Category: Stories

  • एक अदृश्य स्टिकर

    एक अदृश्य स्टिकर आगे वाली कार कछुए की तरह चल रही थी और बार-बार हॉर्न देने पर भी रास्ता नहीं दे रही थी… मैं अपना आपा खो कर चिल्लाने ही वाला था कि मैंने कार के पीछे लगा एक छोटा सा स्टिकर देखा जिस पर लिखा था _”शारीरिक विकलांग ; कृपया धैर्य रखें” ! और…

  • !! पैरों के निशान !!

    !! पैरों के निशान !! जन्म से ठीक पहले एक बालक भगवान से कहता है, ”प्रभु आप मुझे नया जन्म मत दीजिये! मुझे पता है पृथ्वी पर बहुत बुरे लोग रहते हैं! मैं वहाँ नहीं जाना चाहता!” और ऐसा कह कर वह उदास होकर बैठ जाता है। भगवान् स्नेह पूर्वक उसके सर पर हाथ फेरते…

  • हर परीक्षा पास करने की कुन्जी- अटूट विश्वास!

    हर परीक्षा पास करने की कुन्जी- अटूट विश्वास! एक बार श्री कृष्ण जी के गुरु अपने शिष्यों के साथ कही जा रहे थे। रास्ते में किसी जंगल में रूककर उन्होंने आराम किया। उसी के पास ही द्वारका नगरी थी। गुरुदेव ने अपने शिष्यों को भेजा कि श्री कृष्ण को बुला कर लाओ। तब उनके शिष्य…

  • गुरु नानक देव जी और गरीब की रोटी

    गुरु नानक देव जी और गरीब की रोटी गुरु नानक देव जी के समय एक प्रतिष्ठित व धनी व्यक्ति रहता था जिसका नाम मलिक भागो था| एक दिन उसने अपने पिता का श्राद्ध किया| दूर-दूर से संत महात्मा बुलाए गए और भोजन खिलाया गया, ताकि उसे धर्म लाभ मिल सके। उन दिनों गुरु नानक देव…

  • आत्मसुधार

    आत्मसुधार एक बार एक व्यक्ति दुर्गम पहाड़ पर चढ़ा! वहाँ पर उसे एक महिला दिखीं! वह व्यक्ति बहुत अचंभित हुआ! उसने जिज्ञासा व्यक्त की कि “वे इस निर्जन स्थान पर क्या कर रही हैं? उन महिला का उत्तर था – “मुझे अत्यधिक काम हैं! इस पर वह व्यक्ति बोला, “आपको किस प्रकार का काम है…

  • सबसे बड़ी समस्या – हमारी सोच

    सबसे बड़ी समस्या – हमारी सोच बहुत समय पहले की बात है! एक महाज्ञानी पंडित हिमालय की पहाड़ियों में कहीं रहते थे। लोगों के बीच रह कर वह थक चुके थे और अब ईश्वर भक्ति करते हुए एक सादा जीवन व्यतीत करना चाहते थे लेकिन उनकी प्रसिद्धि इतनी थी कि लोग दुर्गम पहाड़ियों, सकरे रास्तों,…

  • कष्ट और धैर्य

    कष्ट और धैर्य एक बार की बात है! एक गुरू अपने कुछ शिष्यों के साथ पैदल ही यात्रा पर थे। वे चलते-चलते किसी गांव में पहुंच गए। ये गांव काफी बड़ा था, वहां घूमते हुए उन्हें काफी देर हो गयी थी। गुरू जी थक चुके थे और उन्हें बहुत प्यास लगी, तो उन्होनें अपने एक…

  • क्या हम भी गुलामों के गुलाम हैं?

    क्या हम भी गुलामों के गुलाम हैं?😐 सिकंदर महान ने अपने रण कौशल से ग्रीस, इजिप्ट समेत उत्तर भारत तक अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था। सालों से युद्ध करती सिकंदर की सेना बहुत थक चुकी थी और अब वो अपने परिवारों के पास वापस लौटना चाहती थी। सिकंदर को भी अपने सैनिकों की इच्छा…

  • समय और भाग्य

    समय और भाग्य चमनलाल सारा दिन धूप में इधर-उधर घूम-फिर कर टूटा-फूटा सामान और कबाड़ जमा करता, फिर शाम को उसे बड़े कबाड़ी की दुकान पर बेचकर पेट भरने लायक कमा लेता था। एक दिन वह एक घर से पुराना सामान खरीद रहा था। घर के मालिक ने उसे एक पुराना पानदान भी दिया, जो…

  • कर्मो का खेल – कर्म का लेन देन

    कर्मो का खेल – कर्म का लेन देन एक फौजी था। उसके मां नहीं, बाप नहीं, शादी नहीं, बच्चे नहीं, भाई नहीं, बहन नहीं। अकेला ही कमा कमा के फौज में जमा करता जा रहा था, तो थोड़े दिन में एक सेठ जी जो फौज में माल सप्लाई करते थे तो उनसे उनका परिचय हो…