September 13, 2022 in Stories
कहहु भगति पथ कवन प्रयासा।
कहहु भगति पथ कवन प्रयासा।जोग न मख जप तप उपवासा।। सरल सुभाऊ न मन कुटिलाई।जथा लाभ संतोष सदाई।।~(उत्तरकांड ४५/१) राज्याभिषेक उपरांत एक बार रामजी ने सभी नगरवासियों को बुलाया है। सभी को इसलोक व परलोक दोनों जगह सुखी होने का उपाय अपनी भक्ति बताया है। वे आगे कहते हैं कि भक्ति में कौन का परिश्रम […]






