Category: Stories

  • Adjustment and Compromise

    Adjustment and Compromiseare very crucial in Relationships.Adjust whenSomeone wants to be with You.AndCompromise whenYou want to be with Someone. 🙏🏻Selfless love and sacrifice in relation ties unbreakable bond🌹 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 *तालमेल और समझौता**रिश्तों में बहुत महत्वपूर्ण हैं*।*तालमेल तब रखे जब**कोई आपके साथ रहना चाहता है*।*और**समझौता तब करें जब**आप किसी के साथ रहना चाहते हैं*। *🙏🏻रिश्तों में…

  • हम अपनी और अपनों की परख कैसे कर सकते है ?

    *हम अपनी और अपनों की परख कैसे कर सकते है ?*_ *काँच और हीरा* एक राजा का दरबार लगा हुआ था। क्योंकि सर्दी का दिन था इसलिये राजा का दरबार खुले में लगा हुआ था। पूरी आम सभा सुबह की धूप में बैठी थी। महाराज के सिंहासन के सामने एक शाही मेज थी और उस…

  • सच्चा सद्भाव

    *सच्चा सद्भाव*🌸🌸🌸🌸 पुत्र की उम्र पैंतालीस छूने लगी। पिता पुत्रको व्यापारमें स्वतन्त्रता नहीं देता था, तिजोरी की चाबी भी नहीं। पुत्र के मन में यह बात खटकती रहती थी। वह सोचता था कि यदि मेरा पिता पन्द्रह-बीस वर्ष तक और रहेगा तो मुझे स्वतन्त्र व्यापार करने का कोई अवसर ही नहीं मिलेगा। स्वतन्त्रता सबको चाहिये।…

  • एक जिज्ञासु किसी सुखी पुरुष की तलाश में निकला।

    एक जिज्ञासु किसी सुखी पुरुष की तलाश में निकला।सबसे पहले वह एक निर्धन किसान के पास पहुंँचा और उसने किसान से पूछा- “किसान भाई! आप तो सुखी होंगे? किसान ने कहा- “भाई साहब, मैं तो निर्धन हूंँ, भला मैं कैसे सुखी हो सकता हूंँ। गांँव का धन सम्पन्न व्यक्ति सुखी है आप उसके पास जाइये।तब…

  • गुरु के प्रति समर्पण ही शिष्य की पात्रता है, समर्पण के माध्यम से गुरुशक्ति शिष्य में प्रवाहित होने लगती है।

    *🌿🌹गुरु के प्रति समर्पण ही शिष्य की पात्रता है, समर्पण के माध्यम से गुरुशक्ति शिष्य में प्रवाहित होने लगती है।* शिष्य वही है जो गुरु के पास स्वयं को पूर्णतः झुका दे, गुरु उसी शिष्य के अन्तर्मन मे प्रवेश कर उसे निर्मल बनाते हैं। दीक्षा लेकर भी यदि शिष्य सरल चित न होकर अंहकारी बना…

  • भगवान का साथ

    *भगवान का साथ* 🕉️🕉️🕉️ *एक बुजुर्ग दरिया के किनारे पर जा रहे थे। एक जगह देखा कि दरिया की सतह से एक कछुआ निकला और पानी के किनारे पर आ गया।* *उसी किनारे से एक बड़े ही जहरीले बिच्छु ने दरिया के अन्दर छलांग लगाई और कछुए की पीठ पर सवार हो गया। कछुए ने…

  • जैसा अन्न वैसा मन

    *🍁जैसा अन्न वैसा मन 🍁* एक बार एक ऋषि ने सोचा कि लोग गंगा में पाप धोने जाते है, तो इसका मतलब हुआ कि सारे पाप गंगा में समा गए और गंगा भी पापी हो गयी ! अब यह जानने के लिए तपस्या की, कि पाप कहाँ जाता है ? तपस्या करने के फलस्वरूप देवता…

  • कड़वा वचन

    *कड़वा वचन* सुंदर नगर में एक सेठ रहते थे। उनमें हर गुण था- नहीं था तो बस खुद को संयत में रख पाने का गुण। जरा-सी बात पर वे बिगड़ जाते थे। आसपास तक के लोग उनसे परेशान थे। खुद उनके घर वाले तक उनसे परेशान होकर बोलना छोड़ देते। किंतु, यह सब कब तक…

  • अनुशासन 

    *” अनुशासन “* जीवन का एक सीधा सा नियम है और वो ये कि *अगर अनुशासन नहीं तो प्रगति भी नहीं।।* अनुशासन में बहकर ही एक नदी सागर तक पहुँचकर सागर ही बन जाती है।अनुशासन में बँधकर ही एक बेल जमीन से उठकर वृक्ष जैसी ऊँचाई को प्राप्त कर पाती हैऔर अनुशासन में रहकर ही…

  • सच्ची सद्गति कैसे….?

    💫सच्ची सद्गति कैसे….?🌷 ✍️ …..एक व्यापारी अपने ग्राहक को शहद दे रहा था। अचानक व्यापारी के हाथ से छूटकर शहद का बर्तन गिर पड़ा। बहुत-सा शहद भूमि पर ढुलक गया। जितना शहद व्यापारी उठा सकता था, उतना उसने ऊपर-ऊपर से उठा लिया; लेकिन कुछ शहद भूमि में गिरा रह गया। बहुत-सी मखियाँ शहद की मिठास…