुट्टी दे दो तो आप स्वतः ही मुक्त हो जाओगे। प्रशंसा में तो मनुष्य फँस जाता है,…
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समय के सद्गुरु की उस अहेतुकी दया को हमेशा याद रखें!
समय के सद्गुरु की उस अहेतुकी दया को हमेशा याद रखें! एक दिन एक राजा ने राजपंडित को बुलाया और उसे बहुत सख्ती से आदेश दिया कि , “राजा परीक्षित ने सुखदेव से भगवत गीता सुनकर मोक्ष प्राप्त किया था। उन्हें केवल सात दिन लगे। मैं आपको सभी बंधनों से मुझे मुक्त कराने के लिए…
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दौड़ रहा दिन रात सदा,जग के सब काज विहारन में!
एक दिन एक राजा ने राजपंडित को बुलाया और उसे बहुत सख्ती से आदेश दिया, “राजा परीक्षित ने सुखदेव से भगवत गीता सुनकर मोक्ष प्राप्त किया था। उन्हें केवल सात दिन लगे। मैं आपको सभी बंधनों से मुझे मुक्त कराने के लिए एक महीने का समय दे रहा हूँ ताकि मैं मोक्ष प्राप्त कर सकूँ।…
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गलत व अभोज्य वस्तुओं के खान-पान से मनुष्य विकार ग्रस्त हो जाता है।
बोल तो अमोल है जो कोई बोले जान।हिये तराजू तौल के तव मुख बाहर आन॥एक दिन गुरुकुल के शिष्यों में इस बात पर बहस छिड़ गयी कि आखिर इस संसार की सबसे शक्तिशाली वस्तु क्या है?कोई कुछ कहता तो कोई कुछ! जब पारस्परिक विवाद का कोई निर्णय ना निकला तो फिर सभी शिष्य गुरुजी के…
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जब हृदय में शांति का अनुभव मनुष्य ने कर लिया तो यह मनुष्य के लिए सबसे बड़ी चीज है।
एक बक्सा है। उस बक्से के अंदर अनमोल चीज रखी है और बक्से में ताला लगा है। पहले आप यह बात समझ लें कि यह बक्सा कौन सा बक्सा है ? मैं किस बक्से की बात कर रहा हूँ ? यह साधारण बक्सा नहीं है। जिस बक्से की मैं बात कर रहा हूँ, वह है…
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सचमुच संचयात्मक सोच ही संशय और लोभ की जननी है!
एक बहुत धनी व्यापारी था। उसने बहुत धन संपत्ति इकट्ठा कर रखी थी। उसका एक नौकर था संभु। जो अपने वेतन का एक बड़ा हिस्सा गरीबों की मदद में खर्च कर देता था। व्यापारी रोज उसे धन बचाने की शिक्षा देता। लेकिन संभु पर कोई असर नहीं होता था। इससे तंग आकर एक दिन व्यापारी…
