Audrey bitoni Latest Hot Photos

Audrey bitonii is an model and actress who has been getting much popularity on social media with her various hot photoshoots. Audrey bitoni has appeared in films and has been known to raise the heat with her bold photos flaunting her sexy body in bikinis and swimsuits as well

Yamini Bhaskar Hot Photos

Hacked movie actress, Yamini Bhaskar, is winning fans with her cool and sporty look in latest photos shared on social media. The actress posed in a sports top paired with track pants and a jacket, and showed her stylish look while flaunting her toned midriff. A pair of cool sunglasses, a cap added more to her stylish look as she slipped her feet in a pair of sneakers.

Yamini Bhaskar Photos
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भिखारी राजा और दयालु युवक : एक प्रेरक कथा

भिखारी राजा और दयालु युवक : एक प्रेरक कथा

 एक बार की बात है प्राचीन भारत  के एक राज्य में एक बहुत नेकदिल राजा राज करता था. उस राजा की कोई संतान न थी जिसे कि वह अपना उत्तराधिकारी बनाता. राजा बूढ़ा होता जा रहा था. वह एक सुयोग्य उत्तराधिकारी चुनना चाहता था ताकि उसका राज्य सुरक्षित रहते हुए समय के साथ और समृद्ध होता रहे. राजा ने पूरे राज्य में मुनादी करवाते हुए उत्तराधिकारी के रूप में योग्य युवाओं को साक्षात्कार के लिए अपने पास आमंत्रित किया. साक्षात्कार के आधार पर ही नए उत्तराधिकारी का चयन किया जाना था. उम्मीदवारों के लिए सिर्फ एक शर्त थी कि उनके दिल में अपने देशवासियों के प्रति अगाध प्रेम होना चाहिए. पूरे राज्य के युवाओं में नया राजा बनने की संभवनाओं को लेकर बेहद उत्साह था. एक सीमांत इलाके के पिछड़े गांव में रहने वाले एक गरीब युवक तक भी यह सूचना पहुंची. वह भी बहुत उत्साहित था. उसने राजा से अपने साक्षात्कार की तैयारियां शुरू कर दी. युवक बहुत दयालू और मेहनती था पर कई वजहों के चलते वह बहुत गरीब था. उसके पास राजा के पास साक्षात्कार के लिए जाने को ठीक-ठाक कपड़े तक न थे.

युवक ने बहुत मेहनत से काम करते हुए थोड़े ज्यादा पैसे कमाए ताकि वह कुछ कपड़े खरीद सके. कपड़ों के साथ उसने खाने-पीने का कुछ जरूरी सामान भी खरीदा ताकि वह राजा के महल तक की लंबी यात्रा पूरी कर सके. नए कपड़े पहनकर और खाने-पीने का सामान एक पोटली में बांधकर युवक ईश्वर का नाम लेकर लंबी यात्रा पर निकल पड़ा. वह कई दिनों तक पैदल चलता रहा और अंतत: महल के बहुत करीब पहुंच गया. महल के करीब ही उसे सड़क के किनारे एक बहुत फटेहाल भिखारी दिखा. वह फटे कपड़ों में ठंड में कांप रहा था. युवक को देखकर भिखारी ने अपने हाथ फैलाए और मदद की याचना की. वह कंपकंपाती आवाज में बोला – मुझे बहुत ठंड लग रही है और मैं बहुत भूखा भी हूं. साहब मेरी कुछ मदद करो!

युवक उसकी इतनी खराब हालत देख पिघल गया. उसने तुरंत अपने नए कपड़े निकालकर भिखारी को दे दिए. उसने अपने पास बची खाने-पीने की चीजें भी उसे दे दी. भिखारी उसके सम्मुख नतमस्तक हो गया. उसने युवक को सुखी जीवन की हजार दुआएं दीं. युवक ने क्योंकि अपने कपड़े भिखारी को दे दिए थे, उसे राजा के सम्मुख साक्षात्कार के लिए जाने में थोड़ी हिचकिचाहट हो रही थी. लेकिन उसने बहुत हिम्मत करके अपने पुराने कपड़ों में ही राजमहल के भीतर जाने का मन बनाया. राजमहल के भीतर प्रवेश करने के बाद राजा के सिपाहियों ने उसे उस हॉल का रास्ता दिखाया जहां सभी युवक राजा से साक्षात्कार के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे. यात्रा की थकान मिटाने के लिए दिए गए थोड़े से वक्त में आराम कर लेने के बाद उसे उस कक्ष में ले जाया गया जहां राजा एक-एक कर सभी युवा उम्मीदवारों से साक्षात्कार कर रहा था. कक्ष में प्रवेश करने के बाद वह राजा का अभिवादन करने के लिए बहुत नीचे तक झुका. लेकिन जब उसने नजर उठाकर राजा के चेहरे की ओर देखा तो वह सकते में आ गया. उसे राजा का चेहरा पहचाना सा लगा. और तब उसे याद आया कि यह चेहरा हूबहू उस भिखारी के चेहरे से मिलता था जिसे उसने अपने नए कपड़े और खाने-पीने की चीजें दी थीं. राजा उसके चेहरे पर हैरानी के भाव देखकर मुस्कराते हुए बोला – हां हां, तुमने ठीक पहचाना. मैं वही भिखारी हूं जिसे तुमने रास्ते में देखा था.

लेकिन आपने खुद को भिखारी के रूप में क्यों बदला. आप तो राजा हैं – युवक ने हैरत भरे भाव से पूछा.

क्योंकि मुझे यह सुनिश्चित करना था कि तुम सचमुच अपने राज्य के लोगों को सच्चा प्रेम करते हो – राजा ने कहा.

मैं जानता था कि अगर मैं तुम्हारे सम्मुख राजा के रूप में आता, तो तुमने मुझे प्रभावित करने के लिए कुछ भी किया होता. लेकिन तब मैं तुम्हारे दिल की सच्चाई नहीं जान पाता कि वह वस्तुत: कैसा है. बदले में किसी भी चीज की अपेक्षा किए बिना जरूरतमंद लोगों के प्रति दिखाई गई उदारता एक महान हृदय की पहचान है. एक भिखारी के प्रति तुम्हारे प्रेम और उदारता को देखकर यह साबित होता है कि तुम वास्तव में सच्चे मन से अपने राज्य के लोगों को चाहते हो और उनके लिए कुछ भी कर सकते हो. इस राज्य को ऐसे ही लीडर की जरूरत है, जो पूरे राज्य के लिए काम करे न कि सिर्फ राज-सिंहासन की चापलूसी करने वालों के लिए. तुमने साबित किया है कि मेरा उत्तराधिकारी बनने के लिए तुम ही सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हो – राजा ने मुस्कराकर युवक की पीठ पर हाथ रखते हुए कहा.

जीवन में दया और करूणा बुद्धिमत्ता से कहीं बेहतर और जरूरी है. इस बात की समझ ही बुद्धिमत्ता की शुरुआत है. अपने साथी मनुष्यों के प्रति प्रेम और करूणा से भरा हुआ दिल इस संसार के लिए सबसे बड़ा उपहार है .

आखिरी दुआ

“अरे! भाई बुढापे का कोई ईलाज नहीं होता। अस्सी पार कर चुके हैं । अब बस सेवा कीजिये ।” डाक्टर पिता जी को देखते हुए बोला ।

“डाक्टर साहब ! कोई तो तरीका होगा। साइंस ने बहुत तरक्की कर ली है ।”

“शंकर बाबू ! मैं अपनी तरफ से दुआ ही कर सकता हूँ। बस आप इन्हें खुश रखिये। इस से बेहतर और कोई दवा नहीं है और इन्हें लिक्विड पिलाते रहिये जो इन्हें पसंद है ।” डाक्टर अपना बैग सम्हालते हुए मुस्कुराया और बाहर निकल गया।

शंकर पिता को लेकर बहुत चिंतित था। उसे लगता ही नहीं था कि पिता के बिना भी कोई जीवन हो सकता है। माँ के जाने के बाद अब एकमात्र आशीर्वाद उन्ही का बचा था। उसे अपने बचपन और जवानी के सारे दिन याद आ रहे थे। कैसे पिता हर रोज कुछ न कुछ लेकर ही घर घुसते थे। बाहर हलकी-हलकी बारिश हो रही थी। ऐसा लगता था जैसे आसमान भी रो रहा हो। शंकर ने खुद को किसी तरह समेटा और पत्नी से बोला –

“सुशीला ! आज सबके लिए मूंग दाल के पकौड़े , हरी चटनी बनाओ । मैं बाहर से जलेबी लेकर आता हूँ ।”

पत्नी ने दाल पहले ही भिगो रखी थी। वह भी अपने काम में लग गई। कुछ ही देर में रसोई से खुशबू आने लगी पकौड़ों की। शंकर भी जलेबियाँ ले आया था । वह जलेबी रसोई में रख पिता के पास बैठ गया । उनका हाथ अपने हाथ में लिया और उन्हें निहारते हुए बोला –

“बाबा ! आज आपकी पसंद की चीज लाया हूँ । थोड़ी जलेबी खायेंगे।”पिता ने आँखे झपकाईं और हल्का सा मुस्कुरा दिए। वह अस्फुट आवाज में बोले -“पकौड़े बन रहे हैं क्या ?”

“हाँ, बाबा ! आपकी पसंद की हर चीज अब मेरी भी पसंद है। अरे सुषमा ! जरा पकौड़े और जलेबी तो लाओ ।”

शंकर ने आवाज लगाईं !”लीजिये बाबू जी एक और।” उसने पकौड़ा हाथ में देते हुए कहा।

“बस ….अब पूरा हो गया। पेट भर गया । जरा सी जलेबी दे .” पिता बोले । शंकर ने जलेबी का एक टुकड़ा हाथ में लेकर मुँह में डाल दिया। पिता उसे प्यार से देखते रहे।

“शंकर ! सदा खुश रहो बेटा। मेरा दाना पानी अब पूरा हुआ .” पिता बोले।

“बाबा ! आपको तो सेंचुरी लगानी है । आप मेरे तेंदुलकर हो ,” आँखों में आंसू बहने लगे थे।

वह मुस्कुराए और बोले – “तेरी माँ पेवेलियन में इंतज़ार कर रही है। अगला मैच खेलना है। तेरा पोता बनकर आऊंगा , तब खूब खाऊंगा बेटा ।”

पिता उसे देखते रहे . शंकर ने प्लेट उठाकर एक तरफ रख दी । मगर पिता उसे लगातार देखे जा रहे थे । आँख भी नहीं झपक रही थी शंकर समझ गया कि यात्रा पूर्ण हुई । तभी उसे ख्याल आया , पिता कहा करते थे –

“श्राद्ध खाने नहीं आऊंगा कौआ बनकर , जो खिलाना है अभी खिला दे ।”

माँ बाप का सम्मान करें और उन्हें जीते जी खुश रखे।

सदैव प्रसन्न रहिये।
जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।
🙏🙏🙏🙏🌳🌳🙏🙏🙏

🌿काल का वकील मन एक शातिर ठग🌿

🌿काल का वकील मन एक शातिर ठग🌿

हमारे भीतर ही शांति है और हमारे भीतर ही अशांति है। हमारे भीतर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार का भीड़ भरा ऐसा संसार भी है जिसका राजा काल है और अहंकारी मन उसका वकील है। जब भी हम ध्यान में बैठते हैं तो यह काल का वकील मन हमें बहुत सारे प्रलोभन दिखाकर इसलिए इस भीड़ वाले बाजार में ले जाता है ताकि हम साक्षी भाव से अपने स्वांसों पर ध्यान केन्द्रित न कर सकें और काल की सत्ता में कोई विघ्न न आए। अहंकारी मन तोड़ने का काम करता है। इसलिए इसे काल का शातिर वकील कहते हैं। अभ्यास के समय इस काल के शातिर वकील की फिक्र ही छोड़ दो। तुम धीरे-धीरे तटस्थ और उदासीन हो जाओ। इस अहंकारी वकील को जो करना है, करने दो। उसकी जैसी मौज। अगर उसने ठगना ही तय किया है तो वो अपनी योजना बनाता रहे।

अभ्यास के समय तुम मन की लच्छेदार बातों में तनिक-सी भी दिलचस्पी मत लो वरना वो तुम्हें भी बहका कर अटका देगा। क्योंकि हमें जिससे लड़ना होता है तो उसके पास ही रहना होता है। इस अहंकारी वकील की न दोस्ती अच्छी और न दुश्मनी। इससे दोस्ती करें तो फंस जाते हैं और दुश्मनी करें तो फंस जाते हैं। इसलिए इसे पता ही नहीं चलना चाहिए कि दोस्त हैं या दुश्मन। सिर्फ इस ठगने वाले शातिर वकील के तर्क वितर्क में तनिक सी भी दिलचस्पी नहीं लेना है। इस प्रकार के साक्षी भाव के अभ्यास से हम धीरे-धीरे मन के पार हो जाते हैं। ऐसा अभ्यास मन को स्वांसों की मधुर धुन में लीन कर देता है और हृदय के उस स्थान पर ले जाता है जहां काल की पहुंच नहीं होती और न ही इस काल के शातिर वकील मन की अदालत लगती है। वह स्थान समय के पार होता है जहां अविनाशी विराजमान है। तभी शांति का अनुभव हो जाता है और मनुष्य जीवन सफल हो जाता है।

प्रभू का पत्र

मेरे प्रिय…
सुबह तुम जैसे ही सो कर उठे, मैं तुम्हारे बिस्तर के पास ही खड़ा था। मुझे लगा कि तुम मुझसे कुछ बात
करोगे। तुम कल या पिछले हफ्ते हुई किसी बात या घटना के लिये मुझे धन्यवाद कहोगे। लेकिन तुम फटाफट चाय पी कर तैयार होने चले गए और मेरी तरफ देखा भी नहीं!!!

फिर मैंने सोचा कि तुम नहा के मुझे याद करोगे। पर तुम इस उधेड़बुन में लग गये कि तुम्हे आज कौन से कपड़े पहनने है!!!

फिर जब तुम जल्दी से नाश्ता कर रहे थे और अपने ऑफिस के कागज़ इक्कठे करने के लिये घर में इधर से उधर दौड़ रहे थे…तो भी मुझे लगा कि शायद अब तुम्हे मेरा ध्यान आयेगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

फिर जब तुमने आफिस जाने के लिए ट्रेन पकड़ी तो मैं समझा कि इस खाली समय का उपयोग तुम मुझसे बातचीत करने में करोगे पर तुमने थोड़ी देर पेपर पढ़ा और फिर खेलने लग गए अपने मोबाइल में और मैं खड़ा का खड़ा ही रह गया।

मैं तुम्हें बताना चाहता था कि दिन का कुछ हिस्सा मेरे साथ बिता कर तो देखो,तुम्हारे काम और भी अच्छी तरह से होने लगेंगे, लेकिन तुमनें मुझसे बात
ही नहीं की…

एक मौका ऐसा भी आया जब तुम
बिलकुल खाली थे और कुर्सी पर पूरे 15 मिनट यूं ही बैठे रहे,लेकिन तब भी तुम्हें मेरा ध्यान नहीं आया।

दोपहर के खाने के वक्त जब तुम इधर-
उधर देख रहे थे,तो भी मुझे लगा कि खाना खाने से पहले तुम एक पल के लिये मेरे बारे में सोचोंगे,लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दिन का अब भी काफी समय बचा था। मुझे लगा कि शायद इस बचे समय में हमारी बात हो जायेगी,लेकिन घर पहुँचने के बाद तुम रोज़मर्रा के कामों में व्यस्त हो गये। जब वे काम निबट गये तो तुमनें टीवी खोल लिया और घंटो टीवी देखते रहे। देर रात थककर तुम बिस्तर पर आ लेटे।
तुमनें अपनी पत्नी, बच्चों को शुभरात्रि कहा और चुपचाप चादर ओढ़कर सो गये।

मेरा बड़ा मन था कि मैं भी तुम्हारी दिनचर्या का हिस्सा बनूं…

तुम्हारे साथ कुछ वक्त बिताऊँ…

तुम्हारी कुछ सुनूं…

तुम्हे कुछ सुनाऊँ।

कुछ मार्गदर्शन करूँ तुम्हारा ताकि तुम्हें समझ आए कि तुम किसलिए इस धरती पर आए हो और किन कामों में उलझ गए हो, लेकिन तुम्हें समय
ही नहीं मिला और मैं मन मार कर ही रह गया।

मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूँ।

हर रोज़ मैं इस बात का इंतज़ार करता हूँ कि तुम मेरा ध्यान करोगे और
अपनी छोटी छोटी खुशियों के लिए मेरा धन्यवाद करोगे।

पर तुम तब ही आते हो जब तुम्हें कुछ चाहिए होता है। तुम जल्दी में आते हो और अपनी माँगें मेरे आगे रख के चले जाते हो।और मजे की बात तो ये है
कि इस प्रक्रिया में तुम मेरी तरफ देखते
भी नहीं। ध्यान तुम्हारा उस समय भी लोगों की तरफ ही लगा रहता है,और मैं इंतज़ार करता ही रह जाता हूँ।

खैर कोई बात नहीं…हो सकता है कल तुम्हें मेरी याद आ जाये!!!

ऐसा मुझे विश्वास है और मुझे तुम
में आस्था है। आखिरकार मेरा दूसरा नाम…आस्था और विश्वास ही तो है।

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तुम्हारा ईश्वर…👣

ज़िन्दगी की टेंशन खत्म करने वाली कहानी

ज़िन्दगी की टेंशन खत्म करने वाली कहानी

✍️एक व्यक्ति काफी दिनों से चिंतित चल रहा था जिसके कारण वह काफी चिड़चिड़ा तथा तनाव में रहने लगा था। वह इस बात से परेशान था कि घर के सारे खर्चे उसे ही उठाने पड़ते हैं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के ऊपर है, किसी ना किसी रिश्तेदार का उसके यहाँ आना जाना लगा ही रहता है,

✍️इन्ही बातों को सोच सोच कर वह काफी परेशान रहता था तथा बच्चों को अक्सर डांट देता था तथा अपनी पत्नी से भी ज्यादातर उसका किसी न किसी बात पर झगड़ा चलता रहता था
🌹❤️🌹
✍️एक दिन उसका बेटा उसके पास आया और बोला पिताजी मेरा स्कूल का होमवर्क करा दीजिये, वह व्यक्ति पहले से ही तनाव में था तो उसने बेटे को डांट कर भगा दिया लेकिन जब थोड़ी देर बाद उसका गुस्सा शांत हुआ तो वह बेटे के पास गया तो देखा कि बेटा सोया हुआ है और उसके हाथ में उसके होमवर्क की कॉपी है। उसने कॉपी लेकर देखी और जैसे ही उसने कॉपी नीचे रखनी चाही, उसकी नजर होमवर्क के टाइटल पर पड़ी!!

✍️होमवर्क का टाइटल था 🌹

👉वे चीजें जो हमें शुरू में अच्छी नहीं लगतीं लेकिन बाद में वे अच्छी ही होती हैं👈।

✍️इस टाइटल पर बच्चे को एक पैराग्राफ लिखना था जो उसने लिख लिया था। उत्सुकतावश उसने बच्चे का लिखा पढना शुरू किया बच्चे ने लिखा था •••
🌹
● ✍️मैं अपने फाइनल एग्जाम को बहुंत धन्यवाद् देता हूँ क्योंकि शुरू में तो ये बिलकुल अच्छे नहीं लगते लेकिन इनके बाद स्कूल की छुट्टियाँ पड़ जाती हैं

● ✍️मैं ख़राब स्वाद वाली कड़वी दवाइयों को बहुत धन्यवाद् देता हूँ क्योंकि शुरू में तो ये कड़वी लगती हैं लेकिन ये मुझे बीमारी से ठीक करती हैं

● ✍️मैं सुबह – सुबह जगाने वाली उस अलार्म घड़ी को बहुत धन्यवाद् देता हूँ जो मुझे हर सुबह बताती है कि मैं जीवित हूँ

● ✍️मैं ईश्वर को भी बहुत धन्यवाद देता हूँ जिसने मुझे इतने अच्छे पिता दिए क्योंकि उनकी डांट मुझे शुरू में तो बहुत बुरी लगती है लेकिन वो मेरे लिए खिलौने लाते हैं, मुझे घुमाने ले जाते हैं और मुझे अच्छी अच्छी चीजें खिलाते हैं और मुझे इस बात की ख़ुशी है कि मेरे पास पिता हैं क्योंकि मेरे दोस्त सोहन के तो पिता ही नहीं हैं

✍️बच्चे का होमवर्क पढने के बाद वह व्यक्ति जैसे अचानक नींद से जाग गया हो। उसकी सोच बदल सी गयी। बच्चे की लिखी बातें उसके दिमाग में बार बार घूम रही थी। खासकर वह last वाली लाइन। उसकी नींद उड़ गयी थी। फिर वह व्यक्ति थोडा शांत होकर बैठा और उसने अपनी परेशानियों के बारे में सोचना शुरू किया

●● ✍️मुझे घर के सारे खर्चे उठाने पड़ते हैं, इसका मतलब है कि मेरे पास घर है और ईश्वर की कृपा से मैं उन लोगों से बेहतर स्थिति में हूँ जिनके पास घर नहीं है।
🌹
●● ✍️मुझे पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, इसका मतलब है कि मेरा परिवार है, बीवी बच्चे हैं और ईश्वर की कृपा से मैं उन लोगों से ज्यादा खुशनसीब हूँ जिनके पास परिवार नहीं हैं और वो दुनियाँ में बिल्कुल अकेले हैं।
🌹
●● ✍️मेरे यहाँ कोई ना कोई मित्र या रिश्तेदार आता जाता रहता है, इसका मतलब है कि मेरी एक सामाजिक हैसियत है और मेरे पास मेरे सुख दुःख में साथ देने वाले लोग हैं।
🌹🌹
✍️हे ! मेरे भगवान् ! तेरा बहुंत बहुंत शुक्रिया ••• मुझे माफ़ करना, मैं तेरी कृपा को पहचान नहीं पाया।
इसके बाद उसकी सोच एकदम से बदल गयी, उसकी सारी परेशानी, सारी चिंता एक दम से जैसे ख़त्म हो गयी। वह एकदम से बदल सा गया। वह भागकर अपने बेटे के पास गया और सोते हुए बेटे को गोद में उठाकर उसके माथे को चूमने लगा और अपने बेटे को तथा ईश्वर को धन्यवाद देने लगा।
❤️🌹
✍️हमारे सामने जो भी परेशानियाँ हैं, हम जब तक उनको नकारात्मक नज़रिये से देखते रहेंगे तब तक हम परेशानियों से घिरे रहेंगे लेकिन जैसे ही हम उन्हीं चीजों को, उन्ही परिस्तिथियों को सकारात्मक नज़रिये से देखेंगे, हमारी सोच एकदम से बदल जाएगी, हमारी सारी चिंताएं, सारी परेशानियाँ, सारे तनाव एक दम से ख़त्म हो जायेंगे और हमें मुश्किलों से निकलने के नए – नए रास्ते दिखाई देने लगेंगे।

प्रारब्ध भोग

एक व्यक्ति हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करता था। धीरे धीरे वह काफी बुजुर्ग हो चला था इसीलिए एक कमरे मे ही पड़ा रहता था ।

 जब भी उसे शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वह अपने बेटो को आवाज लगाता था और बेटे ले जाते थे।

धीरे धीरे कुछ दिन बाद बेटे कई बार आवाज लगाने के बाद भी कभी कभी आते और देर रात तो नहीं भी आते थे।इस दौरान वे कभी-कभी गंदे बिस्तर पर ही रात बिता दिया करते थे।

अब और ज्यादा बुढ़ापा होने के कारण उन्हें कम दिखाई देने लगा था एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही उन्होंने आवाज लगायी, तुरन्त एक लड़का आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ उनको निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है। अब ये रोज का नियम हो गया।

एक रात उनको शक हो जाता है कि, पहले तो बेटों को रात में कई बार आवाज लगाने पर भी नही आते थे। लेकिन ये  तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है।

एक रात वह व्यक्ति उसका हाथ पकड लेता है और पूछता है कि सच बता तू कौन है ? मेरे बेटे तो ऐसे नही हैं।

अभी अंधेरे कमरे में एक अलौकिक उजाला हुआऔर उस लड़के रूपी ईश्वर ने अपना वास्तविक रूप दिखाया।

 वह व्यक्ति रोते हुये कहता है : हे प्रभु आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे है। यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना।

 प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध है। आप मेरे सच्चे साधक है; हर समय मेरा नाम जप करते है इसलिये मै आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ।

 व्यक्ति कहता है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है; क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है।

 प्रभु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है; ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है; लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा । यही कर्म नियम है । इसलिए आपके प्रारब्ध मैं स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ।

ईश्वर कहते है: प्रारब्ध तीन तरह के होते है :

मन्द,
तीव्र, तथा
तीव्रतम

मन्द प्रारब्ध मेरा नाम जपने से कट जाते है। तीव्र प्रारब्ध किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते है। पर तीव्रतम प्रारब्ध भुगतने ही पडते है।

लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं; उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ।

प्रारब्ध पहले रचा,
पीछे रचा शरीर।
तुलसी चिन्ता क्यों करे,
भज ले श्री रघुबीर।।

आपका जीवन मंगलमय हो!

Apple Car faces make-or-break 2022 despite ‘hire and fire’ past

​​​​It’s hard to believe we’re approaching year eight of Apple’s work on a self-driving car.

For all the fits and starts, 2022 could prove to be the project’s most pivotal.

The original iPhone was famously in the lab for about three years before hitting the market.

The first iPad and the Apple Watch also were in development for about that long. Work on Apple’s upcoming mixed-reality headset began around 2016. If all goes according to plan, it’ll be introduced at the six-year mark, sometime in 2022.

(Also read: Apple’s electric car could debut as soon as 2025)

All those new products saw fairly consistent leadership during their gestation periods. But the Apple Car, as many industry watchers have dubbed the company’s autonomous vehicle, has been an exercise in leadership shuffling.

The project kicked off in 2014 at the direction of Steve Zadesky, a former Ford engineer turned iPhone and iPod executive. It later was put into the hands of former hardware division chief Dan Riccio and subsequently his predecessor Bob Mansfield, who retired last year. Ex-Tesla executive Doug Field was at the helm for a stretch from 2018 until September.

Upon Field’s departure from the company, the keys to the project landed in the hands of Kevin Lynch. Unlike the prior four leaders, Lynch has neither hardware leadership expertise nor a history in the car world, though he is known to drive a Tesla. His experience stops at software. Lynch did transform the Apple Watch from a product without a clear purpose into an indispensable device for notifications and health monitoring for millions of users.

Software is core to the Apple Car in at least two ways: the underlying self-driving software that will power the car and, as with all things Apple, the operating system users will interact with to operate the vehicle.

Upon taking charge, Lynch instilled a new, singular direction for the project: a fully-autonomous car that eschews a steering wheel and pedals and aims for a limousine-like experience. He also pushed the development team, known as the Special Projects Group, to pick up the pace of work and aim for an introduction of the car as early as 2025, I reported in November.

Now that Lynch has figured out what he wants from the project, he and Apple must execute on that vision. The biggest challenge, aside from perfecting the technology, will be to retain the talent that will make this car a reality. Apple declined to comment for this column.

While Field was, in name and title, the biggest departure from the Apple Car team this year, he was just one of many people who’ve moved on. In early 2021, the wave of departures started with four of the company’s top Apple Car leaders, all of which reported to Field: Dave Scott, Jaime Waydo, Dave Rosenthal and Benjamin Lyon. Field then bolted in September for Ford. Michael Schwekutsch, who ran hardware for Apple’s project, was soon to follow.

It’s not just top managers who’ve resigned. Recently, at least three key engineers who worked on battery technology, drive train systems and self-driving sensors left. Some of the ex-Apple employees have joined flying taxi startups. So, do these engineers believe they’re more likely to launch a flying car than a self-driving Apple vehicle for streets?

The coming year will be telling for Apple. While it has the vision, it needs to hire and keep the right people to make it all work. If it can’t figure out how to do that after a year under its fifth Apple Car chief, maybe it should reconsider the feasibility of the project – or just put its nearly $200 billion in cash to work and buy some new EV startups to get it rolling.

This story has been published from a wire agency feed without modifications to the text. Only the headline has been changed.

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कर्म का सिद्धांत

कर्म का सिद्धांत

अस्पताल में एक एक्सीडेंट का केस आया ।
अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की। दो-तीन घंटे के ओपरेशन के बाद डॉक्टर बाहर आया और अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो। और उससे इलाज व दवा के पैसे न लेने के लिए भी कहा ।

तकरीबन 15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा।
जब बिल्कुल ठीक हो गया और उसको डिस्चार्ज करने का दिन आया तो उस मरीज का तकरीबन ढाई लाख रुपये का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया।
डॉक्टर ने अपने अकाउंट मैनेजर को बुला करके कहा …
इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है। ऐसा करो तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ।
मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया।
डॉक्टर ने मरीज से पूछा
प्रवीण भाई ! मुझे पहचानते हो!
मरीज ने कहा लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है।
डॉक्टर ने कहा …याद करो ,अंदाजन दो साल पहले सूर्यास्त के समय शहर से दूर उस जंगल में तुमने एक गाड़ी ठीक की थी। उस रोज मैं परिवार सहित पिकनिक मनाकर लौट रहा था कि अचानक कार में से धुआं निकलने लगा और गाड़ी बंद हो गई। कार एक तरफ खड़ी कर हम लोगों ने चालू करने की कोशिश की, परंतु कार चालू नहीं हुई।
अंधेरा थोड़ा-थोड़ा घिरने लगा था। चारों और जंगल और सुनसान था।
परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता और भय की लकीरें दिखने लगी थी और सब भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि कोई मदद मिल जाए।

थोड़ी ही देर में चमत्कार हुआ। बाइक के ऊपर तुम आते दिखाई पड़े ।
हम सब ने दया की नजर से हाथ ऊंचा करके तुमको रुकने का इशारा किया।

तुमने बाईक खड़ी कर के हमारी परेशानी का कारण पूछा।
तुमने कार का बोनट खोलकर चेक किया और कुछ ही क्षणों में कार चालू कर दी।

हम सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। हमको ऐसा लगा कि जैसे भगवान ने आपको हमारे पास भेजा है क्योंकि उस सुनसान जंगल में रात गुजारने के ख्याल मात्र से ही हमारे रोगंटे खड़े हो रहे थे। तुमने मुझे बताया था कि तुम एक गैराज चलाते हो ।

मैंने तुम्हारा आभार जताते हुए कहा था कि रुपए पास होते हुए भी ऐसी मुश्किल समय में मदद नहीं मिलती। तुमने ऐसे कठिन समय में हमारी मदद की, इस मदद की कोई कीमत नहीं है, यह अमूल्य है।
परंतु फिर भी मैं पूछना चाहता हूँ कि आपको कितने पैसे दूं ?

उस समय तुमने मेरे आगे हाथ जोड़कर जो शब्द कहे थे, वह शब्द मेरे जीवन की प्रेरणा बन गये हैं।

तुमने कहा था कि…..
“मेरा नियम और सिद्धांत है कि मैं मुश्किल में पड़े व्यक्ति की मदद के बदले कभी कुछ नहीं लेता। मेरी इस मजदूरी का हिसाब भगवान् रखते हैं। “
उसी दिन मैंने सोचा कि जब एक सामान्य आय का व्यक्ति इस प्रकार के उच्च विचार रख सकता है, और उनका संकल्प पूर्वक पालन कर सकता है, तो मैं क्यों नहीं कर सकता। और मैंने भी अपने जीवन में यही संकल्प ले लिया है। दो साल हो गए है,मुझे कभी कोई कमी नहीं पड़ी, अपेक्षा पहले से भी अधिक मिल रहा है।

यह अस्पताल मेरा है।तुम यहां मेरे मेहमान हो और तुम्हारे ही बताए हुए नियम के अनुसार मैं तुमसे कुछ भी नहीं ले सकता।

ये तो भगवान् की कृपा है कि उसने मुझे ऐसी प्रेरणा देने वाले व्यक्ति की सेवा करने का मौका मुझे दिया।

ऊपर वाले ने तुम्हारी मजदूरी का हिसाब रखा और वो हिसाब आज उसने चुका दिया। मेरी मजदूरी का हिसाब भी ऊपर वाला रखेगा और कभी जब मुझे जरूरत होगी, वो जरूर चुका देगा।
डॉक्टर ने प्रवीण से कहा ….
तुम आराम से घर जाओ, और कभी भी कोई तकलीफ हो तो बिना संकोच के मेरे पास आ सकते हो।

प्रवीण ने जाते हुए चेंबर में रखी भगवान् कृष्ण की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर कहा कि….
हे प्रभु आपने आज मेरे कर्म का पूरा हिसाब ब्याज समेत चुका दिया।

” याद रखें कि एक बार भगवान् चाहे माफ कर दे, परंतु कर्मों का हिसाब चुकाना ही पड़ता है..!!

🙏🏾 जय सियाराम🙏🏻