February 10, 2023 in Spiritual
जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती है.
जाके हृदय, भगति जसि प्रिती।
प्रभु तहं प्रगट, सदा तेहिं रीति।
अर्थ: जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती है, प्रभु वहां (उसके लिए) सदा उसी रीति से प्रकट होते है।
February 10, 2023 in Spiritual
जाके हृदय, भगति जसि प्रिती।
प्रभु तहं प्रगट, सदा तेहिं रीति।
अर्थ: जिसके हृदय में जैसी भक्ति और प्रीति होती है, प्रभु वहां (उसके लिए) सदा उसी रीति से प्रकट होते है।
February 7, 2023 in Spiritual
वास्तविक सुख वह है जो आत्मा को तृप्ति कर दे!
जो दुःख से आक्रान्त न हो,
या दुःख से आलिप्त न हो
जिसमें दुःख अन्तर्निहित न हो
जिसे पाने के बाद
और कुछ पाना शेष न रहे-
वही सच्चा सुख है!
बाकी दुनिया में
सुख के नामपर जो ले कुछ भी है –
वह वास्तविक सुख नहीं बल्कि
सुखाभास मात्र है!
क्योंकि
उसमें दुःख अन्तर्निहित है!
दर्द एक संकेत है कि –
आप जीवित हैं!
समस्या एक संकेत है कि –
आप मजबूत हैं!
प्रार्थना एक संकेत है कि –
आप अकेले नहीं हैं।
एक अदभुत शक्ति
हमेशा आपके साथ है-
उस पर
100%भरोसा रखकर चलो।
अच्छा शुद्ध वाइब्रेशन्स रखो,
सब उत्तम ही होगा!
वैसे नकारात्मक सोच वाले लोग
कल भी दुखी थे
और
सुखी आज भी नहीं हैं!
लोग कब समझेंगे कि –
दिल को सकून
सिर्फ
ईश्वर से यारी बनाने से मिलता है, दुनिया के पीछे भागने से नहीं!
इसलिए
अपने व्यवहार और सकारात्मक सोच का सन्तुलन रखें!
ताकि
जीवन का हर पल आनंदित बना रहे!
🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻
January 27, 2023 in Hindi, Spiritual
ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है
आती हैं आंधियां तो कर उनका खैर मकदम
तूफां से ही तो लड़ने खुदा ने तुझे गढ़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है
अग्नि में तप के सोना है और भी निखरता
दुर्गम को पार कर के हिमालय कोई चढ़ाए
लाएगी रंग मेहनत आखिर तुम्हारी इकदिन
होगा विशाल तरुवर,वो बीज जो पड़ा है
ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है
वो सर्व शक्तियों से जब साथ है हमारे
हर काम उसके रहते हरदम हुआ पड़ा है
कभी हारना ना,हिम्मत के कदम बढ़ाओ
हज़ारों कदम बढ़ाने वो सामने खड़ा है
ये मत कहो खुदा से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा खुदा बड़ा है
January 27, 2023 in Hindi, Spiritual
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है
आती हैं आंधियां तो कर उनका खैर मकदम
तूफां से ही तो लड़ने प्रभु ने तुझे गढ़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है
अग्नि में तप के सोना है और भी निखरता
दुर्गम को पार कर के हिमालय कोई चढ़ाए
लाएगी रंग मेहनत आखिर तुम्हारी इकदिन
होगा विशाल तरुवर,वो बीज जो पड़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है
वो सर्व शक्तियों से जब साथ है हमारे
हर काम उसके रहते हरदम हुआ पड़ा है
कभी हारना ना,हिम्मत के कदम बढ़ाओ
हज़ारों कदम बढ़ाने वो सामने खड़ा है
ये मत कहो प्रभु से मेरी मुश्किलें बड़ी हैं
इन मुश्किलों से कह दो मेरा प्रभु बड़ा है
January 27, 2023 in Spiritual
जब कोई इंसान इस दुनिया से विदा हो जाता है तो उसके कपड़े और उसके बिस्तर आदि उसी के साथ तुरन्त घर से निकाल दिये जाते हैं।
पर कभी कोई उसके द्वारा कमाया गया धन-दौलत-प्रोपर्टी आदि इन सबको नहीं छोड़ता? यहां तक कि मरे हुए के शरीर से कीमती चीजें चुपके से निकालकर जेब में डाल लेते हैं।
इससे पता चलता है कि आखिर रिश्ता किन चीजों से था?… और असली रिश्ता क्या है… जो जाने वाले के साथ जाती है?
हाड़ जले ज्यूँ लाकड़ी, केश जले ज्यूँ घास।
कंचन जैसी काया जल गई, कोई न आया पास।।
फिर भी
इस अटल सत्य को बोध होने के बावजूद, आज का इंसान मेरा मेरी के चक्कर में उलझा रहता है और अपनों से ही छल करता रहता है और परमात्मा द्वारा दिए इस जीवन रुपी उपहार का असली आनन्द लेने से वंचित रह जाता है!
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
January 26, 2023 in Spiritual
Saraswati Puja is one of the major festivals of Hindus. The Saraswati Puja date is on Thursday January 26, 2023. And the Saraswati Puja time 2023 is 07:12 AM to 12:33 PM.
The colour yellow has a lot of significance on Basant Panchami, also known as Vasant Panchami, Shri Panchami and Saraswati Panchami, where Hindu devotees celebrate the day by wearing yellow outfits, worshipping goddess Saraswati and eating traditional dishes.
What is food of Basant Panchami?
Zarda rice: The most popular or can say the most important dish of Basant Panchami is Zarda rice. Also known as ‘meethe chawal’, this dish is prepared with basamati rice, nuts, saffron and sugar. Few people also add yellow food colour to the rice, to give a kesari colour to the dish.
Which fruit is used in Saraswati Puja?
Baer or ber, is a fruit that is deeply associated with Basant Panchami and Saraswati Puja. Offer this Indian berry to the gods, and then have it as a prasad for an auspicious year. Malpua is typically prepared in North Indian homes, and you can get equally delicious versions at your local halwai as well.
बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और दिन के मध्य भाग से पहले की जाती है. इसे पूर्वाह्न भी कहा जाता है. बसंत पंचमी की पूजा शुभ मुहूर्त में की जाती है. शुभ मुहूर्त में पूजा करना बेहद लाभकारी माना गया है. बसंत पंचमी पूजन का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक ही है. पूजा-पाठ और दान का कार्य इस समय से पहले कर लें.
बसंत पंचमी पर घर लाएं ये खास चीजें
बसंत पंचमी के दिन घर में मोरपंखी का पौधा भी लाना शुभ होता है. इस पौधे को घर की पूर्व दिशा में जोड़े में लगाना चाहिए. अगर आप संगीत के शौकीन हैं तो बसंत पंचमी के दिन कोई छोटा सा वाद्य यंत्र खरीद कर अपने घर लाएं. इस दिन एक छोटी सी बांसुरी खरीद कर भी आप मां सरस्वती को प्रसन्न कर सकते हैं. बसंत पंचमी के दिन घर में सरस्वती मां का कोई चित्र, मूर्ति या प्रतिमा लाना चाहिए. नया घर या वाहन खरीदने के लिए भी बसंत पंचमी का दिन बहुत शुभ होता है. माना जाता है कि बसंत पंचमी के दिन खरीदी गई नई चीजें घर में बरकत लाती हैं.
बसंत पंचमी पर आज ना करें ये गलतियां
बसंत पंचमी के दिन देर तक नहीं सोना चाहिए. इससे देवी मां की कृपा नहीं मिलती है. इस दिन मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए और तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए. बसंत पंचमी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. इस दिन पेड़-पौधे काटने की भी मनाही होती है. किसी को अपशब्द कहने से बचें. बसंत पंचमी का दिन विद्या की देवी सरस्वती का दिन होता है इसलिए इस दिन भूलकर भी कलम, कागज, दवात या शिक्षा से जुड़ी चीजों का अपमान नहीं करना चाहिए. इसे सरस्वती मां नाराज होती हैं.
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती को लगाएं पीले चावल का भोग
बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उन्हें मीठे केसरी भात यानी पीले चावल का भोग लगाया जाता है. आप आज पीली मिठाई भी चढ़ा सकते हैं. माना जाता है कि आज के दिन विद्या की मां सरस्वती को पीले रंग की चीजों का भोग लगाने से वह जल्द प्रसन्न हो जाती हैं. इस दिन पूजा में मां को पीले फूल अर्पित करने चाहिए.
आज इस मंत्र से करें मां सरस्वती को प्रसन्न
या कुंदेंदु-तुषार-हार-धवला, या शुभ्रा – वस्त्रावृता,
या वीणा – वार – दण्ड – मंडित – करा, या श्वेत – पद्मासना।
या ब्रह्माच्युत – शङ्कर – प्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दित,
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि: शेष – जाड्यापहा।।
इस श्लोक का अर्थ है कि जो देवी कुन्द के फूल, चन्द्रमा, हिमराशि और मोतियों के हार की तरह श्वेत वर्ण वाली है और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभा दे रहा है व जो श्वेत कमल पर विराजमान हैं, ब्रह्मा-विष्णु-शिव आदि देवताओं द्वारा जो हमेशा पूजित हैं तथा जो संपूर्ण जड़ता व अज्ञान को दूर करने वाली हैं, ऐसी हे माँ सरस्वती! आप हमारी रक्षा करें.
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त
बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने की परंपरा है. यह दिन ज्ञान, विद्या, बुद्धिमत्ता, कला और संस्कृति की देवी मां सरस्वती को समर्पित है. शुभ मुहूर्त में देवी सरस्वती की पूजा विशेष फलदायी होती है. आज सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा.
January 26, 2023 in Only Happened In India, Spiritual
26 जनवरी – गणतन्त्र दिवस
मातृभुमि के सम्मान एवं उसकी आजादी के लिये असंख्य वीरों ने अपने जीवन की आहूति दी थी। देशभक्तोंकी गाथाओं से भारतीय इतिहास के पृष्ठ भरे हुए हैं। देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हजारों की संख्या में भारत माता के वीर सपूतों ने, भारत को स्वतंत्रता दिलाने में अपना सर्वस्य न्योछावर कर दिया था। ऐसे ही महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के परिणाम स्वरूप हमारा देश, गणतान्त्रिक देश हो सका।
गणतन्त्र (गण+तंत्र) का अर्थ है, जनता के द्वारा जनता के लिये शासन। इस व्यवस्था को हम सभी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। वैसे तो भारत में सभी पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं, परन्तु गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं। इस पर्व का महत्व इसलिये भी बढ जाता है क्योंकि इसे सभी जाति एवं वर्ग के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं।
गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं? मित्रों, जब अंग्रेज सरकार की मंशा भारत को एक स्वतंत्र उपनिवेश बनाने की नजर नही आ रही थी, तभी 26 जनवरी 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरु जी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पूर्णस्वराज्य की शपथ ली। पूर्ण स्वराज के अभियान को पूरा करने के लिये सभी आंदोलन तेज कर दिये गये थे। सभी देशभकतों ने अपने-अपने तरीके से आजादी के लिये कमर कस ली थी। एकता में बल है, की भावना को चरितार्थ करती विचारधारा में अंग्रेजों को पिछे हटना पङा। अंतोगत्वा 1947 को भारत आजाद हुआ, तभी यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1929 की निर्णनायक तिथी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनायेंगे।
26 जनवरी, 1950 भारतीय इतिहास में इसलिये भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व मे आया और भारत वास्तव में एक संप्रभु देश बना। भारत का संविधान लिखित एवं सबसे बङा संविधान है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 वर्ष, 11 महिना, 18 दिन लगे थे। भारतीय संविधान के वास्तुकार, भारत रत्न से अलंकृत डॉ.भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतान्त्रिक देश बन गया।देश को गौरवशाली गणतन्त्र राष्ट्र बनाने में जिन देशभक्तो ने अपना बलिदान दिया उन्हे याद करके, भावांजली देने का पर्व है, 26 जनवरी।
मित्रो, भारत से व्यपार का इरादा लेकर अंग्रेज भारत आये थे, लेकिन धीरे -धीरे उन्होने यहाँ के राजाओं और सामंतो पर अपनी कूटनीति चालों से अधिकार कर लिया। आजादी कि पहली आग मंगल पांडे ने 1857 में कोलकता के पास बैरकपुर में जलाई थी, किन्तु कुछ संचार संसाधनो की कमी से ये आग ज्वाला न बन सकी परन्तु, इस आग की चिंगारी कभी बुझी न थी। लक्ष्मीबाई से इंदिरागाँधी तक, मंगल पांडे से सुभाष तक, नाना साहेब से सरदार पटेल तक, लाल(लाला लाजपत राय), बाल(बाल गंगाधर तिलक), पाल(विपिन्द्र चन्द्र पाल) हों या गोपाल, गाँधी, नेहरु सभी के ह्रदय में धधक रही थी। 13 अप्रैल 1919 की (जलिया वाला बाग) घटना, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे अधिक दुखदाई घटना थी। जब जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था। यही वह घटना थी जिसने भगत सिंह और उधम सिंह जैसे, क्रांतीकारियों को जन्म दिया। अहिंसा के पुजारी हों या हिंसात्मक विचारक क्रान्तिकारी, सभी का ह्रदय आजादी की आग से जलने लगा। हर वर्ग भारतमात के चरणों में बलिदान देने को तत्पर था।
अतः 26 जनवरी को उन सभी देशभक्तों को श्रद्धा सुमन अपिर्त करते हुए, गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भारतवर्ष के कोने-कोने में बड़े उत्साह तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रति वर्ष इस दिन प्रभात फेरियां निकाली जाती है। भारत की राजधानी दिल्ली समेत प्रत्येक राज्य तथा विदेषों के भारतीय राजदूतावासों में भी यह त्योहार उल्लास व गर्व से मनाया जाता है।
26 जनवरी का मुख्य समारोह भारत की राजधानी दिल्ली में भव्यता के साथ मनाते हैं। देश के विभिन्न भागों से असंख्य व्यक्ति इस समारोह की शोभा देखने के लिये आते हैं। हमारे सुरक्षा प्रहरी परेड निकाल कर, अपनी आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हैं तथा सुरक्षा में सक्षम हैं, इस बात का हमें विश्वास दिलाते हैं। परेड विजय चौक से प्रारम्भ होकर राजपथ एवं दिल्ली के अनेक क्षेत्रों से गुजरती हुयी लाल किले पर जाकर समाप्त हो जाती है। परेड शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री ‘अमर जवान ज्योति’ पर शहीदों को श्रंद्धांजलि अर्पित करते हैं। राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ 14 घोड़ों की बग्धी में बैठकर लालकिले पर आते हैं, जहाँ प्रधानमंत्री उनका स्वागत करते हैं। राष्ट्रीय धुन के साथ ध्वजारोहण करते हैं, उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है, हवाई जहाजों द्वारा पुष्पवर्षा की जाती है। आकाश में तिरंगे गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जाते हैं। जल, थल, वायु तीनों सेनाओं की टुकडि़यां, बैंडो की धुनों पर मार्च करती हैं। पुलिस के जवान, विभिन्न प्रकार के अस्त्र-षस्त्रों, मिसाइलों, टैंको, वायुयानो आदि का प्रदर्षन करते हुए देश के राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। सैनिकों का सीना तानकर अपनी साफ-सुथरी वेषभूषा में कदम से कदम मिलाकर चलने का दृष्य बड़ा मनोहारी होता है। यह भव्य दृष्य को देखकर मन में राष्ट्र के प्रति भक्ति तथा ह्रदय में उत्साह का संचार होता है। स्कूल, कॉलेज की छात्र-छात्राएं, एन.सी.सी. की वेशभूषा में सुसज्जित कदम से कदम मिलाकर चलते हुए यह विश्वास उत्पन्न करते हैं कि हमारी दूसरी सुरक्षा पंक्ति अपने कर्तव्य से भलीभांति परिचित हैं। मिलेट्री तथा स्कूलों के अनेक बैंड सारे वातावरण को देशभक्ति तथा राष्ट्र-प्रेम की भावना से गुंजायमान करते हैं। विभिन्न राज्यों की झांकियां वहाँ के सांस्कृतिक जीवन, वेषभूषा, रीति-रिवाजों, औद्योगिक तथा सामाजिक क्षेत्र में आये परिवर्तनों का चित्र प्रस्तुत करती हैं। अनेकता में एकता का ये परिदृष्य अति प्रेरणादायी होता है। गणतन्त्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति भवन, संसद भवन तथा अन्य सरकारी कार्यालयों पर रौशनी की जाती है।
26 जनवरी का पर्व देशभक्तों के त्याग, तपस्या और बलिदान की अमर कहानी समेटे हुए है। प्रत्येक भारतीय को अपने देश की आजादी प्यारी थी। भारत की भूमि पर पग-पग में उत्सर्ग और शौर्य का इतिहास अंकित है। किसी ने सच ही कहा है- “कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है।“ ऐसे ही अनेक देशभक्तों की शहादत का परिणाम है, हमारा गणतान्त्रिक देश भारत।
26 जनवरी का पावन पर्व आज भी हर दिल में राष्ट्रीय भावना की मशाल को प्रज्वलित कर रहा है। लहराता हुआ तिरंगा रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुँओर खुशियों की सौगात है। हम सब मिलकर उन सभी अमर बलिदानियों को अपनी भावांजली से नमन करें, वंदन करें।
जय हिन्द, जय भारत
January 25, 2023 in Spiritual, Stories
सतसंग और विवेक ऐसी शक्ति है, जिसके बिना मानव सत्य-असत्य, अच्छे-बुरे का आकलन करने में असमर्थ रहता है।
इसके अभाव में मानव और पशु की सीमा-रेखा धुंधला जाती है। निद्रा, भोजन, भोग, भय के स्तर पर ज्ञान और विवेक के कारण ही मानव सबसे अलग नजर आता है।
आत्मज्ञान नहीं, विवेक नहीं, तो मानव भी मानव नहीं रहता।
सत्य का संग यानी सतसंग करने से ही विवेक प्राप्त किया जा सकता है।
सतसंग के लिए पढ़ा-लिखा या सम्पन्न, धनी होना भी जरूरी नहीं है।
शबरी को श्रीराम जी का संग प्राप्त हुआ। उसे इसके लिए कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं करना पड़ा। श्रीराम जी के आगमन पर शबरी ने जो कुछ उसके पास उपलब्ध था उसी से उनकी सेवा की। सेवा और सतसंग जुड़े हुए हैं।
केवट ने तो सिर्फ श्रीराम जी के पाँव ही पखारे थे, उससे ही उसका उद्धार हो गया।
आत्मज्ञान सतसंग का प्राण है।
शबरी बेर खिला रही है और श्रीराम जी खा रहे हैं, लेकिन लक्ष्मण को कुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है।
यह मन की प्रवृत्ति है। मन सतसंग में आकर भी बुराइयाँ ही खोजता है। वह बुराइयाँ केवल ढूँढ़ता ही नहीं है उन्हें उजागर करने का हर सम्भव प्रयास करता है।
ऐसी निन्दा से सतसंग के फल को नष्ट कर लेना विवेक शून्यता की निशानी है।
श्रीराम जी जब नवधा भक्ति का उपदेश देने लगे तब केवल वे ही बोल रहे हैं, शबरी मौन है, एकदम शान्त और प्रतिक्रिया विहीन।
सच्चे सदगुरु के वचनों को आत्मसात करने के लिए जिस एकाग्रचित्तता की आवश्यकता होती है, वह शान्त रहकर ही प्राप्त होती है, हलचल में या बड़बोलेपन नहीं।
इसलिए यह सुनना और सुनाना दोनों सफल हुआ, सार्थक हुआ। सतसंग में लक्ष्य पर ही नजर होनी चाहिए। सतसंग में जाने से सेवा भी होती है और “सुमिरण-भजन” भी होता है।
यह सत्य है कि सतसंग में आने से सब कुछ मिल जाता है लेकिन, सतसंग में आकर भी कामनाओं, निन्दा, ईर्ष्या के पीछे भागना सतसंग के फल को नष्ट करना है।
सेवा और सुमिरण सतसंग रूपी वृक्ष के दो सुन्दर फल हैं क्योंकि सतसंग में चलकर जाना भी सेवा है। वहाँ बैठना, सुनना, जय सच्चिदानन्द करना सब सेवा के रूप हैं।
जब ऐसी मनोस्थिति बन जाती है तब “नाम-सुमिरण” हर स्वाँस में स्वतः होता है, तब अभ्यास के समय बिना प्रयास के मन “नाम-सुमिरण” में लीन हो जाता है और मेरे-तेरे का भेद मिट जाता है।
उसी पल प्राणों के अन्दर परमानन्द के अनुभव से मनुष्य जीवन सफल हो जाता है।
जीवन में परिवर्तन लाने के लिए सच्चे सद्गुरु का संग व सेवा करने के लिए कहा है।
🌹 – श्री हंस जी महाराज
January 14, 2023 in Spiritual
अगर हमें सुबह जल्दी बाहर जाना है या कुछ काम है, तो हम सुबह 4.00 बजे का अलार्म लगाकर सो जाते हैं.
और अक़्सर हम उस दिन Alarm के पहले ही उठ जाते हैं…
“This is Bio-clock”.
बहुत से लोग ये मानते हैं कि वो 80-90 की उम्र में चले जाएँगे.
और
काफी लोग ये विश्वास करते हुए अपनी Bio-clock दिमाग़ में set कर लेते हैं, कि 50-60 की उम्र में सभी बीमारियाँ उन्हें घेर लेंगी, ऐसे लोग सामान्यतः 50-60 की उम्र में बीमारियों से घिर जाते हैं और जल्दी ही भगवान को प्यारे भी हो जाते हैं.
Actually हम अंजाने में अपनी गलत Bio-clock सेट कर लेते हैं.
चाइना में लोग आराम से 100 साल तक जीते हैं, क्योंकि उनकी Bio-clock उसी तरह set रहती है.
अतः मित्रो,
ध्यान रखें, हम जैसा अपने मन में सोचते हैं, हमारे शरीर की सारी प्रक्रियाएँ उसी हिसाब से काम करती हैं
अत: जीवन में हमारी सोच,हमेशा सकारात्मक होनी चाहिए
नव-वर्ष में सभी संकल्प लें
और
जीवन की पिच पर शतकीय पारी खेले।
January 11, 2023 in Spiritual
| मेष | Aries |
| वृष/वृषभ | Taurus |
| मिथुन | Gemini |
| कर्क | Cancer |
| सिंह | Leo |
| कन्या | Virgo |
| तुला | Libra |
| वृश्चिक | Scorpius |
| धनु | Sagittarius |
| मकर | Capricornus |
| कुम्भ | Aquarius |
| मीन | Pisces |