इस मनुष्य चोले के अंदर एक ऐसी चीज़ रखी हुई है, जो अनंत है।

इस मनुष्य चोले के अंदर एक ऐसी चीज़ रखी हुई है, जो अनंत है। सभी जीवों का प्राण है। सुखमय और आनंददायक है। उस चीज़ को पहचानो।

जब तक तुम उस चीज़ को नहीं पहचानोगे, इस जीवन को सफल नहीं कर पाओगे।

मैं लोगों से यही कहता हूँ कि तुम्हारे जीवन में शांति होनी चाहिए। खोजो इसको, जहाँ मिले, वहीं ठीक है। अगर कहीं न मिले, तो हम हैं। हम दे सकते हैं। हमने लाखों लोगों को दिया है।

  • प्रेम रावत

मानव अपने मन से ही परेशान….

मानव जीवन का आज अभ्यास ऐसा हो गया है कि उसने अपने भीतर ही महाभारत का मैदान तैयार करके दुश्मनों की सेना खड़ी कर ली है।
वह हर पल खुद से ही युद्ध लड़ रहा है।
जैसे ही सुबह आँख खुलती है, भीतर से दुश्मन सामने खड़े मिलते हैं।
बहुत सारे लोग तो आंँख खुलने से पहले करवट लेने के साथ ही अशान्त हो जाते हैं।
इसलिए आत्मज्ञानी को सच्चे सन्तों से प्राणों के भीतर की शक्ति को पहचान कर शान्ति के अनुभव का अभ्यास पर अधिक बल देना है।

समय के महापुरुष कहते हैं कि
सत्य कभी मर नहीं सकता और असत्य कभी जीवित नहीं रहता।
प्राणों के भीतर की शक्ति सत्य और अमर है जो आणविक शक्ति से भी अधिक शक्तिशाली है।
शान्ति बाहर नहीं है, शान्ति तुम्हारे भीतर है।
मानवता वही है जो तुम अपने लिए चाहते हो, वही दूसरों के प्रति करो।

समुद्र का स्वाद चखने के लिए सारे समुद्र को पीने की आवश्यकता नहीं है!
इसी प्रकार -शान्ति का अनुभव करने के लिए वेद, शास्त्र, पुराण, कुरान, ग्रंथ, बाईबल इत्यादि का जानकार होना भी आवश्यक नहीं है।
इन अनवरत आती जाती स्वांसों के लिए कैसा शास्त्रार्थ?
सभी अपने-अपने धर्मों का पालन करते हुए और सम्पूर्ण जिम्मेदारी निभाते हुए शान्ति का अनुभव कर सकते हैं।
बस, हर रोज निरन्तर अपनी दिनचर्या से कुछ समय लगभग एक घंटा भजन-अभ्यास के लिए निकालना होगा।
निरन्तर लम्बे अभ्यास से आने वाले विचारों का प्रवाह रूक जाता है और फिर ऐसा पल आता है कि मन नाम-सुमिरण के साथ एकाकार हो जाता है और चित्त हृदय की तरफ उन्मुख हो जाता है।
तभी प्राणों के भीतर की उस अविनाशी शक्ति की पहचान से स्वयं का बोध हो जाता है और हृदय में विराजमान उस अविनाशी के सानिध्य में शान्ति के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल हो जाता है।

होली की हार्दिक बधाई

होली की हार्दिक बधाई

आपको और आपके परिवार को होली के पावन पर्व के शुभ अवसर पर मेरे और मेरे परिवार की तरफ से, हार्दिक शुभकामनाये!

होली के रंगो की तरह आपकी जिंदगी भी, खुशियों के रंगो से भरी हो,मेरी यही कामना है….

आदित्य कुमार

होली का त्योहार क्यों मनाते हैं 

होलिका दहन

हिरण्यकश्यपु के कहने पर होलिका प्रह्लाद को मारने के लिए अपनी गोद में बैठाकर आग में प्रवेश कर कई। किंतु भगवान विष्णु की कृपा से तब भी भक्त प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। तभी से बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में होलिका दहन होने लगा और ये त्योहार मनाया जाने लगा।

रंगों का त्योहार

होली, जिसे ‘रंगों का त्योहार’ के रूप में जाना जाता है, फाल्गुन (मार्च) के महीने में पड़ने वाली पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। होली मनाने के लिए तेज संगीत, ड्रम आदि के बीच विभिन्न रंगों और पानी को एक दूसरे पर फेंका जाता है। भारत में कई अन्य त्योहारों की तरह, होली भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

होली कब शुरू हुई थी?

ज्ञात रूप से यह त्योहार 600 ईसा पूर्व से मनाया जाता रहा है। 5. रामगढ़ के अभिलेख : विंध्य क्षेत्र के रामगढ़ स्थान पर स्थित ईसा से 300 वर्ष पुराने एक अभिलेख में भी इसका उल्लेख किया गया है। इससे यह सिद्ध होता हैं कि यह त्योहार ईसा से 300 वर्ष पूर्व भी मनाया जाता था।

2023 में होली की असली तारीख क्या है?

आपको बता दें कि इसे पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भारत में होली 2023 की तारीख 8 तारीख को होगी। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होली मनाई जाती है। साल 2023 में रंगों का त्योहार होली 8 मार्च 2023 को पड़ रहा है।1

2023 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

पञ्चांग के अनुसार होलिका दहन 07 मार्च 2023 को होलिका दहन करें. 6 मार्च 2023 दिन सोमवार समय रात्रि 12 बजकर 23 मिनट से 01 बजकर 35 मिनट तक होलिका दहन किया जाएगा. परंपरा अनुसार काशी में होली 07 मार्च 2023 को मनाया जायेगा

आंखों, नाक, मुंह और खुले घावों के आस-पास रंग न लगाएं । – भांग एक साथ न खाएं और पिएं, खासतौर पर मिठाई। इसके अलावा, रंगों से होने वाली किसी भी प्रतिक्रिया को रोकने के लिए अपनी त्वचा और बालों को ढंकना या सुरक्षित रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

स्वार्थ ने भक्ति को भी व्यापार बना दिया….

वर्तमान में प्रत्येक मनुष्य बिना लेन-देन के कोई काम करता ही नहीं है।आत्मज्ञान लेने में भी मनुष्य की यह सोच बन गई है कि ज्ञान लेने के बाद मुझे क्या फायदा मिलेगा? मुझे कितना धन दौलत मिलेगी? मन के अन्दर उथल-पुथल, हिसाब-किताब और लेन-देन की इस मानसिकता ने आत्मज्ञान को भी व्यापार बना दिया है। जबकि महाराजी पिछले ६० साल से इसे निशुल्क दे रहे हैं!

मन्दिर, मस्जिद, गुरुद्वारा व चर्च में जो भीड़ देखी जाती है उसमें भी ज्यादातर भीड़ तो सौदागरों की होती है।
सच्ची श्रद्धा और सच्चा प्रेम भी लेन-देन की वस्तुयें हो गई हैं।
हमने भगवान को यह दिया है और इतना मिल जाए ऐसी बात भगवान से करने में सभी माहिर हैं।
भले ही मामला स्वार्थ का हो, पर मन्दिर में भगवान से बातचीत करने की कला तो मनुष्य सीख चुका है। लेकिन सौदेबाजों के लाख शोर के बाद भी भगवान शुन्य बना रहता है।
इसलिए क्यों न ऐसा प्रयोग स्वयं के हृदय मन्दिर में विराजमान उस अविनाशी के लिए भी किया जायें। आज के अशान्त जीवन को देखते हुए ऐसा प्रयोग करना बहुत जरूरी है।

हृदय के मन्दिर की विशेषता होती है कि वहांँ एक “अव्यक्त शब्द ब्रह्म” की अनुगूंँज सदैव चलती रहती है। हररोज क्रियाओं के अभ्यास से मन को “नाम-सुमिरण” की धुन में लीन करके हृदय की वह गूंँज सुनिये। न उसके कोई शब्द हैं, न अर्थ। लेकिन ऐसा अनुभव होगा कि वह गूंँज कह रही है : अच्छा हुआ तुम आ गए।

पहली बार ऐसा लग रहा है कि यहांँ कोई सौदा करने नहीं आया है। आप साक्षी भाव से बैठे हो। धीरे-धीरे यह गूंँज अनुभव कराने लगेगी कि आप वे नहीं हैं, जो हररोज मन्दिर जाकर कुछ मांँगते हैं, सौदेबाजी करते हैं। बल्कि आप कुछ और हैं।
अभ्यास से जैसे ही मन “नाम-सुमिरण” के साथ एकाकार होगा तो पहली निकटता हृदय के अविनाशी की मिल जाएगी। उसी पल हृदय के नाम-सुमिरण से शान्ति का अनुभव हो जायेगा और तब पता चलता है कि आज सचमुच वह मकसद पुरा हुआ जिसके लिए यह स्वांँस आ रहा है, जा रहा है।

हमारे लिय खुशखबरी यही है कि आज भी महाराजी हमको हमसे मिलाने की प्रक्रिया के हमारी सहायता के लिय हमेशा तयार हैं बस हमको अपने अन्दर की यात्रा के लिय खुद को तयार करना है!

पांचतत्व का पुतरा, मानुष धरिया नाम।

पांचतत्व का पुतरा, मानुष धरिया नाम।
दिन चार के कारने, फिर फिर रोकें ठाम।

अर्थ: पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश तत्व से मिलकर बने ढांचे को “मनुष्य” नाम रख दिया। चार दिन के क्षणिक सुख,विलास में लिप्त होकर जीव ने अपने मोक्ष का द्वार बंद कर लिया।

ईश्वर की सत्ता

एक बार किसी विद्वान् से
एक बूढ़ी औरत ने पूछा कि
क्या इश्वर सच में होता है ?
.
उस विद्वान् ने कहा कि
माई आप क्या करती हो ?
.
उसने कहा कि मै तो दिन
भर घर में अपना चरखा
कातती हूँ और घर के बाकि
काम करती हूँ , और मेरे
पति खेती करते हैं .
.
उस विद्वान ने कहा कि
माई क्या ऐसा भी कभी
हुआ है कि आप का चरखा
बिना आपके चलाये चला
हो , या कि बिना किसी के
चलाये चला हो ?
.
उसने कहा ऐसा कैसे
हो सकता है कि वो बिना
किसी के चलाये चल जाये ?
.
ऐसा तो संभव ही नहीं है.
.
विद्वान् ने फिर कहा कि
माई अगर आपका चरखा
बिना किसी के चलाये नहीं
चल सकता…..
.
तो फिर ये पूरी सृष्टि किसी
के बिना चलाये कैसे चल
सकती है ?
.
और जो इस पूरी सृष्टि
को चला रहा है वही इसका
बनाने वाला भी है और उसे
ही इश्वर कहते हैं.
.
उसी तरह किसी और
ने उसी विद्वान् से पूछा कि
आदमी मजबूर है या सक्षम ?
.
उन्होंने कहा कि अपना
एक पैर उठाओ, उसने
उठा दिया,
.
उन्होंने कहा कि अब
अपना दूसरा पैर भी उठाओ,
.
उस व्यक्ति ने कहा ऐसा
कैसे हो सकता है ?
.
मै एक साथ दोनों पैर
कैसे उठा सकता हूँ ?
.
तब उस विद्वान् ने कहा
कि इंसान ऐसा ही है,
.
ना पूरी तरह से मजबूर
और ना ही पूरी तरह से
सक्षम
.
उसे इश्वर ने एक हद तक
सक्षम बनाया है और उसे
पूरी तरह से छूट भी नहीं है .
.
उसको इश्वर ने सही गलत
को समझने कि शक्ति दी है…
.
और अब उस पर निर्भर
करता है कि वो सही और
गलत को समझ कर अपने
कर्म को करे…

हृदय भरा हुआ (Heartful)

आप सभी को वेलेंटाइन डे की शुभकामनाएं।

अविनाशी विचार नहीं है।

आपके अंदर एक विशेषता मौजूद है।

ज्ञान मिलने के बाद जिस दिन आप उस अविनाशी से अपना रिश्ता बनाते हैं तो वो फूल खिलने लगता है।

क्या वो फूल खिलता रहेगा…. ये इस चीज पर निर्भर करना है कि आप उसे मैला न करें।

ये फूल तभी खिलेगा जब आप उसको मौका देंगे। अवसर दीजिए उस फूल को खिलने के लिए।

जब फूल खिले तो उसके साक्षी बनिये, ये नहीं देखिए कि ये फूल कैसा दिखेगा।

आपने अपने जीवन में निराशाओं को एकत्र किया है या फिर आनंद को, समझ को एकत्र किया है…?

मेरा आपसे प्रश्न है कि आप अपने आप को क्या तोहफा देंगे ?

प्रशंसा कीजिए उस फूल की जो खिला है। यह हर बार हर समय ऐसा नहीं होगा।

क्या आप तैयार हैं अपने जीवन में उस फूल को खिलते हुए देखने के लिए, क्योंकि वह फूल ज्ञान है।

और जब वह फूल खिलता है तो सचमुच में आप अपने इस जीवन के उद्देश्य को परिपूर्ण कर पाएंगे।

बाहर की सभी चीजें बदलती रहती है।

प्रशंसा करना सीखिये उस आनंद की, इस स्वास की।

आप लोगों को खुश करने की कोशिश कर सकते हैं पर आखिर में आप किसी को खुश नहीं कर पाते, क्योंकि आपने अपने आप को खुश नहीं किया है।

सरलता आपसे शुरू होती है, जीवन की समझ सचमुच में आपसे शुरू होती है।

आप बहुत भाग्यशाली हैं अगर आपने उस फूल को खिलने दिया।

आप बहुत भाग्यशाली हैं, अगर आपने अपने आप को समझ पाया।

आप एक छोटी सी बूंद हैं। जब आप बूंद बने, आप उस समुद के साथ नहीं पर वो समुद आपके अंदर था।

तो आप समुद में थे, अब आप बूंद हैं और समुद्र आपके अंदर है और एक दिन आप उस समुद्र में मिल जाएंगे, और जब ऐसा होगा तो बात यहीं खत्म।

कितनी गूढ़ बात है ये, परन्तु आप इसकी चर्चा नहीं कर सकते, आप इसका अनुभव कर सकते हैं। आप उस समुद्र का अनुभव कर सकते हैं।

आप Y O U एक बूंद हैं। दिखावा मत कीजिये कि आप समुद हैं।

अगर ये आपके चाहिए तो मैं इसको सम्भव बना सकता हूँ।

पहली बात कि बीज आपके अंदर है, इसको फलने-फूलने का मौका दीजिए।

ज्ञान का सबसे बड़ा दुश्मन अपेक्षाएं हैं।

आपकी अपेक्षाएं आपके समझ को खत्म कर देती हैं।

उस अविनाशी नें आपसे हमेशा यह प्रश्न किया है कि क्या मैं आपका प्रेमी बन सकता हूँ।

प्रेम क्या है, खजूर के पेड़ पर चढ़ने जैसा है, यदि चढ़ गये तो मीठे मीठे खजूर मिलेंगे और यदि गिर गए तो बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

  • प्रेम रावत
    लॉस एंजेलिस, कैलिफोर्निया
    14 फरवरी 2023

अगर पैसे से खुशी मिलती तो दुनिया के सारे अमीर खुशियां ही खरीद लेते।

अगर पैसे से खुशी मिलती
तो दुनिया के सारे अमीर
खुशियां ही खरीद लेते।

खुशी
जीवन जीने के ढंग से आती है।

जिंदगी
भले ही खूबसूरत हो।
लेकिन
जीने का अंदाज खूबसूरत ना हो तो इसे बदसूरत होते देर नहीं लगती।

झोंपड़ी
में भी कोई आदमी
आनन्द से लबालब मिल सकता है और कोठियों में भी दुखी, अशांत और परेशान!
*

तो एक आम बात है।
इसलिए
आज से ही सोचने का ढंग बदल लें!
जिंदगी उत्सव बन जायेगी।

प्रेम के मार्ग पर चलोगे
तो सबका साथ बिना माँगे ही मिलेगा और जीवन स्वर्ग बन जायेगा।

जीवन में अनेक लोग मिलते हैं। कुछ दिन तक साथ रहते हैं।

जीवन में अनेक लोग मिलते हैं। कुछ दिन तक साथ रहते हैं।
“उनके साथ संबंध बनता है। कुछ दिन चलता है, और कुछ ही दिनों में टूट जाता है।”

फिर कुछ और नए लोग मिलते हैं। उनके साथ संबंध जुड़ता है।
“कुछ दिन उनके साथ भी संबंध चलता है, और कुछ दिनों में उनसे भी टूट जाता है।”

“इस प्रकार से बहुत सारे लोग जीवन में मिलते हैं। उनके साथ संबंध बनते रहते हैं, और टूटते रहते हैं। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं, जिनके साथ लंबे समय तक संबंध बना रहता है।”

आखिर इसका कारण क्या है? क्यों संबंध टूट जाते हैं?
इसमें अनेक कारण हो सकते हैं। उनमें से एक मुख्य कारण यह है कि –
“व्यक्ति जब दूसरों के साथ उचित व्यवहार नहीं करता, तब दूसरे व्यक्ति को कष्ट होता है। एक दो बार तो व्यक्ति उस कष्ट को सहन कर लेता है, परंतु सहन करने की भी प्रत्येक व्यक्ति की एक सीमा होती है। उस सीमा तक वह उस कष्ट को सहन कर लेता है। और जब वह देखता है कि इस संबंध में मुझे लाभ कम हो रहा है तथा कष्ट अधिक हो रहा है, तब वह संबंध तोड़ देता है। फिर चाहे वह कोई बाहर का व्यक्ति हो, चाहे घर का सदस्य हो।”

“संबंध, खून के रिश्तों पर नहीं टिकते। बल्कि नम्रता सभ्यता धार्मिकता अनुशासन न्यायप्रियता इत्यादि गुणों के आधार पर टिकते हैं। सेवा और सम्मान के आधार पर टिकते हैं।”

“जब किसी व्यक्ति की दृष्टि में सम्मान कम हो जाता है, भाषा में सभ्यता नहीं रहती, फिर वह संबंध बहुत दिन तक नहीं टिकता, और शीघ्र ही टूट जाता है।”

इसलिए यदि आप किसी व्यक्ति के साथ लंबे समय तक संबंध बनाए रखना चाहते हों तो आपकी दृष्टि में उसके प्रति सम्मान होना चाहिए, और आप की भाषा में सभ्यता होनी चाहिए अन्यथा कुछ ही दिनों में वह संबंध टूट जाएगा। फिर चाहे वह व्यक्ति घर से बाहर का हो, चाहे घर का सदस्य भी क्यों न हो!”

आपने अखबारों में ऐसी घोषणाएं पढ़ी होंगी। वहां लिखा रहता है, कि “आज से मैं अपने बेटे के साथ संबंध तोड़ रहा हूं। आज से कोई व्यक्ति मेरे नाम पर इसके साथ कोई आर्थिक व्यवहार आदि आदि न करें। यदि करेगा, तो उसकी जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी।”

“अतः जीवन को सुखमय और सफल बनाने के लिए सबके साथ अच्छी भाषा बोलें, तथा सम्मानपूर्वक सभ्यतापूर्वक व्यवहार करें।”

जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती है.

जाके हृदय, भगति जसि प्रिती।
प्रभु तहं प्रगट, सदा तेहिं रीति।

अर्थ: जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती है, प्रभु वहां (उसके लिए) सदा उसी रीति से प्रकट होते है।