Gurudev, I am in love with you.

गुरुवर तुमसे लगन लगी है।
तुम्हरे दरश की आस जगी है।

निशदिन तेरा ध्यान धरूं मैं, तेरे ही गुण गाऊं।
तन-मन-धन सब वारूं तुम पर, तेरी ही हो जाऊं ॥

कृपा करो मुझ पर मेरे दाता, मैं बलिहारी जाऊं।
ऐसा ज्ञान दिया मेरे सतगुरू, मन का भरम मिटाऊं ॥

जग के झूठे बंधन काटे, अपनी शरण लगाया।
सतगुरु संत मिले सखी ऐसे, मेरा मन हरषाया ॥

बिन दर्शन हैं व्याकुल अँखियां, पल छिन चैन न आये।
दर्शन की अभिलाषा लेकर, तेरे दर पे आये ॥
आ जाओ, अब दरश दिखा दो, कब से आस लगाये ॥

O Lord, O Lord, have mercy on us now.

हे हे प्रभु प्रभु हम हम पर पर दय दया अब कीजिये।
मन के सारे पापों को हर लीजिये ॥

मन के सागर में बहे जाते हैं हम।
करूणा करके पार इससे कीजिये ॥

मन सदा निर्लेप विषयों से रहे।
भक्ति और विश्वास हमको दीजिये ॥

तुमसे ही रिश्ता रहे, नाता रहे।
और सब आशा हरि हर लीजिये ॥

हो शहंशाह रंक सब एक-सा हमें।
ऐसी समता दान हमको दीजिये ॥

Satguru’s pleasing beauty, makes everyone crazy.

सतगुरु के मनभावन सुरतिया, सबके दीवाना बनवले बा॥

नाम रूप के ज्ञान कराइके, आवागमन मिटवले बा।
घट ही में अमृत पान कराइके, घट-घट में ज्योति जगवले बा ॥

सुमिरन सुरतिया लगाइके भइया, घट उजियारा लखवले बा।
ताला खोल जब शब्द निराला, अनहद के गूंज सुनवले बा ॥

चारों तरफ से भक्तन के नारा, प्रेम के धूम मचवले बा।
हाथ जोड़ के विनती करत प्रेमी, चरनन में शीश झुकवले बा ॥

We have come to your shelter, have mercy, O Merciful Lord

शरण में आए हैं हम तुम्हारी, दया करो, हे दयालु भगवन।
सम्भालो बिगड़ी दशा हमारी, दया करो, हे दयालु भगवन ॥

न हम में बल है, न हम में शक्ति, न हम में साहस, न हम में भक्ति।
तुम्हारे दर के हैं हम भिखारी, दया करो, हे दयालु भगवन ॥

सुना है हम अंश हैं तुम्हारे, तुम्हीं हो सच्चे प्रभु हमारे।
तो सुधि हमारी है क्यूं बिसारी, दया करो, हे दयालु भगवन ॥

प्रदान कर दो महान भक्ति, भरो हमारे में ज्ञान भक्ति।
तभी कहाओगे तापहारी, दया करो, हे दयालु भगवन ॥

O sailor of the boat of my life, do not let go of the rudder.

ओ मेरे जीवन की नइया के नाविक, छोड़ो नहीं पतवार।
गुरुवर छोड़ो नहीं पतवार ।।

रह-रह के नइया भंवर बीच डोले, आता है अंधड़ तूफान ।
अंधा मुसाफिर, नहीं देख पाता, आँसू भरा आसमान ॥

इतना सही है कि नादान हैं हम, लेकिन हैं बच्चे तुम्हारे ।
मुझको भरोसा यही है कि गुरुवर, कर देंगे नइया किनारे ॥

जीवन की नइया में साथी ना कोई, दे दो हमें तुम सहारा।
ओ मेरे नाविक मुझे पार कर दो, छूटे ना हमसे किनारा ॥

वर दो हमें कि यहां से हमारा, हो जाये बेड़ा पार,

गुरुवर छोड़ो नहीं पतवार ॥

Gurudev, save me, I have taken refuge in you.

गुरुदेव बचाओ मुझे, मैं शरण पड़ा तेरी।
करुणा के सागर हो, प्रभु विनती सुनो मेरी ॥

यह दुनिया सताती है, तेरे दर से हटाती है।
दीनों के सहायक हो, अब क्या है नाथ देरी ॥

तुम समरथ दाता हो, मेरे भाग्य विधाता हो।
भक्तों के प्यारे हो, अब बांह पकड़ मेरी ॥

तुम कितने सुंदर हो, तेरे जैसा और नहीं।
जीवन के उजाले हो, प्यारी है झलक तेरी ॥

तेरी शक्ति का अंत नहीं, तेरी महिमा का पार नहीं।
तुम मुक्ति के दाता हो, प्रभु लीजिये सुधि मेरी ॥

My heart is at the feet of the Guru.

मेरो मन, गुरु चरणन में लाग।
गुरु चरणन में तीरथ सारे, धोले अपने दाग ॥

कौन सहारा है दाता बिन, कौन हमारा है दाता बिन।
ज्ञान-धन सब गुरु बिन झूठा, अब तो मूरख जाग ॥

दाता बिना है जीवन सूना, दाता बिना है हर क्षण सूना।
दाता बिना है उजड़ा-उजड़ा, दुनिया का ये बाग ॥

इस जीवन में दाता आये, किरपा से फिर ज्ञान भी पाये।
दाता दानी जब मिल गये हैं, खुल गये अपने भाग ॥

True happiness is found only at your feet, Gurudev.

मिलता है सच्चा सुख केवल, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में ॥

स्वासों में तुम्हारा नाम रहे, दिन-रात सुबह और शाम रहे।
हर वक्त यही बस ध्यान रहे, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में ॥

चाहे संकट ने आ घेरा हो, चाहे चारों ओर अंधेरा हो।
पर चित्त न डगमग मेरा हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥

चाहे अग्नि में भी जलना हो, चाहे कांटों पर भी चलना हो।
चाहे छोड़ के देश निकलना हो, रहे ध्यान तुम्हारे चरणों में ॥

The Guru’s lotus shadow dispelled the confusion in my mind.

मेरे मन का भरम मिटाया, गुरु कर कमलों की छाया ॥

बहा जात था भव धारा में, मल विक्षेप कीचड़ गारा में।
अपने हाथ उठाया, गुरु कर कमलों की छाया ॥

काम, क्रोध मम दुश्मन भारा, तीक्ष्ण तेग ज्ञान की धारा।
देकर वीर बनाया, गुरु कर कमलों की छाया ॥

सगुण रूप में आप संभाला, निर्गुण घट का खोला ताला।
अपने देश बसाया, गुरु कर कमलों की छाया ॥

दिव्य देश के सतगुरु वासी, दीपक दीन्हा स्वयं प्रकाशी।
घट घट आप समाया, गुरु कर कमलों की छाया ॥

समझाई गुरु अकथ कहानी, बिन रसना मन-मोहनि बानी।
बिन स्वर शब्द सुनाया, गुरु कर कमलों की छाया ॥

चेतन देव गुरु हंस हमारे, सभी ओम के काज संवारे।
शरण दास तेरी आया, गुरु कर कमलों की छाया ॥

My Gurudev has awakened the sleeping world.

सोया जगत गुरुदेव मेरे ने, आन जगाया है।
जाग उठो नर नार आज, फिर सद्गुरु आया है ॥

भूले बचन की याद दिलाने, गीता का वह ज्ञान कराने।
बली अर्जुन को महाभारत में, जो समझाया है ॥

सत्य बचन तुम मेरा सुन लो, आये हैं गुरुवर उनसे मिल लो।
युग-युग में सद्‌गुरु ने सच्चा ज्ञान कराया है॥

जब जब धर्म उजड़ते देखा, भक्तों को अपने रोते देखा।
आन संत ने आज उन्हें फिर गले लगाया है॥

सतगुरु की तुम शरण लो प्यारे, संत योगेश्वर तुम्हें पुकारें।
कलियुग में नर रूप लिए, वही सतगुरु आया है ॥