Category: Stories

  • सच मानिये थोड़ी देर में आप की समस्या का समाधान मिल जायेगा।

    एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को उसके विवाह के लिए योग्य वर नहीं मिल पा रहा था। राजा ने पुत्री की भावनाओं को समझते हुए बहुत सोच-विचार करके उसका विवाह एक गरीब संन्यासी से करवा दिया। राजा ने सोचा कि एक संन्यासी…

  • भगवान सदैव अपने भक्तों के साथ रहता है

    भगवान सदैव अपने भक्तों के साथ रहता है एक अमीर आदमी था। उसने समुद्र मे अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई। छुट्टी के दिन वह नाव लेकर समुद्र की सेर करने निकला। आधे समुद्र तक पहुंचा ही था कि अचानक एक जोरदार तुफान आया। उसकी नाव पुरी तरह से तहस-नहस हो गई लेकिन वह…

  • माता-पिता तो केवल इस शरीर को जन्म देते हैं किंतु आत्मतत्त्व का उपदेश देने वाले आचार्य (सद्गुरु) द्वारा जो जन्म होता है! वह दिव्य है! अजर-अमर है।

    एक बहुत ही बड़े उद्योगपति का पुत्र कॉलेज में अंतिम वर्ष की परीक्षा की तैयारी में लगा रहता है – तो जब भी उसके पिता उसकी परीक्षा के विषय में उससे पूछते हैं तो वो जवाब में कहता है कि हो सकता है कॉलेज में अव्वल आऊँ, अगर मै अव्वल आया तो मुझे वो महंगी…

  • विश्वास की डोर

    विश्वास की डोर किसी गाँव में राम नाम का एक नवयुवक रहता था। वह बहुत मेहनती थे, पर हमेशा अपने मन में एक शंका लिए रहता कि वो अपने कार्यक्षेत्र में सफल होगा या नहीं! कभी-कभी वो इसी चिंता के कारण आवेश में आ जाता और दूसरों पर क्रोधित भी हो उठता। एक दिन उसके…

  • मन की शांति

    मन की शांति एक बार एक व्यक्ति की घड़ी कहीं खो गयी! तमाम कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली! उसने निश्चित किया कि वह इस काम में बच्चों की मदद लेगा! उसने सब बच्चों से कहा कि तुममें से जो कोई भी मेरी खोई घड़ी खोज देगा उसे मैं सौ रूपये दूंगा। घंटों बीत…

  • प्रेम और मोह में क्या अंतर है?

    प्रेम और मोह में क्या अंतर है? प्रेम निस्वार्थ होता है। मोह स्वार्थी होता है। बिना कोई अपेक्षा प्रेम दिया जाता है। प्रेम मांगा नही जाता।प्रेम मन को बेहद में रखता है। मोह में मेरापन होता है। मोह में चाहना रहती है कि मेरे से सामने वाला भी लगाव रखे मेरे उपर अटेंशन दे। मोह…

  • सुलझे हुए संस्कारो वाली

    सुलझे हुए संस्कारो वाली “बिटिया कुछ है क्या खाने को” दोपहर तीन बजे के आसपास रामेश्वर बाबू ने बहु के कमरे में आवाज लगाते हुए कहा “ये भी कोई वक्त है खाने का और अभी ग्यारह बजे दिया था ना दूध वाला दलिया फिर अब तीन बजे है जो रोटी सब्जी बनाई थी खत्म हो…

  • क्रोध को क्रोध से नहीं जीता जा सकता

    क्रोध को क्रोध से नहीं जीता जा सकता एक देवरानी और जेठानी में किसी बात पर जोरदार बहस हुई और दोनो में बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक दूसरे का मुँह तक न देखने की कसम खा ली और अपने-अपने कमरे में जाकर खुद को दरवाजा बंद कर लिया। परंतु थोड़ी देर बाद…

  • भगवान आप अपना ध्यान रखना

    भगवान आप अपना ध्यान रखना एक बच्चा रोज अपने दादा जी को सायंकालीन पूजा करते देखता था। बच्चा भी उनकी इस पूजा को देखकर अंदर से स्वयं इस अनुष्ठान को पूर्ण करने की इच्छा रखता था, किन्तु दादा जी की उपस्थिति उसे अवसर नही देती थी। एक दिन दादा जी को शाम को आने में…

  • कहहु भगति पथ कवन प्रयासा।

    कहहु भगति पथ कवन प्रयासा।जोग न मख जप तप उपवासा।। सरल सुभाऊ न मन कुटिलाई।जथा लाभ संतोष सदाई।।~(उत्तरकांड ४५/१) राज्याभिषेक उपरांत एक बार रामजी ने सभी नगरवासियों को बुलाया है। सभी को इसलोक व परलोक दोनों जगह सुखी होने का उपाय अपनी भक्ति बताया है। वे आगे कहते हैं कि भक्ति में कौन का परिश्रम…