December 16, 2025 in Spiritual
Belief also separates
विश्वास भी विलगाता है क्या विश्वास (आस्था) की स्वीकृति से हम स्वयं को समझ पाते हैं? होता ठीक इसके विपरीत है। विश्वास चाहे धार्मिक हो या राजनीतिक, स्वयं को समझने में बाधक बनता है। वह एक ऐसे आवरण का कार्य करता है, जिससे हम खुद को देखते हैं। तो क्या हम बिना विश्वास के अपने […]






