Category: Stories
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गधे की मजार
*गधे की मजार* एक फकीर किसी बंजारे की सेवा से बहुत प्रसन्न हो गयाऔर उस बंजारे को उसने एक गधा भेंट किया। बंजारा बड़ा प्रसन्न था गधे के साथ। अब उसे पेदल यात्रा न करनी पड़ती थी। सामान भी अपने कंधे पर न ढोना पड़ता था! अब गधे के कारण आराम हैऔर गधा भी बड़ा…
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पक्का साधक
*💐💐पक्का साधक💐💐* एक बार एक गुरूजी अपने शिष्यों को भक्ति का उपदेश देते हुए समझा रहे थे कि *बेटा पक्के साधक बनो, कच्चे साधक ना बने रहो।*कच्चे पक्के साधक की बात सुनकर एक नये शिष्य के मन में सवाल पैदा हुआ! उसने पूछ ही लिया *“गुरूजी ये पक्के साधक कैसे बनते हैं?”* गुरूजी मुस्कुराये और…
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सच्चा पारिवारिक सुख – बड़ों के सम्मान में
*सच्चा पारिवारिक सुख – बड़ों के सम्मान में* पुत्र की उम्र पैंतालीस छूने लगी। पिता पुत्रको व्यापारमें स्वतन्त्रता नहीं देता था, तिजोरी की चाबी भी नहीं। पुत्र के मन में यह बात खटकती रहती थी। वह सोचता था कि यदि मेरा पिता पन्द्रह-बीस वर्ष तक और रहेगा तो मुझे स्वतन्त्र व्यापार करने का कोई अवसर…
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न्याय प्रिय राजा
💐💐न्याय प्रिय राजा 💐💐 एक राजा था। वह बहुत न्याय प्रिय तथा प्रजा वत्सल एवं धार्मिक स्वभाव का था। वह नित्य शनि देव की बडी श्रद्धा से पूजा-पाठ व स्तुति करता था।एक दिन शनि देव ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिये तथा कहा — “राजन् मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूं। बोलो तुम्हारी कोई इच्छा है?”प्रजा…
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*एक जापानी कथा है।* एक युवक विवाहित हुआ। अपनी पत्नी को ले कर
*एक जापानी कथा है।* एक युवक विवाहित हुआ। अपनी पत्नी को ले कर—समुराई था, क्षत्रिय था—अपनी पत्नी को लेकर नाव में बैठा। दूसरी तरफ उसका गांव था। बड़ा तूफान आया, अंधड़ उठा, नाव डावाडोल होने लगी, डूबने—डूबने को होने लगी। पत्नी तो बहुत घबड़ा गई। मगर युवक शांत रहा। उसकी शांति ऐसी थी जैसे बुद्ध…
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शिष्य की भूल
*शिष्य की भूल”* एक महात्मा बहुत ज्ञानी थे! साधना में लीन रहते थे। एक बार एक लड़का उनके पास आया। उसने उनसे अपना चेला बना लेने की पुरजोर प्रार्थना की। महात्मा जी ने सोचा, बुढ़ापा आ रहा है। एक चेला पास में होगा, तो सहारा बनेगा। यह सोचकर उन्होंने उसे चेला बना लिया। चेला बहुत…
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सेवा भाव
*सेवा भाव*〰️〰️🌸🌸🌸🌸🌸🌸〰️〰️ *एक बार भगवान अपने एक निर्धन भक्त से प्रसन्न होकर उसकी सहायता करने उसके घर साधु के वेश में पधारे। उनका यह भक्त जाति से चर्मकार था और निर्धन होने के बाद भी बहुत दयालु और दानी प्रवृत्ति का था। वह जब भी किसी साधु-संत को नंगे पाँव देखता तो अपने द्वारा गाँठी…
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गुरु आज्ञा में न रहने का परिणाम
*🙇♂️गुरु आज्ञा में न रहने का परिणाम🙇♂️* एक सेवक ने अपने गुरू जी से विनती की कि, *मैं सत्संग भी सुनता हूँ, सेवा भी करता हूँ, मग़र फिर भी मुझे कोई फल नहीं मिला।* गुरु जी ने प्यार से पूछा- *बेटा तुम्हे क्या चाहिए ?*सेवक बोला, *मैं तो बहुत ही ग़रीब हूँ दाता।*_गुरु जी ने…
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गृहस्थ बड़ा या सन्यासी
🛑 गृहस्थ बड़ा या सन्यासी🛑 प्राचीन समय की बात है। किसी नगर में एक विचित्र राजा रहता था। उस राजा की एक बड़ी ही अजीब आदत थी। जब भी नगर में कोई साधू या सन्यासी आता था तो वह उसे बुलाकर पूछता था कि – *“गृहस्थ बड़ा या सन्यासी?”* जो भी बताता कि गृहस्थ बड़ा…
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अंतरात्मा और उसकी आवाज!
अंतरात्मा और उसकी आवाज! हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा रहस्य यह है कि “हम खुद को ही नहीं जानते”, शायद हम अपनी प्रकृति या मूल स्वभाव को ही नहीं जानते या फिर शायद जानते हुए भी अनजान हैं! जिस तरह हमें पता है कि पानी का स्वभाव तरल होता है, उसी तरह क्या हमें पता…
