Don’t keep unaccountable desires..Take care of what you have got first.

बे हिसाब इच्छाएं न पालिए..
जो मिला है पहले उसे सम्भालिए।

एक सिद्ध महात्मा के दर्शन करने पहुंचे एक गरीब दम्पत्ति ने देखा कि कूडे के ढेर पर सोने का चिराग पड़ा हुआ है।

दंपत्ति ने महात्मा से पूछा तो महात्मा ने बताया कि ये तीन इच्छायें पूरी करने वाला बेकार चिराग है।

बहुत खतरनाक भी है, जो इसको उठाकर ले जाता है वापस यहीं कूड़े में फेंक जाता है।

गरीब दम्पत्ति ने जाते समय वो चिराग उठा लिया और घर पहुंचकर उससे तीन वरदान मांगने के बैठ गये।

दम्पत्ति गरीब थे और उन्होंने सबसे पहले दस लाख रूपये मांगकर चिराग की जांच करने की सोची।

जैसे ही उन्होंने रूपये मांगे तभी दरवाजे पर दस्तक हुयी जाकर दरवाजा खोला तो एक आदमी ने रूपये से भरा बैग और एक लिफाफा थमा गया।

लिफाफे में एक पत्र था जिसमे लिखा हुआ था कि मेरी कार से टकराकर आपके पुत्र की मृत्यु हो गयी है – जिसके पश्चात्ताप स्वरूप ये दस लाख रूपये भेज रहा हूँ! मुझे माफ़ करियेगा।

अब दम्पत्ति को काटो तो खून नही पत्नी दहाड़े मारकर रोने लगी।

तभी पति को ख्याल आया और उसने चिराग से दूसरी इच्छा बोल दी कि उसका बेटा वापस आ जाये ।

थोड़ी देर बाद दरवाजे पर दस्तक हुई और पूरे घर में अजीब सी आवाजें आने लगीं घर के बल्ब तेजी से जलने बुझने लगे – उसका बेटा प्रेत बनकर वापस आ गया था ।

दम्पत्ति ने प्रेतरूप देखा तो बुरी तरह डर गयेऔर हड़बड़ी में चिराग से तीसरी इच्छा के रूप में प्रेत रूपी पुत्र की मुक्ति मांग कर दी। बेटे की मुक्ति के बाद रातों रात वो आश्रम पहुंचे और चिराग को कूड़े के ढेर पर फेंककर दुखी मन से वापस लौट आये।

हम सभी अपनी जिंदगी में उस दम्पत्ति की तरह हैं! हमारी भी इच्छायें बेहिसाब हैं! जब एक इच्छा पूरी होती है तो दूसरी सताने लगती है और जब दूसरी पूरी हो जाये तो तीसरी।

इसलिए ईश्वर ने हमें जो भी दिया है – उसमे संतुष्ट रहना चाहिये और सफलता के लिऐ कभी जल्दबाजी नहीं अपनाना चाहिए।क्योकि सफलता केवल संघर्ष से ही मिलती है!

🙏🏽🙏🏾सुप्रभात 🙏🙏🏻

How far do the sinful deeds go?

पाप कर्म कहांँ-कहांँ तक जाते हैं ?

एक बार एक ऋषि ने सोचा कि लोग गंगा में पाप धोने जाते हैं,तो इसका मतलब हुआ कि सारे पाप गंगा में समा गए और गंगा भी पापी हो गयी।

अब यह जानने के लिए ऋषि ने तपस्या की और समझाना चाहा कि ये पाप कहाँ जाते हैं?

तपस्या करने के फलस्वरूप देवता प्रकट हुए।

ऋषि ने पूछा कि भगवन जो पाप गंगा में धोया जाता है वह पाप कहाँ जाता है?

भगवन ने कहा कि चलो गंगा से ही पूछते हैं!

दोनों लोग गंगा के पास गए और कहा कि, हे गंगे ! सब लोग तुम्हारे यहाँ पाप धोते हैं, तो इसका मतलब आप भी पापी हुई।

गंगा ने कहा, मैं क्यों पापी हुई , मैं तो सारे पापों को ले जाकर समुद्र को अर्पित कर देती हूँ!

अब वे लोग समुद्र के पास गए और बोले, हे सागर ! गंगा जो पाप आपको अर्पित कर देती है तो इसका मतलब आप भी पापी हुए?

समुद्र ने कहा, मैं क्यों पापी हुआ, मैं तो सारे पापों को लेकर भाप बना कर बादल बना देता हूँ।

अब वे लोग बादल के पास गए और पूछने लगे, हे बादल! समुद्र जो पापों को भाप बनाकर बादल बना देता हैतो इसका मतलब आप पापी हुए।

बादलों ने कहा मैं क्यों पापी हुआ!मैं तो सारे पापों को वापस पानी बरसा कर धरती पर भेज देता हूँ। पापियों का नुकसान होता है और धर्मी ज्ञानीयों के लिए अन्न उपजता है, जिसको मानव खाता है; उस अन्न में जो अन्न जिस मानसिक स्थिति से उगाया जाता है और जिस वृत्ति से प्राप्त किया जाता है। जिस मानसिक अवस्था में खाया जाता है, उसी अनुसार मानव की मानसिकता बनती है।

शायद इसीलिये कहते हैं – “जैसा खाए अन्न, वैसा बनता मनl”

अन्न को जिस वृत्ति ( कमाई ) से प्राप्त किया जाता हैऔर जिस मानसिक अवस्था में खाया जाता है। वैसे ही विचार मानव के बन जाते हैं!

इसीलिये सदैव भोजन से पहले श्री सदगुरुदेव महाराज जी के लिए दसवाँ हिस्सा निकाल कर खाना चाहिए। और कम से कम अन्न जिस धन से खरीदा जाए वह धन भी श्रम का होना चाहिए।श्रद्धा-प्रेम की सेवा ही गुरु दरबार में काम आती है।

Realize your potential

अपनी क्षमता पहचानो

एक गाँव में एक आलसी आदमी रहता था! वह कुछ काम-धाम नहीं करता था। बस दिन भर निठल्ला बैठकर सोचता रहता था कि किसी तरह कुछ खाने को मिल जाये।

एक दिन वह यूं ही घूमते-घूमते आम के एक बाग़ में पहुँच गया। वहाँ रसीले आमों से लदे कई पेड़ थे।

रसीले आम देख उसके मुँह में पानी आ गया और आम तोड़ने वह एक पेड़ पर चढ़ गया, लेकिन जैसे ही वह पेड़ पर चढ़ा, बाग़ का मालिक वहाँ आ पहुँचा।

बाग़ के मालिक को देख आलसी आदमी डर गया और जैसे-तैसे पेड़ से उतरकर वहाँ से भाग खड़ा हुआ।

भागते-भागते वह गाँव में बाहर स्थित जंगल में जा पहुँचा, वह बुरी तरह से थक गया था। इसलिए एक पेड़ के नीचे बैठकर सुस्ताने लगा।

तभी उसकी नज़र एक लोमड़ी (Fox) पर पड़ी, उस लोमड़ी की एक टांग टूटी हुई थी और वह लंगड़ाकर चल रही थी।
लोमड़ी को देख आलसी आदमी सोचने लगा कि ऐसी हालत में भी इस जंगली जानवरों से भरे जंगल में ये लोमड़ी बच कैसे गई? इसका अब तक शिकार कैसे नहीं हुआ?

जिज्ञासा में वह  एक पेड़ पर चढ़ गया और वहाँ बैठकर देखने लगा कि अब इस लोमड़ी के साथ आगे क्या होगा?

कुछ ही पल बीते थे कि पूरा जंगल शेर (Lion) की भयंकर दहाड़ से गूंज उठा, जिसे सुनकर सारे जानवर डरकर भागने लगे, लेकिन लोमड़ी अपनी टूटी टांग के साथ भाग नहीं सकती थी, वह वहीं खड़ी रही।

शेर लोमड़ी के पास आने लगा, आलसी आदमी ने सोचा कि अब शेर लोमड़ी को मारकर खा जायेगा!
लेकिन आगे जो हुआ, वह कुछ अजीब था।

शेर लोमड़ी के पास पहुँचकर खड़ा हो गया! उसके मुँह में मांस का एक टुकड़ा था- जिसे उसने लोमड़ी के सामने गिरा दिया।
लोमड़ी इत्मिनान से मांस के उस टुकड़े को खाने लगी, थोड़ी देर बाद शेर वहाँ से चला गया।

यह घटना देख आलसी आदमी सोचने लगा कि भगवान सच में सर्वेसर्वा है,उसने धरती के समस्त प्राणियों के लिए, चाहे वह जानवर हो या इंसान, खाने-पीने का  प्रबंध कर रखा है!
यही सोचते वह अपने घर लौट आया।

घर आकर वह २-३ दिन तक बिस्तर पर लेटकर प्रतीक्षा करने लगा कि जैसे भगवान ने शेर के द्वारा लोमड़ी के लिए भोजन भिजवाया था – वैसे ही उसके लिए भी कोई न कोई खाने-पीने का सामान ले आएगा।

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ! भूख से उसकी हालात ख़राब होने लगी। आख़िरकार उसे घर से बाहर निकलना ही पड़ा। घर के बाहर उसे एक पेड़ के नीचे बैठे हुए बाबा दिखाए पड़े। वह उनके पास गया और जंगल का सारा वृतांत सुनाते हुए वह बोला, “बाबा जी! भगवान मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं? उनके पास जानवरों के लिए भोजन का प्रबंध है, लेकिन इंसानों के लिए नहीं।

बाबा जी ने उत्तर दिया, “बेटा! ऐसी बात नहीं है! भगवान के पास सारे प्रबंध है। दूसरों की तरह तुम्हारे लिए भी!
लेकिन बात यह है कि वे तुम्हें लोमड़ी नहीं शेर बनाना चाहते हैं।

सचमुच में, हम सबके भीतर क्षमताओं का असीम भंडार है!
बस अपनी अज्ञानतावश हम उन्हें पहचान नहीं पाते और स्वयं को कमतर समझकर दूसरों की सहायता की प्रतीक्षा करते रहते हैं।

अतः स्वयं की क्षमता पहचानिए। दूसरों की सहायता की प्रतीक्षा मत करिए।
स्वकर्म के द्वारा इतना सक्षम बनिए कि आप दूसरों की सहायता कर सकें। केवल अपने हित का ही ना सोचकर दूसरों का भला भी करने योग्य बनिए!

संतों ने यही समझाया है कि पर हित सरिस धर्म नहीं भाई!

positive attitude

सकरात्मक दृष्टिकोण

एक गरीब आदमी बड़ी मेहनत से एक-एक रूपया जोड़ कर मकान बनवाता है। उस मकान को बनवाने के लिए वह पिछले 20 वर्षों से एक-एक पैसा बचत करता है, ताकि उसका परिवार छोटे से झोपड़े से निकलकर पक्के मकान में सुखी से रह सके।

आखिरकार एक दिन मकान बन कर तैयार हो जाता है। तत्पश्चात पंडित से पूछ कर गृह प्रवेश के लिए शुभ तिथि निश्चित की जाती है।

लेकिन गृहप्रवेश के 2 दिन पहले ही भूकंप आता है, और उसका मकान पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है।

यह खबर जब उस आदमी को पता चलती है तो वह दौड़ा दौड़ा बाजार जाता है और मिठाई खरीद कर ले आता है।

मिठाई लेकर वह घटनास्थल पर पहुंचता है, जहां पर काफी लोग इकट्ठे होकर उसके मकान गिरने पर अफसोस जाहिर कर रहे थे।

ओह बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ, कितनी मुश्किल से एक – एक पैसा जोड़कर मकान बनवाया था।

इसी प्रकार लोग आपस में तरह तरह की बातें कर रहे थे।

वह आदमी वहाँ पहुंचता है और झोले से मिठाई निकाल कर सबको बाँटने लगता है।

यह देखकर सभी लोग हैरान हो जाते हैं।

तभी उसका एक मित्र उससे कहता है कि कहीं तुम पागल तो नहीं हो गए हो, घर गिर गया, तुम्हारी जीवन भर की कमाई बर्बाद हो गई और तुम खुश होकर मिठाई बांट रहे हो।

वह आदमी मुस्कुराते हुए कहता है कि –
तुम इस घटना का सिर्फ नकारात्मक पक्ष देख रहे हो इसलिए इसका सकारात्मक पक्ष तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा है।

ये तो बहुत अच्छा हुआ कि मकान आज ही गिर गया वरना तुम्हीं सोचो अगर यह मकान 2 दिनों के बाद गिरता तो मैं मेरी पत्नी और बच्चे सभी मारे जा सकते थे, तब कितना बड़ा नुकसान होता।

नकारात्मक दृष्टिकोण को त्याग दीजिये,अपने घर मे बच्चों तथा बुजुर्गो को कहिये-
“आप स्वस्थ रहिये, खुश हम आपको रख लेंगे!”

हर व्यक्ति सुबह उठकर प्लान करता है कि आज 2 बजे वहाँ जाऊंगा।

आज 4 बजे उससे मिलूंगा जबकि अगले पल का भरोसा नहीं।

सुबह उठकर मन मे सोचिए कि “श्री हरि इच्छा, देखे आज ईश्वर, क्या करवाता है, कैसा दिन गुजरवाता है!”

जो है वो सबसे बढ़िया है! क्योंकि वो जो नहीं है वो अगर सबसे बढ़िया होता तो वही होता, ये न होता!

अर्थात जो है वो सबसे बढ़िया है। जो नहीं है वो मेरे लिए बढ़िया नहीं रहा होगा इसलिए ईश्वर ने नही होने दिया!

आप सभी का दिन शुभ हो।
🙏🙏🙏🙏🙏🏻😊

समय के सद्गुरु में पूर्ण समर्पण से भटकाव खत्म होता है!

समय के सद्गुरु में पूर्ण समर्पण से भटकाव खत्म होता है!

एक बगीचा था। नाना प्रकार के पुष्प उसमें खिले हुए थे और एक भौंरा एक पुष्प से दूसरे पुष्प पर बैठता था।

परंतु एक चंपा का जो विशाल वृक्ष था- उस चंपा के बड़े फूल में बड़ी सुंदरता और खूशबू होती है, लेकिन वह भौंरा उस बड़े चंपा के फूल पर नहीं जाता था।

तो एक महात्मा जी उस बागवानी में, उपवन में आए और यह सब कुछ देखकर के चंपा से पूछने लगे!

महात्मा जी ने अपना प्रश्न किया कि ये चंपा के फूल! तेरे में रूप भी है, सुंदरता भी है, खूशबू भी है और आकार भी तेरा बहुत बड़ा है, अन्य पुष्पों की तुलना में, परंतु क्या कारण है कि यह भौंरा तेरे पास नहीं आ रहा है!

तो चंपा ने महात्मा जी को जवाब दिया कि –
मुझमें तीन गुण रूप रंग और सुबास!
जगह जगह के मीत को कौन बिठावे पास!

आपने ठीक फरमाया कि मेरे में तीनों गुण विद्यमान हैं परंतु यह दर-दर का भटकने वाला भौंरा कभी किसी पुष्प पर जाता है, कभी किसी पुष्प पर जाता इसका समर्पण नहीं है किसी चीज के प्रति!

इसीलिए कहा है कि A man can become jack of all trades but Master of Non कि आदमी जो है बहुत कुछ सीख सकता है पर किसी एक चीज के ऊपर पूर्णतः अधिकार प्राप्त नहीं किया तो उसे असली चीज से वंचित होना पड़ता है!

अतः इसीलिए भक्ति के अंदर तद्रुपता और पूर्णतः समर्पण ही भक्ति की सफलता है।

इसलिए हर मानव परमपिता परमात्मा का एक जीता-जागता मंदिर है।

यह हमारा जो पंच भौतिक शरीर है यह परमात्मा की जीती-जागती मस्जिद है। उसका जीता-जागता गुरुद्वारा है। उसका जीता-जागता मंदिर है और इसके अंदर प्राण रूप में वह परमात्मा हमारे अंदर प्रतिष्ठित है।

पर हम बेखबर हो गए हैं और इधर-उधर भटकते हैं!

संत महापुरुष कहते हैं कि दुनियां के शोर से अपना ध्यान हटाकर अपने अंदर की शक्ति को पहचानो!

वह कैसे पहचानी जाएगी?

जब हमें समय के सच्चे सद्गुरु मिल जाते हैं, उनका मार्गदर्शन मिलता है तो हमारी भटकन समाप्त हो जाती है!

When we keep saying, we don’t have time for devotion then what is the result.

जब हम कहते रहते हैं, हमारे पास भक्ति के लिए समय नहीं है तो परिणाम क्या होता है।

एक बहुत बड़ा सौदागर नौका लेकर दूर-दूर देशों में करोड़ों रुपये कमाने जाता था।
उसके मित्रों ने उससे कहा कि तुम नौका में घूमते हो। पुराने जमाने की नौका है। समुद्र में तूफ़ान आते हैं, खतरे बहुत होते हैं और नावें डूब जाती हैं। तुम तैरना तो सीख लो।

सौदागर ने कहा कि तैराकी सीखने के लिए मेरे पास समय कहां है?

लोगों ने कहा, ‘ज्यादा समय की जरूरत नहीं है। गाँव में एक कुशल तैराक है, जो कहता है कि वह तीन दिन में ही तैरना सिखा देगा।’

सौदागर बोला – ‘हाँ! वह जो कहता है तो ठीक ही कहता होगा; लेकिन मेरे पास तीन दिन कहाँ? तीन दिन में तो मैं हज़ारों का कारोबार कर लेता हूँ। तीन दिन में तो लाखों रूपए यहां से वहाँ हो जाते हैं। कभी फुरसत मिलेगी तो जरूर सीख लूंगा।’

फिर भी लोगों ने कहा कि ख़तरा बहुत बड़ा है! तुम्हारा जीवन निरन्तर नाव पर है और दाँव पर है। किसी भी दिन जान को ख़तरा हो सकता है और तुम तो तैरना भी नहीं जानते।

उसने कहा कि और कोई सस्ती तरकीब हो तो बताओ! इतना समय तो मेरे पास नहीं है।
तो लोगों ने कहा कि कम से कम दो ख़ाली पीपे अपने पास रख लो। कभी ज़रूरत पड़ जाए तो उन्हें पीठ पर बाँध लेना ताकि उन्हें पकड़कर तुम तैर तो सकोगे।

उसने दो खाली पीपे मुंह बन्द करवाकर अपने पास रख लिए। उनको हमेशा अपनी नाव में जहां वो सोता वहीं रख लेता।
किसी को पता भी न था कि एक दिन वह घड़ी आ ही गई। तूफ़ान उठा और नाव डूबने लगी।

वह चिल्लाया, ‘मेरे पीपे कहां हैं?’

उसके नाविकों ने बताया कि वे तो उसके बिस्तर के पास ही रखे हुए हैं।

बाकी नाविक तो कूद गये, कयोंकि वे तैरना जानते थे।

वह अपने पीपों के पास गया। दो खाली पीपे भी वहां थे जो उसने तैरने के लिए रखे थे और दो स्वर्ण मुद्राओं से भरे पीपे भी थे! जिन्हें वह लेकर आ रहा था।

उसका मन डांवाडोल होने लगा कि कौन से पीपे लेकर कूदे! सोने से भरे हुए या खाली पीपे?

फिर उसने देखा कि नाव डूबने वाली है। खाली पीपे लेकर कूदने से क्या होगा? मेरा सोना तो डूब ही जाएगा! उसने अपने सोने से भरे पीपे लिए और कूद गया।

इस प्रकार जो अंत उस सौदागर का हुआ होगा, वह आप समझ सकते हैं – कयोंकि वह तैरने के लिए समय नहीं निकाल सका था। उसे तो बचने का मौका भी मिल गया था। वह खाली पीपे लेकर कूद सकता था, लेकिन समय पर उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो गई और वह भरे पीपे लेकर कूद गया और अपने जीवन से हाथ धो बैठा।

यही हाल हमारा भी है। क्या हम अभ्यास के लिय समय निकाल रहे हैं? या यही बहाना है कि अभी थोड़ा व्यापार संभाल लें! थोड़ा मकान देख लें! परिवार में मेरे बिना सब चौपट हो जाएगा! थोड़ा उसको भी देख लें! बस ऐसे ही जीवन निकाल रहे हैं।

हम तैरना कब सीखेंगे? जबकि हम संसार-सागर में टूटी हुई नाव में बैठे हैं।

सभी सन्त महात्मा पुकार-पुकार कर सावधान कर रहे हैं, लेकिन हमारे पास समय नहीं है।

यहां तक कि सत्संग और सेवा के 2 खाली पीपे भी हमने साथ नहीं रखे हैं।
उनको भी हमने अहंकार और दौलत के दिखावे से भर रखा है!

क्योंकि जिनको जीवन भर दिखावे, अहंकार और दौलत से भरे-भरे, फूले-फूले होने की आदत होती है – वे एक क्षण भी खाली होने को राजी नहीं हो सकते।

इसलिय कुछ वख्त अपने लिय भी निकालें – अपने अन्दर बैठे उस अविनाशी का सानिध्य पाने के लिय, स्वयं की आवाज सुनने के लिय – इसी में जीवन की सफलता और समझदारी निहित है!

human life is great

मनुष्य जीवन महान है

चौरासी लाख योनियों में मनुष्य ही एक मात्र ऐसा प्राणी है- जिसका व्यक्तित्व निर्माण प्रकृति से ज्यादा उसकी स्वयंँ की प्रवृत्ति पर निर्भर होता है।

मनुष्य अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जैसा सोचता है, वैसा बन जाता है।

मनुष्य और अन्य चौरासी लाख योनियों में प्राणियों के बीच का जो प्रमुख भेद है वह ये कि मनुष्य के सिवा कोई और प्राणी श्रेष्ठ विचारों द्वारा एक श्रेष्ठ जीवन का निर्माण नहीं कर पाता है।

वो अच्छा सोचकर, अच्छे विचारों के आश्रय से अपने जीवन को अच्छा नहीं बना सकता है।

प्रकृति ने उसका निर्माण जैसा कर दिया, कर दिया। अब उसमें सुधरने की कोई सम्भावना बाकी नहीं रह जाती है।

मगर एक मनुष्य में जीवन के अन्तिम क्षणों तक जीवन परिवर्तन के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह अपने जीवन को अपने हिसाब से अच्छा या बुरा बना सकने में समर्थ होता है।

पशु के जीवन में पशु से पशुपतिनाथ बनने की सम्भावना नहीं होती मगर एक मनुष्य के जीवन में नर से नारायण बनने की प्रबल सम्भावना होती है।

मनुष्य जैसा खाता है, जैसा देखता है, जैसा सुनता है, जैसा बोलता है और जैसा सोचता है, फिर उसी के अनुरूप वो अपने व्यक्तित्व का निर्माण भी कर लेता है।

अगर उस परम प्रभु ने कृपा करके आपको मनुष्य बनाया है तो फिर क्यों न समय के सदगुरुदेव के श्री चरणों का सहारा लेकर, अध्यात्म पथ पर चल कर, आत्म-ज्ञान को प्राप्त करके श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाया जाए।

कहा है कि –
बड़े भाग मानुष तन पावा!
सुर दुर्लभ सद्ग्रथन गावा!!

साधन धाम मोक्ष कर द्वारा!
पाय न जेहिं परलोक सुधारा!!

Aahana Kumra Raises Mercury In Hot Poolside Pic In Sexy Blue Monokini L PHOTOS

Aahana Kumra looks drop-dead-gorgeous in jaw-dropping poolside photo as she brings the perfect summer vibes in her stunning blue monokini. – See Viral Pics

Image credit: Instagram Aahana Kumra Hot Pool Pictures Aahana Kumra looks sensational and spectacular in her sizzling pool pictures in blue swimsuit.
Image credit: Instagram Aahana Kumra Mermaid Aahana Kumra is a mermaid in this photo from swimming pool as she enjoys her summer time.
Image credit: Instagram Aahana Kumra Water Baby Aahana Kumra shows her love for the water as she dons her hot blue monokini in this picture.
Image credit: Instagram Aahana Kumra Exudes Sultriness Aahana Kumra brings the much-needed raunchines in this sultry pool photo as she dons her blue monokini.
Image credit: Instagram Aahana Kumra Bold And Bindaas Aahaa Kumra’s bold and bindaas persona brings the much-needed glam quoteint in this hot pool photo.
Image credit: Instagram Aahana Kumra Hotness Personified Aahana Kumra flaunts her hot-toned legs in her sexy blue monokini in this poolside picture.

Aashram 3 Hot Actor Tridha Choudhury Makes Men Go Weak In The Knees With Bold Bikini Pics

Tridha Choudhury, who was seen in Aashram, Aashram 2 And Aashram 3, treats fans with an amazing set of hot bikini pics.

Image credit: Instagram Aashram 3 Actor Tridha Choudhury Aka Babita poses in sexy yellow bikini Tridha Choudhury is serving the purpose right as she amps up the oomph factor
Image credit: Instagram Tridha Choudhury burns the internet as she poses with her red lips and wet hair in the pool
Image credit: Instagram Aashram actor Tridha Choudhury aka Babita Bhabhi poses in orange swimwear
Image credit: Instagram Tridha Choudhury aka Babita from Aashram poses in a metallic swimwear
Image credit: Instagram Tridha Choudhury flaunts her sexy back in halter black top
Image credit: Instagram Aashram 3 Hot Actor Tridha Choudhury Looks Sexy in Yellow Bikini
Image credit: Instagram Hot Photos: Tridha Choudhury Looks Sizzling in Sexy Bikinis

Alia Bhatt Pairs Exaggerated Winged Eyes With Rosy Cheeks And Tinted Lips For Gucci Cruise 2024

Alia Bhatt’s first outing as Gucci’s Global Brand Ambassador at the Gucci Cruise 2024 show in Seoul was a striking one

Alia Bhatt is making waves in Seoul

The highly-anticipated Gucci Cruise 2024 showcase has taken place in Korea’s Gyeongbokgung Palace located in Seoul. For Bollywood fans, what is even more anticipatory is Alia Bhatt’s appearance at the esteemed event. Marking her first outing as a Global Brand Ambassador for Gucci, Alia Bhatt looked stunning at the fashion showcase. While she played it safe with her ensemble at the event, the experimentation came from her makeup look. Alia sported exaggerated winged eyeshadow that extended to either side of her eye. Her cheeks were rosy and dotted with blush while her lips had a pink tint; a look often seen in the K-pop sphere. Along with it, Alia’s skin was radiant and her hair was worn in her usual centre-parted slicked back ponytail.

credit:swirlster.ndtv.com